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Kanpur News: अकबरपुर नगर निकाय के वाहनों की जीपीएस से निगरानी शुरू

Thu, 23 Jul 2026 01:32 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर Updated Thu, 23 Jul 2026 01:32 AM IST
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GPS monitoring of Akbarpur municipal body vehicles begins.
कानपुर देहात। जिला मुख्यालय के नगर अकबरपुर में सभी वाहनों की जीपीएस से निगरानी की पहल की गई है। इससे इन वाहनों की पल-पल की सटीक जानकारी मिल सकेगी। वाहनों का दुरुपयोग भी रुकेगा।
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अकबरपुर नगर निकाय में कुल 19 वार्ड हैं। घरों से कूड़ा उठाकर गीला व सूखा कूड़ा अलग किया जाता है। इसके बाद कचरा निस्तारण केंद्र में गीले कचरे से जैविक खाद बनती है। वहीं, सूखे कचरे से भी कबाड़ व अन्य वस्तुएं अलग कर बेचीं जा रही हैं। नगर की साफ-सफाई के बाद कूड़ा उठाने में कुल 39 वाहन उपयोग में हैं। इसमें 11 ई-रिक्शा, 15 लोडर, पांच ट्रैक्टर आदि हैं। कई बार चालक वाहन लेकर घंटों गायब रहते थे। जबकि कई बार जरूरत पर जल्द आने के लिए कहे जाने पर गलत लोकेशन बता देते थे। इसको लेकर सभी वाहनों में करीब 4.5 लाख रुपये खर्च कर जीपीएस ट्रैकर लगवाया गया है।
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ईओ आशीष कुमार ने बताया कि वाहनों की सटीक निगरानी के लिए नगर निकाय कार्यालय में कंट्रोल रूम बना है। स्वच्छ भारत मिशन के विशेषज्ञों को भी निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। जीपीएस से निगरानी से ईंधन बचेगा। समयबद्ध काम होंगे साथ ही वाहनों का दुरुपयोग रुकेगा।कानपुर देहात। जिला मुख्यालय के नगर अकबरपुर में सभी वाहनों की जीपीएस से निगरानी की पहल की गई है। इससे इन वाहनों की पल-पल की सटीक जानकारी मिल सकेगी। वाहनों का दुरुपयोग भी रुकेगा।
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अकबरपुर नगर निकाय में कुल 19 वार्ड हैं। घरों से कूड़ा उठाकर गीला व सूखा कूड़ा अलग किया जाता है। इसके बाद कचरा निस्तारण केंद्र में गीले कचरे से जैविक खाद बनती है। वहीं, सूखे कचरे से भी कबाड़ व अन्य वस्तुएं अलग कर बेचीं जा रही हैं। नगर की साफ-सफाई के बाद कूड़ा उठाने में कुल 39 वाहन उपयोग में हैं। इसमें 11 ई-रिक्शा, 15 लोडर, पांच ट्रैक्टर आदि हैं। कई बार चालक वाहन लेकर घंटों गायब रहते थे। जबकि कई बार जरूरत पर जल्द आने के लिए कहे जाने पर गलत लोकेशन बता देते थे। इसको लेकर सभी वाहनों में करीब 4.5 लाख रुपये खर्च कर जीपीएस ट्रैकर लगवाया गया है। ईओ आशीष कुमार ने बताया कि वाहनों की सटीक निगरानी के लिए नगर निकाय कार्यालय में कंट्रोल रूम बना है। स्वच्छ भारत मिशन के विशेषज्ञों को भी निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। जीपीएस से निगरानी से ईंधन बचेगा। समयबद्ध काम होंगे साथ ही वाहनों का दुरुपयोग रुकेगा।
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