Hamirpur: जिंदगी की जंग…प्रसव पीड़ा से तड़पती बहू, ससुर ने बैलगाड़ी से पार कराया तीन किमी का दलदल
Hamirpur News: परसदवा का डेरा में एंबुलेंस न पहुंचने के कारण वृद्ध ससुर ने प्रसव पीड़ा से तड़पती बहू को बैलगाड़ी पर लिटाकर तीन किलोमीटर दलदल पार कराया। ग्रामीणों का आरोप है कि आज़ादी के बाद से सड़क नहीं बनी है, जबकि अधिकारियों ने बजट की कमी बताकर पल्ला झाड़ लिया।
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हमीरपुर जिले में मौदहा ब्लॉक के गऊघाट छानी ग्राम पंचायत पंचायत के परसदवा का डेरा में रविवार सुबह प्रसव पीड़ा से तड़पती रेशमा (23) के दर्द ने सभी को झकझोर दिया। गांव तक एंबुलेंस न पहुंच पाने के कारण वृद्ध ससुर कृष्ण कुमार केवट ने उसे बैलगाड़ी पर लिटाकर दलदल से भरे रास्तों से तीन किलोमीटर का दर्दनाक सफर तय किया। गांव से बाहर भटुरी तक पहुंचने के बाद ही एंबुलेंस मिल सकी, तब जाकर रेशमा को अस्पताल भेजा गया।
ससुर कृष्ण कुमार ने बताय कि सुबह प्रसव पीड़ा बढ़ने पर एंबुलेंस को कॉल किया गया, लेकिन चालक ने खराब रास्ता बताकर आने से मना कर दिया। मजबूरी में पुरानी बैलगाड़ी निकाली और बहू को उस पर लिटाकर कीचड़, झाड़ियों और कंटीले भरे रास्तों से गुजरना पड़ा। रास्ते में बैलगाड़ी कई बार फंसी, इससे रेशमा का दर्द और बढ़ गया।
इलाज में देरी कर मौत को न्योता देता है मार्ग
रेशमा को भटुरी पहुंचाने के बाद एंबुलेंस से अस्पताल लाया गया। डॉक्टरों ने बताया कि हालत स्थिर है और प्रसव में दो दिन का समय है। रेशमा तो पुनः घर लौट गई, लेकिन डेरा के 500-600 ग्रामीण इसी भय में जीते हैं कि रात के अंधेरे में जंगली जानवरों का खतरा, बारिश में दलदल का जाल, और सबसे घातक समय का नुकससान, जो इलाज में देरी कर मौत को न्योता देता है।
कई बार पक्की सड़क की कर चुके हैं मांग
गांव के निवासी राजेंद्र कुमार ने बताया कि परसदवा डेरा की तीन किलोमीटर सड़क आजादी के बाद से अब तक पक्की नहीं बन पाई है। बरसात के दिनों में यह रास्ता दलदल में तब्दील हो जाता है। कहा कि कई बार पंचायत और ब्लॉक अधिकारियों को लिखा, लेकिन सिर्फ आश्वासन मिला। यह कोई पहली घटना नहीं है। 12 मार्च 2024 को ग्राम पंचायत के युवा समाजसेवी अरुण (राजेंद्र कुमार निषाद) ने इसी सड़क के निर्माण की मांग को लेकर छह दिनों तक अनिश्चितकालीन धरना दिया था।
बजट मिलते ही पूरा कराया जाएगा निर्माण
उस समय उपजिलाधिकारी ने आश्वासन दिया था कि लोकसभा चुनाव के बाद सड़क बनवा दी जाएगी, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। प्रभारी बीडीओ मौदहा राघवेंद्र सिंह ने बताया कि नहर से परसदवा डेरा तक मनरेगा योजना के तहत सीसी रोड डलवाने का कार्य शुरू किया गया था, पर बजट की कमी के कारण अधूरा रह गया। अब शेष सड़क का निर्माण बजट मिलते ही पूरा कराया जाएगा।
मैंने कभी सोचा न था कि मातृत्व का यह पल इतना कष्टदायक होगा
आंखों में आंसू लिए कृष्ण कुमार ने बताया कि यह रास्ता जानलेवा है। मैंने कभी सोचा न था कि मातृत्व का यह पल इतना कष्टदायक होगा। बैलगाड़ी बार-बार कीचड़ में फंस जाती, बहू रेशमा का दर्द देखकर दिल फट जाता। अगर एंबुलेंस पहुंच पाती तो भला होता...।
डेरा को जोड़ने वाली सड़क का निर्माण ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत या जिला पंचायत के माध्यम से कराया जा सकता था। इस मामले में लापरवाही पंचायत स्तर पर दिख रही है। अब तक इस संबंध में कोई सूचना नहीं मिली है, लेकिन समस्या गंभीर है, इसलिए शासन को पत्र भेजकर निर्माण का प्रस्ताव भेजा जाएगा। -मौदहा शेखर मिश्रा, तहसीलदार