पहली बार 2009 में धरा गया था ये खूंखार डाकू, 2011 में हुआ बागी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गोप्पा के चार पुत्री, एक पुत्र
डाकू गोप्पा... जिसके सिर पर सरकार ने एक लाख पांच हजार का इनाम रख छोड़ा था। इसी से तस्वीर साफ हो गई होगी कि इतना बड़ा इनाम सरकार किनके सिर पर रखती है। इस शख्स की गोप्पा से 'डाकू गोप्पा' बनने की कहानी बेहद लंबी है।
बता दें गोप्पा पहली बार वर्ष 2009 में कपसेठी के पास तमंचे के साथ पकड़ा गया था। इस मामले में वह लगभग एक साल तक जेल में रहा। वर्ष 2011 में होली के दिन गांव में ही सजातीय लोगों से विवाद हो गया। पुलिस इस मामले में गोप्पा को जेल भेजने की तैयारी में थी। इसकी भनक लगने पर वह बागी हो गया और जंगल की राह पकड़ ली। यहीं से गोप्पा जैसे साधारण नाम के साथ जुड़ गया 'डाकू' शब्द। उसके गुनाहों की लिस्ट लंबी होती चली गई। फिर इसका नाम खूंखार डाकूओं में शुमार हो गया। वह यूपी के चित्रकूट के जंगलों पर राज करने लगा।
जिस परिवार से विवाद कर गोप्पा जंगल भागा था वह अब उनका जानी दुश्मन हो गया था। सीने में सुलग रही बदले की आग बुझाने की खातिर डाकू गोप्पा ने 19 दिसंबर 2016 को अपने पड़ोसी राजा को पूरे गांव के सामने गोली मार दी थी। इसके बाद उसने एक के बाद एक दर्जनों वारदातों को अंजाम दिया। फिर गांव में उसका खौफ पनपता चला गया। लोगों का कहना था कि गांवदारी के विवाद को यदि पुलिस सुलझा देती तो शायद गोप्पा डाकू न बनता। गोप्पा के डाकू बनने से उसके परिवार के अन्य सदस्यों पर भी आफत टूटती रही है।
चुप रहने से पड़ा गोप्पा नाम
चार भाइयों में सबसे छोटा गोप्पा बेहद सादगी से रहता था। हर्रा के ग्रामीणों ने बताया कि उसमें आगे बढ़ने और पढ़ने की इच्छा थी, लेकिन परिवार में किसी से कुछ कह नहीं पाता था। ज्यादातर समय वह मौन ही रहता था। इस कारण लोग उसे गोप्पा और भोले के नाम से बुलाने लगे।