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पिता के बच्चे को जन्म देगी बेटी

Sun, 02 Aug 2015 01:51 AM IST
अमर उजाला कानपुर
अमर उजाला कानपुर Updated Sun, 02 Aug 2015 01:51 AM IST
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Girl will give birth to his father baby
कलियुगी पिता से गर्भवती हुई 14 साल की किशोरी ने गर्भपात कराने से मना कर दिया है। किशोरी ने कहा कि वह बच्चे को जन्म देगी लेकिन बाद में उससे कोई वास्ता नहीं रखेगी।
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वहीं भाई ने प्रसव होने तक किशोरी को घर में रखने से इनकार कर दिया है। शनिवार को किशोरी और उसके भाई की बातें सुनने के बाद कोर्ट ने अग्रिम आदेशों तक गर्भवती किशोरी को स्वरूप नगर स्थित नारी निकेतन के संरक्षण में भेज दिया है।
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बाबूपुरवा के एक पिता ने अपनी ही नाबालिग बेटी से बलात्कार कर उसे गर्भवती कर दिया है। करीब एक पखवाड़े पहले मामला खुलने पर पुलिस ने 16 जुलाई को आरोपी पिता को जेल भेज दिया। पुलिस के मुताबिक 20 जुलाई को डफरिन अस्पताल में किशोरी का मेडिकल चेकअप कराया गया तो पता चला कि किशोरी को साढ़े पांच माह का गर्भ है। डॉक्टरों ने कहा है कि किशोरी शारीरिक रूप से सक्षम नहीं है जिससे प्रसव में रिस्क है।
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एक समाजसेवी संस्था की नीलम चतुर्वेंदी ने किशोरी का गर्भपात कराए जाने को लेकर आईजी आशुतोष पांडेय से मशविरा किया तो आईजी ने सीएमओ डॉ. आरपी यादव, अपर इंडिया शुगर एक्सचेंज की हेड डॉ. किरन पांडेय से राय मशविरा करने बाद कहा कि कोर्ट ही इस पर फैसला लेगा।

शनिवार को बाबूपुरवा एसओ रामवीर सिंह रेप पीड़िता और उसके भाई को फास्ट ट्रैक कोर्ट लेकर पहुंचे। एसओ ने अर्जी देकर कोर्ट को पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया। साथ ही लिखा कि गर्भवती नाबालिग को उसके परिवार के लोग घर में रखने को तैयार नहीं है। ऐसे में इसे किसके संरक्षण में और कहां पर रखा जाए। एसओ ने बताया कि किशोरी ने कोर्ट में सुनवाई के दौरान गर्भपात कराने से इनकार कर दिया। कहा कि वह बच्चे को जन्म देगी। इसके बाद किसी संस्था या किसी निसंतान को बच्चा दे देगी।

वह और उसके परिवार के लोग बच्चे से कोई वास्ता नहीं रखेंगे। न ही बच्चे के बारे में कभी भी कुछ जानने की कोशिश करेंगे। कोर्ट ने मेडिकल टर्मिनल ऑफ प्रेेग्नेसी एक्ट की भी जानकारी ली जिसके अनुसार 20 हफ्ते के बाद एबार्शन नहीं हो सकता है। इस बारे में भी पक्ष रखा गया। किशोरी के भाई ने पहले तो गर्भवती बहन को साथ रखने की बात कही लेकिन फिर मुकर गया। दोबारा उसने कोर्ट में कहा कि उसके और भी भाई बहन हैं। वह अकेला कमाने वाला है। उसकी कमाई से बमुश्किल घर का खर्च चल पाता है।


ऐसे में वह गर्भवती बहन और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे का भरण-पोषण नहीं कर पाएगा। प्रसव के बाद वह बहन को परिवार के साथ रख लेगा। कोर्ट ने पीड़ित किशोरी और उसके भाई की बातों को गौर से सुना। इसके बाद किशोरी को राजकीय नारी निकेतन भेजने का फैसला सुनाया। आदेश में लिखा कि अग्रिम आदेशों तक किशोरी को नारी निकेतन के संरक्षण में रखा जाए। शाम को पुलिस ने उसे नारी निकेतन में दाखिल कर दिया।
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