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Kanpur News: लोभ ही पाप को करने की प्रेरणा देता
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कानपुर। दशलक्षण पर्व के चौथे दिन शनिवार को जनरलगंज के पंचकूचा स्थित श्री दिगंबर जैन पंचायती पुराना मंदिर में उत्तम शौच धर्म की आराधना की गई। इस मौके पर बताया गया कि उत्तम शौच का अर्थ है कि सच्ची शुचिता बाहर की नहीं अपने भीतर की होनी चाहिए। लोभ ही पाप को करने की प्रेरणा देता है। जैन धर्म के नौवें तीर्थंकर पुष्पदंत नाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक दिवस होने के उपलक्ष्य में निर्वाण लाडू भक्ति भाव पूर्ण पूजन के साथ चढ़ाया गया।
जैन समाज के महामंत्री त्रिभुवन चंद्र जैन ने बताया कि सुबह भगवान का अभिषेक, शांति धारा विभोर जैन, विनोद कुमार जैन, अनुराग अर्पित जैन एवं मिहिर जैन ने की। सायंकाल 48 रिद्धि मंत्रों से 48 दीपकों से महाआरती की गई।
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ग्रंथ तत्त्वार्थ सूत्र का वाचन किया
कानपुर। श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर आनंद पुरी में प्रवचनकर्ता राकेश ने जैन धर्म के महान ग्रंथ तत्त्वार्थ सूत्र का वाचन किया। उन्होंने कहा कि लोभ और अंतहीन लालच मन की सबसे बड़ी और गहरी अशुद्धि है। हम बाहरी शरीर को कितना भी साफ कर लें, लेकिन जब तक मन में दूसरों की चीजों को पाने की लालसा और तृष्णा बनी रहेगी, तब तक आत्मा अपवित्र ही रहेगी। छोटे बच्चों ने भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुत किए। अनूप जैन, डॉ. अनूप, चेतना जैन, वरुणा जैन आदि मौजूद रहीं।
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जैन समाज के महामंत्री त्रिभुवन चंद्र जैन ने बताया कि सुबह भगवान का अभिषेक, शांति धारा विभोर जैन, विनोद कुमार जैन, अनुराग अर्पित जैन एवं मिहिर जैन ने की। सायंकाल 48 रिद्धि मंत्रों से 48 दीपकों से महाआरती की गई।
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ग्रंथ तत्त्वार्थ सूत्र का वाचन किया
कानपुर। श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर आनंद पुरी में प्रवचनकर्ता राकेश ने जैन धर्म के महान ग्रंथ तत्त्वार्थ सूत्र का वाचन किया। उन्होंने कहा कि लोभ और अंतहीन लालच मन की सबसे बड़ी और गहरी अशुद्धि है। हम बाहरी शरीर को कितना भी साफ कर लें, लेकिन जब तक मन में दूसरों की चीजों को पाने की लालसा और तृष्णा बनी रहेगी, तब तक आत्मा अपवित्र ही रहेगी। छोटे बच्चों ने भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुत किए। अनूप जैन, डॉ. अनूप, चेतना जैन, वरुणा जैन आदि मौजूद रहीं।
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