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पहली बार 2009 में धरा गया था ये खूंखार डाकू, 2011 में हुआ बागी

Sun, 30 Jul 2017 01:13 PM IST
अनूप दुबे, अमर उजाला, चित्रकूट
अनूप दुबे, अमर उजाला, चित्रकूट Updated Sun, 30 Jul 2017 01:13 PM IST
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Goppa was first time arrest in 2009
डेमो
'डाकू गोप्पा'... पता नहीं आप में से कितने लोग इस नाम से वाकिफ होंगे... बहुत से लोग शायद इसके बारे में जानते भी न हो। लेकिन आपको बता दें ये नाम यूपी में दहशत का दूसरा नाम हुआ करता था। आज हम आपको इसी खूंखार डाकू की कहानी से रूबरू कराने जा रहे हैं... 
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गोप्पा के चार पुत्री, एक पुत्र

Goppa was first time arrest in 2009
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डाकू गोप्पा... जिसके सिर पर सरकार ने एक लाख पांच हजार का इनाम रख छोड़ा था। इसी से तस्वीर साफ हो गई होगी कि इतना बड़ा इनाम सरकार किनके सिर पर रखती है। इस शख्स की गोप्पा से 'डाकू गोप्पा' बनने की कहानी बेहद लंबी है। 

बता दें गोप्पा पहली बार वर्ष 2009 में कपसेठी के पास तमंचे के साथ पकड़ा गया था। इस मामले में वह लगभग एक साल तक जेल में रहा। वर्ष 2011 में होली के दिन गांव में ही सजातीय लोगों से विवाद हो गया। पुलिस इस मामले में गोप्पा को जेल भेजने की तैयारी में थी। इसकी भनक लगने पर वह बागी हो गया और जंगल की राह पकड़ ली। यहीं से गोप्पा जैसे साधारण नाम के साथ जुड़ गया 'डाकू' शब्द। उसके गुनाहों की लिस्ट लंबी होती चली गई। फिर इसका नाम खूंखार डाकूओं में शुमार हो गया। वह यूपी के चित्रकूट के जंगलों पर राज करने लगा।

जिस परिवार से विवाद कर गोप्पा जंगल भागा था वह अब उनका जानी दुश्मन हो गया था। सीने में सुलग रही बदले की आग बुझाने की खातिर डाकू गोप्पा ने 19 दिसंबर 2016 को अपने पड़ोसी राजा को पूरे गांव के सामने गोली मार दी थी। इसके बाद उसने एक के बाद एक दर्जनों वारदातों को अंजाम दिया। फिर गांव में उसका खौफ पनपता चला गया। लोगों का कहना था कि गांवदारी के विवाद को यदि पुलिस सुलझा देती तो शायद गोप्पा डाकू न बनता। गोप्पा के डाकू बनने से उसके परिवार के अन्य सदस्यों पर भी आफत टूटती रही है।

 

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चुप रहने से पड़ा गोप्पा नाम

Goppa was first time arrest in 2009
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सबसे बड़ा भाई जगतपाल जेल में है। उससे छोटे भाई महिपाल और मुन्ना हाल ही में जमानत पर छूटकर आए हैं। तीनों पर डाकू को संरक्षण देने के आरोप हैं। गोप्पा की पत्नी ने बताया कि उसके चार पुत्रियां अर्चना, राधा, साधना, अनुराधा और एक पुत्र अनिल है। गोप्पा की गिरफ्तारी के बाद परिजन ज्यादा कुछ तो नहीं बोल रहे हैं, लेकिन इतना जरूर कहा- ‘चलो जिंदा तो है’। यह भी कहा कि उसके आपराधिक जीवन से उनका कोई लेना-देना नहीं है। 

चार भाइयों में सबसे छोटा गोप्पा बेहद सादगी से रहता था। हर्रा के ग्रामीणों ने बताया कि उसमें आगे बढ़ने और पढ़ने की इच्छा थी, लेकिन परिवार में किसी से कुछ कह नहीं पाता था। ज्यादातर समय वह मौन ही रहता था। इस कारण लोग उसे गोप्पा और भोले के नाम से बुलाने लगे।
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