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Kanpur News: जेन जी का नजरिया बदला पर राजदार अब भी मम्मी

Fri, 11 Sep 2026 02:31 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 11 Sep 2026 02:31 AM IST
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Gen Z's perspective has changed, but Mom remains the confidante.
कानपुर। जंतर-मंतर प्रकरण के बाद लोग जेन जी के अपने अलग नजरिये, खुला और सोच और आजाद लाइफ स्टाइल की बात कर रहे हैं। लेकिन सच यही है कि ये युवा अभी भी मम्मी के पल्लू से चिपटे हैं। पिता से दूरी रहती है और उनके निजी मामलों की पहली राजदार अब भी मम्मी ही है। यह बात छत्रपति शाहू जी महाराज विवि के मनोविज्ञान विभाग के जेन जी मेंटल हेल्थ सर्वे के पायलट चरण में सामने आई है।
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पायलट चरण के प्रारंभिक आकलन में 101 विद्यार्थियों को लिया गया। मां और पिता के साथ अटैच पैटर्न का भी आकलन किया गया। प्रारंभिक निष्कर्षों में मां के साथ जेन जी अधिक सुरक्षित समझते हैं। इसके साथ ही मिश्रित औक संयत अटैचमेंट पैटर्न मिला। वेल बीइंग सेल के प्रभारी वरिष्ठ साइकोलॉजिस्ट डॉ. सृजन श्रीवास्तव ने बताया कि पिता के साथ अवॉयडेंट और डिस्मिसंग पैटर्न अपेक्षाकृत अधिक प्रमुख रहा।
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विशेषज्ञों के अनुसार यह अंतर इस बात को समझने में मदद कर सकता है कि कुछ विद्यार्थी किस अभिभावक के साथ अपनी भावनाओं को साझा करने और भावनात्मक सहायता लेने में अधिक सहज महसूस करते हैं। उनका कहना है कि इसका समतलब यह नहीं कि पिता के साथ संबंध खराब हैं।
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सर्वे में 19 फीसदी विद्यार्थियों में एंजाइटी मिली है। 30 फीसदी विद्यार्थियों में अवसाद के लक्षण मिले हैं। वहीं 51 फीसदी विद्यार्थी मानसिक रूप से स्वस्थ मिले हैं। विद्यार्थियों की जांच रिपोर्ट आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस ने दी। विद्यार्थियों को एक प्रश्नावली दी गई। इसके उत्तरों के जरिये एआई ने तुरंत उनके मानसिक स्वास्थ्य का आकलन करके रिपोर्ट दे दी।
वेल बीइंग सेल के प्रभारी डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि सर्वे की शुरुआत विभाग से की है। इसके बाद टीमें अपने-अपने विभाग में विद्यार्थियों की जांच करेंगी। इसके बाद आकलन रिपोर्ट तैयार की जाएगी। उन्होंने बताया कि अभी एआई से परिणाम लिया जा रहा है। इसके बाद विद्यार्थियों का परीक्षण किया जाएगा। इससे एआई की दी रिपोर्ट क्रॉस चेक की जाएगी।

इसके बाद अंतिम आकलन रिपोर्ट तैयार होगी। उसके लिहाज से विद्यार्थियों के लिए गाइड लाइन बनाएंगे। उन्होंने बताया कि आधे से अधिक विद्यार्थी स्वस्थ मिले। जिनमें एंजाइटी और अवसाद के लक्षण मिले हैं, उनकी काउंसलिंग की जाएगी। रिपोर्ट बच्चों का बर्ताव तथा परिवार से उनके जुड़ाव का भी आकलन किया गया। इसमें पता चला है कि बच्चे मां के ज्यादा नजदीक हैं। पिता से दूरी रहती है। इसके साथ ही उनका हर बात को लेकर अलग नजरिया होता है।

डॉ. दुर्गा यादव के अनुसार अगले चरण में पांच से सात हजार विद्यार्थियों को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है। निदेशक डॉ. अमित कुमार का कहना है कि सैंपल साइज के माध्यम से जेन जी के मानसिक स्वास्थ्य को विविध डाटा सेट के आधार पर समझने का प्रयास किया जाएगा।
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