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दो सालों में करदाता को जांच के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए, GST एक्सपर्ट्स ने यहां दिए सुझाव
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Wed, 27 Sep 2017 08:18 PM IST
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वीएसएसडी कॉलेज नवाबगंज कानपुर में जीएसटी कार्यशाला में बोलते डॉ. मनोज अवस्थी
जीएसटी व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए शुरुआती दो सालों में करदाता को जांच के दायरे बाहर रखा जाना चाहिए। मामूली गलतियों पर जुर्माने की व्यवस्था न हो जितनी जल्दी हो डीजल-पेट्रोल को जीएसटी के दायरे में लाया जाये जिससे इनकी कीमतों में कमी हो सके, जीएसटी नई पीढ़ी की कर व्यवस्था है। यह सुझाव जीएसटी विशेषज्ञ सीए धर्मेन्द्र श्रीवास्तव ने कानपुर के नवाबगंज स्थित वीएसएसडी कॉलेज के वाणिज्य संकाय में आयोजित गुड्स एंड सर्विस टैक्स कार्यशाला के दौरान दिए। इस मौके पर सीए नवीन भार्गव ने कहा कि जीएसटी के रिटर्न फाइल करने के लिए तकनीकी रूप से व्यापारियों को सक्षम होना पड़ेगा। इसकी ट्रेनिंग डिग्री कॉलेज के छात्राओं को भी दी जाएगी। कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. मनोज अवस्थी ने कहा कि वन नेशन वन टैक्स की दिशा में केंद्र सरकार द्वारा उठाया गया ये महत्वपूर्ण कदम है। पहले हम किसी वस्तु व सेवा पर विभिन्न प्रकार के प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष कर देते थे अब केवल एक टैक्स जो जीएसटी है केवल वही देना है। जीएसटी जैसे महत्वपूर्ण विषय की भूमिका पर विभागाध्यक्ष डॉ. डीसी गुप्ता ने अपने विचार प्रस्तुत किए।
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राज्य के अंदर कारोबार करने पर स्टेट जीएसटी
वीएसएसडी कॉलेज नवाबगंज कानपुर में जीएसटी कार्यशाला
डॉ. मनोजर अवस्थी ने कहा कि एक जुलाई से जीएसटी लागू होने के बाद केंद्र सरकार द्वारा लगाये जाने वाले सेंट्रल एक्साज एक्ट, सर्विस टैक्स, लक्जरी टैक्स एवं मनोरंजन कर भी समाप्त कर दिया गया है। राज्य के अंदर कारोबार करने पर स्टेट जीएसटी, सेंट्रल जीएसटी और अंतर्राज्यीय जीएसटी सप्लाई पर जीएसटी लागू करने की व्यवस्था की गई है।
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जीएसटी लगने से आयकर के संग्रहण में होगी वृद्धि
वीएसएसडी कॉलेज नवाबगंज कानपुर में जीएसटी कार्यशाला में बोलते डॉ. मनोज अवस्थी
फिलहाल प्रॉपर्टी के लेनदेन पर स्टाम्प ड्यूटी एवं डीजल-पेट्रोल पर वैट एवं एक्साइज ड्यूटी जारी रहेगी। जीएसटी व्यवस्था सूचना तकनीकी आधारित होने की वजह से मानवीय हस्तक्षेप संभव नहीं होगा। कुछ प्रारंभिक परेशानी के बाद इस व्यवस्था से भारतीय कर व्यवस्था स्पष्ट, पारदर्शी एवं कर चोरी को रोकने वाली सिद्ध होगी। जीएसटी लगने से आयकर के संग्रहण में वृद्धि होगी। कार्यक्रम की अध्यक्षता उप प्राचार्य डॉ. हरेराम त्रिपाठी ने की। प्रमुख रूप से डॉ. दिलीप सरदेसाई (पूर्व प्राचार्य) डॉ. यूएन शुक्ला, डॉ. वीबी दीक्षित, डॉ. संजीव शुक्ला, डॉ. भरत सिद्धार्थ, डॉ. रश्मि गुप्ता, डॉ. शिल्पी श्रीवास्तव, पवन शर्मा, अविनाश अवध आदि मौजूद थे।