फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   GST will prepare track and trace system all industries can be monitored every item will be on the radar

Kanpur: जीएसटी तैयार करेगा ट्रैक एंड ट्रेस तंत्र, सभी उद्योगों की हो सकेगी निगरानी, हर सामान रडार पर होगा

Sun, 02 Feb 2025 03:36 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sun, 02 Feb 2025 03:36 PM IST
सार

Kanpur News: बजट में सरकार ने एमएसएमई का दायरा बढ़ा दिया है। इससे इन यूनिटों को सीधा लाभ मिल सकेगा। जीएसटी के कानून व नियमों में कई संशोधन किए गए हैं। संशोधित रिटर्न अब चार साल तक भरे जा सकेंगे।

विज्ञापन
GST will prepare track and trace system all industries can be monitored every item will be on the radar
union budget 2025 - फोटो : amar ujala

विस्तार

सरकार ने जीएसटी में कर चोरी रोकने के लिए बजट में अहम प्रावधान किया है। जीएसटी विभाग में ट्रैक एंड ट्रेस तंत्र तैयार किया जाएगा। हर सामान की विशिष्ट डिजिटल पहचान होगी। इससे हर संवेदनशील उत्पाद जीएसटी विभाग के रडार पर होगा। पहले से चल रही सख्ती को देखते हुए संभावना है कि पान मसाला उद्योग पर इस तंत्र को सबसे पहले लागू किया जा सकता है।अमर उजाला कार्यालय आए सीए आशीष बंसल ने बताया कि जीएसटी में ट्रैक एंड ट्रेस तंत्र विकसित किया जाएगा। फाइनेंस बिल 2025 के माध्यम से जीएसटी में नई धारा 148ए प्रस्तावित की गई है। इसके तहत सरकार की ओर से नामित वस्तुओं पर विशिष्ट डिजिटल मार्क या डिजिटल स्टांप लगाना अनिवार्य होगा। मार्क में वस्तु से संबंधित जरूरी जानकारी होगी जो करदाता विभाग को उपलब्ध कराएगा।

विज्ञापन

अधिसूचना की तिथि से लागू होंगे नियम
वस्तुओं के निर्माण में लगी मशीनरी, निर्माण के घंटे आदि की भी जानकारी करदाता को जीएसटी विभाग को देनी होगी। इस नियम का पालन न करने पर कर के 10 प्रतिशत (न्यूनतम एक लाख) की पेनाल्टी भरनी होगी। पेनाल्टी से संबंधित आदेश के खिलाफ अपील पेनाल्टी का 10 प्रतिशत जमा करने के बाद ही दाखिल हो सकेगी। अभी धारा 129 में लगी पेनाल्टी के खिलाफ अपील 25 प्रतिशत जमा करने पर ही दाखिल होती है। और ऐसे आर्डर जिसमें केवल पेनाल्टी (धारा 129 के अतिरिक्त) है, उसके खिलाफ अपील बिना कुछ जमा किए दाखिल हो जाती है। उन्होंने बताया कि सप्लायर अपनी ओर से जारी क्रेडिट नोट पर कर की वापसी क्रेता की ओर से इनपुट टैक्स क्रेडिट रिवर्स करने के बाद ही ले सकेगा। ये सभी नियम केंद्र सरकार की ओर से जारी होने वाली अधिसूचना की तिथि से लागू होंगे।

विज्ञापन

एमएसएमई का बढ़ाया गया दायरा, संशोधित रिटर्न चार साल तक भर सकेंगे
बजट में सरकार ने एमएसएमई का दायरा बढ़ा दिया है। इससे इन यूनिटों को सीधा लाभ मिल सकेगा। जीएसटी के कानून व नियमों में कई संशोधन किए गए हैं। संशोधित रिटर्न अब चार साल तक भरे जा सकेंगे। कार्यालय आए वरिष्ठ कर अधिवक्ता संतोष कुमार गुप्ता ने बताया कि माइक्रो इंटरप्राइजेज की श्रेणी में पांच करोड़ टर्नओवर को बढ़ाकर अब दस करोड़ कर दिया गया है। स्मॉल इंटरप्राइजेज के लिए इसे 50 करोड़ से बढ़ाकर 100 करोड़ कर दिया गया है। नई टैक्स रिजीम के तहत करमुक्ति सीमा तीन लाख से बढ़ाकर चार लाख कर दी गई है। गृह संपत्ति से आय में 30 प्रतिशत की छूट भी मिलती रहेगी। अब 60 साल के वरिष्ठ नागरिक को बैंक से मिलने वाले ब्याज की धनराशि पर एक लाख तक पर टीडीएस की कटौती नहीं होगी। अब जीएसटी के विभागीय अधिकारियों की ओर से केवल अर्थदंड पारित आदेशों के खिलाफ अपील तब दाखिल हो सकेगी, जब 10 प्रतिशत पेनाल्टी का शुल्क जमा किया जा सकेगा। इसके पूर्व केवल टैक्स की धनराशि का 10 फीसदी प्री-डिपॉजिट करने की शर्त लागू थी। अर्थदंड के मामले में कोई धनराशि जमा नहीं की जाती थी। कारोबारियों को अब आर्थिक रूप से यह नियम परेशान करेगा।

होजरी और रेडीमेड के क्षेत्र के उद्यमियों के हाथ खाली
कार्यालय आए जेट निटवियर के एमडी बलराम नरूला ने बताया कि आम बजट में होजरी और रेडीमेड उद्योग के क्षेत्र में उद्यमियों के हाथ खाली कर दिए गए हैं। जबकि यह कारोबार और उद्यम का बड़ा सेक्टर है। आवश्यक जरूरतों में जो बातें आती हैं, उसमें रोटी मकान के साथ कपड़ा भी जुड़ा है। कपड़े की जो सबसे पहली जरूरत लोगों को होती है, वह है अंडरवियर और बनियान वह होजरी से ही जुड़ा है। लोअर, टी शर्ट, जितने भी कैजुअल वियर हैं, सभी इसी क्षेत्र में आते हैं। इसके बावजूद इस सेक्टर को पूरी तरह से खाली रखा गया है। कानपुर की बात करें तो यहां होजरी का हब है। बजट में व्यवस्था नहीं होने से इस सेक्टर के कारोबारियों को निराशा हुई है। उन्होंने बताया कि बजट में सबसे ज्यादा भ्रम की स्थिति एमएसएमई सेक्टर में है। कहा गया है कि इस सेक्टर के जरिये दो लाख लोगों को रोजगार दिया जाएगा लेकिन यह रोजगार किस तरह से लोगों को मिल सकेगा, इसकी कोई कार्ययोजना नहीं बताई गई है। उन्होंने बताया कि जो आर्थिक रूप से कमजोर है, जिसमें पास नौकरी नहीं है, उसके लिए किस व्यवस्था के तहत लाभ दिया जाएगा। 100 में से 20 नौकरियां ही रह गईं हैं। जो पद खाली होते जा रहे हैं, उसे खतम किया जा रहा है। ऐसे में बेरोजगारी पर किस तरह से रोक लगाई जा सकेगी, यह स्पष्ट नहीं है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed