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बारूद से हुआ था लोहा मंडी में विस्फोट
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 25 Jun 2015 02:13 AM IST
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लोहामंडी पुलिस चौकी के पीछे 15 जून को हुए विस्फोटस्थल से बुधवार को 860 ग्राम बारूद मिला। यह एक झोले में ग्रे-कलर की पॉलीथिन में रखा था। इसके अलावा 315 और .32 बोर कारतूस के खोखे मिले। आसपास स्टील के कई बर्तन मिले, जिससे बारूद को ढका गया था। इससे तय हो गया कि विस्फोट सिलेंडर से नहीं बल्कि बारूद से हुआ था।
सूत्रों के अनुसार यहां बम बनाए जाते थे और कारतूस भी भरे जाते थे। फोरेंसिक एक्सपर्ट का कहना है कि प्रथम दृष्टया बारूद लो एक्सप्लोसिव (कम घातक विस्फोटक) लग रहा है। जांच विधि विज्ञान प्रयोगशाला में होगी। इधर, बादशाहीनाका पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मकान में रहने वाले दोनों भाइयों तालिब और तारिक को हिरासत में ले लिया है। बुधवार दोपहर बम निरोधक दस्ता और फोरेंसिक टीम ने विस्फोटस्थल पर दूसरी मंजिल से मलबा हटा लिया तो बर्तनों के बीच ढका रखा एक झोला दिखा।
उसे खोलते ही ग्रे कलर की पॉलीथिन में बारूद भरा मिला। मलबे में टीम को लोहे के टुकड़े, कंटेनर के टुकड़े, स्टील के गिलास और शराब की बोतलों के टुकड़े भी मिले हैं। टीम ने इसकी पुष्टि भी की। सूत्रों का कहना है कि टीम को लोहे की एक गरारी नुमा मशीन और सांचा जैसा भी कुछ सामान मिला है। दस्ता प्रभारी एमके पांडेय ने बताया कि अभी यह नहीं कहा जा सकता कि यह पटाखा बनाने वाला बारूद है या उससे तेज।
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विधि विज्ञान प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट से ही इसकी तीव्रता और कंबिनेशन का पता चल सकेगा। फोरेंसिक की प्राइमरी टेस्ट में यह क्लोरेट और ब्रोमेट के फॉर्म में मिला है। टीम के मुताबिक यह लो-एक्सप्लोसिव है लेकिन यदि इसकी मात्रा बढ़ा दी जाए तो इसके परिणाम को घातक होने की आशंका से नकारा नहीं जा सकता। सूत्रों के अनुसार मिलिट्री इंटेलिजेंस की टीम ने भी इलाके में अपने स्तर से छानबीन की है।
एसएसपी शलभ माथुर ने बताया कि विधि विज्ञान प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट में बारूद की तीव्रता और कंबिनेशन का पता चलेगा। प्रथम दृष्टया विस्फोटक होने की पुष्टि हो चुकी है। कमर इकबाल के बेटों तालिब और तारिक को हिरासत में लेकर पूछताछ चल रही है। इनके बाहरी लिंक भी तलाशने की कोशिश होगी।
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सूत्रों के अनुसार यहां बम बनाए जाते थे और कारतूस भी भरे जाते थे। फोरेंसिक एक्सपर्ट का कहना है कि प्रथम दृष्टया बारूद लो एक्सप्लोसिव (कम घातक विस्फोटक) लग रहा है। जांच विधि विज्ञान प्रयोगशाला में होगी। इधर, बादशाहीनाका पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मकान में रहने वाले दोनों भाइयों तालिब और तारिक को हिरासत में ले लिया है। बुधवार दोपहर बम निरोधक दस्ता और फोरेंसिक टीम ने विस्फोटस्थल पर दूसरी मंजिल से मलबा हटा लिया तो बर्तनों के बीच ढका रखा एक झोला दिखा।
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उसे खोलते ही ग्रे कलर की पॉलीथिन में बारूद भरा मिला। मलबे में टीम को लोहे के टुकड़े, कंटेनर के टुकड़े, स्टील के गिलास और शराब की बोतलों के टुकड़े भी मिले हैं। टीम ने इसकी पुष्टि भी की। सूत्रों का कहना है कि टीम को लोहे की एक गरारी नुमा मशीन और सांचा जैसा भी कुछ सामान मिला है। दस्ता प्रभारी एमके पांडेय ने बताया कि अभी यह नहीं कहा जा सकता कि यह पटाखा बनाने वाला बारूद है या उससे तेज।
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विधि विज्ञान प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट से ही इसकी तीव्रता और कंबिनेशन का पता चल सकेगा। फोरेंसिक की प्राइमरी टेस्ट में यह क्लोरेट और ब्रोमेट के फॉर्म में मिला है। टीम के मुताबिक यह लो-एक्सप्लोसिव है लेकिन यदि इसकी मात्रा बढ़ा दी जाए तो इसके परिणाम को घातक होने की आशंका से नकारा नहीं जा सकता। सूत्रों के अनुसार मिलिट्री इंटेलिजेंस की टीम ने भी इलाके में अपने स्तर से छानबीन की है।
एसएसपी शलभ माथुर ने बताया कि विधि विज्ञान प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट में बारूद की तीव्रता और कंबिनेशन का पता चलेगा। प्रथम दृष्टया विस्फोटक होने की पुष्टि हो चुकी है। कमर इकबाल के बेटों तालिब और तारिक को हिरासत में लेकर पूछताछ चल रही है। इनके बाहरी लिंक भी तलाशने की कोशिश होगी।