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Kanpur News: लू से बचाव के लिए स्कूलों में गाइडलाइन जारी, फर्स्ट एड किट अनिवार्य
Sat, 25 Apr 2026 01:48 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Sat, 25 Apr 2026 01:48 AM IST
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कानपुर देहात। जिले में भीषण गर्मी और लू के बढ़ते खतरे को देखते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक ने निर्देश जारी किए हैं। प्रत्येक माध्यमिक स्कूलों में फर्स्ट एड किट रखना अनिवार्य होगा। साथ ही छात्रों को सिरदर्द, चक्कर आने की समस्या होने पर तुरंत चिकित्सक से जांच करानी होगी।
किट में विशेष रूप से ओआरएस के पैकेट, बुखार, उल्टी और दस्त की आपातकालीन दवाएं, छायादार स्थान पर नमक और नीबू पानी की उपलब्धता होनी चाहिए। ताकि किसी भी छात्र की तबीयत बिगड़ने पर तत्काल प्राथमिक उपचार मिल सके। छात्रों को लू से बचाने के लिए स्कूलों के बुनियादी ढांचे में बदलाव के निर्देश दिए गए हैं। सभी कमरों में पंखे क्रियाशील होने चाहिए और खिड़कियों पर रिफ्लेक्टर लगाए जाएं ताकि सीधी धूप और गर्मी को अंदर आने से रोका जा सके। स्कूल बसों की छतों पर पानी का छिड़काव करने और उन्हें सफेद रंग के पेंट से रंगने की सलाह दी गई है। स्वच्छ पानी की निरंतर आपूर्ति और बच्चों को समय-समय पर पानी पीने के लिए प्रेरित करना अनिवार्य होगा।
डीआईओएस बृज भूषण चौधरी ने बताया कि प्रधानाचार्यों को निर्देशित करते हुए शिक्षकों को लू के लक्षणों की पहचान कराने के लिए प्रशिक्षित करने को कहा गया है। यदि किसी छात्र में सिरदर्द, चक्कर आना, त्वचा का सूखना या अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण दिखें, तो शिक्षक तुरंत इलाज कराएं। छात्रों को धूप में शारीरिक श्रम करने से रोका जाए। बच्चों को छाया में बैठाने और चाय-कॉफी जैसे कैफीन युक्त पेय पदार्थों से बचने की सलाह दी गई है। उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण से तैयार यूट्यूब वीडियो के लिंक भी स्कूलों को साझा किए गए हैं, ताकि डिजिटल माध्यम से बच्चों को जागरूक किया जा सके और लू से बचाया जा सके।
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इन बातों का रखें ध्यान......
- हल्के रंग के सूती और ढीले कपड़े पहनें।
- घर से निकलते समय हमेशा अपना सिर ढक कर रखें।
- खाली पेट स्कूल न आएं, नियमित और पौष्टिक भोजन लें।
- ओआरएस या घर के बने पेय जैसे लस्सी व नींबू-पानी का सेवन करें, ताकि शरीर में नमी बने रहे।
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किट में विशेष रूप से ओआरएस के पैकेट, बुखार, उल्टी और दस्त की आपातकालीन दवाएं, छायादार स्थान पर नमक और नीबू पानी की उपलब्धता होनी चाहिए। ताकि किसी भी छात्र की तबीयत बिगड़ने पर तत्काल प्राथमिक उपचार मिल सके। छात्रों को लू से बचाने के लिए स्कूलों के बुनियादी ढांचे में बदलाव के निर्देश दिए गए हैं। सभी कमरों में पंखे क्रियाशील होने चाहिए और खिड़कियों पर रिफ्लेक्टर लगाए जाएं ताकि सीधी धूप और गर्मी को अंदर आने से रोका जा सके। स्कूल बसों की छतों पर पानी का छिड़काव करने और उन्हें सफेद रंग के पेंट से रंगने की सलाह दी गई है। स्वच्छ पानी की निरंतर आपूर्ति और बच्चों को समय-समय पर पानी पीने के लिए प्रेरित करना अनिवार्य होगा।
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डीआईओएस बृज भूषण चौधरी ने बताया कि प्रधानाचार्यों को निर्देशित करते हुए शिक्षकों को लू के लक्षणों की पहचान कराने के लिए प्रशिक्षित करने को कहा गया है। यदि किसी छात्र में सिरदर्द, चक्कर आना, त्वचा का सूखना या अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण दिखें, तो शिक्षक तुरंत इलाज कराएं। छात्रों को धूप में शारीरिक श्रम करने से रोका जाए। बच्चों को छाया में बैठाने और चाय-कॉफी जैसे कैफीन युक्त पेय पदार्थों से बचने की सलाह दी गई है। उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण से तैयार यूट्यूब वीडियो के लिंक भी स्कूलों को साझा किए गए हैं, ताकि डिजिटल माध्यम से बच्चों को जागरूक किया जा सके और लू से बचाया जा सके।
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इन बातों का रखें ध्यान......
- हल्के रंग के सूती और ढीले कपड़े पहनें।
- घर से निकलते समय हमेशा अपना सिर ढक कर रखें।
- खाली पेट स्कूल न आएं, नियमित और पौष्टिक भोजन लें।
- ओआरएस या घर के बने पेय जैसे लस्सी व नींबू-पानी का सेवन करें, ताकि शरीर में नमी बने रहे।