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गरिमा को पीसीएस-जे में सातवां स्थान, बताये ‘सक्सेस टिप्स’
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sun, 15 Oct 2017 10:32 AM IST
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कानपुर की गरिमा
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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की पीसीएस जे 2016 में कानपुर सिविल लाइंस के पुलिस लाइन कंपाउंड की गरिमा सिंह ने पहली बार में ही सातवां स्थान हासिल किया है। गरिमा यूपी विजिलेंस के ज्वाइंट डायरेक्टर कौशलेंद्र सिंह की तीन बच्चों में सबसे बड़ी हैं। इस सफलता का श्रेय उन्होंने परिवार और शिक्षकों को दिया। गरिमा ने 12वीं तक पढ़ाई मथुरा में की। इसके बाद कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (क्लैट) की परीक्षा दी और 2009 में उनका चयन राजीव गांधी नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, पटियाला के लिए हो गया।
यहां से गरिमा ने 2014 में बीए-एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। बीए एलएलबी में गरिमा ने पूरी यूनिवर्सिटी में तीसरा और महिला वर्ग में पहला स्थान हासिल किया था। इसके लिए उन्हें केटीएस तुलसी अवार्ड से भी नवाजा गया। फिर यहीं से 2015 में एलएलएम की परीक्षा टॉप की। दीक्षांत समारोह में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर ने उनको कुलाधिपति गोल्ड मेडल सहित तीन अन्य मेडल से सम्मानित किया। गरिमा बताती हैं कि उन्होंने इस मुकाम को हासिल करने के लिए सोशल मीडिया से दूरी बना रखी थी। आज तक उन्होंने व्हाटसएप नहीं चलाया है।
माता-पिता रहे आदर्श, शिक्षकों ने की मदद
गरिमा बताती हैं कि उनका परिवार मूल रूप से कन्नौज का रहने वाला है। पिता कौशलेंद्र सिंह और मां मीना ने हमेशा उसे आगे बढ़ने के लिए उत्साहित किया। शिक्षक राहुल यादव और रमेशचंद्र श्रीवास्तव के टिप्स काफी मददगार रहे। छोटी बहन पूर्णिमा ने पीपीएन कालेज से एमकॉम किया है। देवांश आईआईटी की तैयारी कर रहा है।
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खुद का ख्याल रखें और खुद को धोखा न दें
गरिमा कहती हैं कि सफलता हासिल करने के लिए शरीर का स्वस्थ रहना जरूरी है। किसी परीक्षा की तैयारी में ईमानदारी से करें। जिंदगी में हमेशा सकारात्मक विचार के साथ आगे बढ़ाना चाहिए।
न्याय में देरी का मतलब न्याय न होना
गरिमा कहती हैं कि हमारे देश में लोगों का विश्वास न्यायालय पर है। न्याय मिलने में कभी देरी नहीं होनी चाहिए। अगर ऐसा होता है तो वह पूर्ण न्याय नहीं होगा।
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यहां से गरिमा ने 2014 में बीए-एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। बीए एलएलबी में गरिमा ने पूरी यूनिवर्सिटी में तीसरा और महिला वर्ग में पहला स्थान हासिल किया था। इसके लिए उन्हें केटीएस तुलसी अवार्ड से भी नवाजा गया। फिर यहीं से 2015 में एलएलएम की परीक्षा टॉप की। दीक्षांत समारोह में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर ने उनको कुलाधिपति गोल्ड मेडल सहित तीन अन्य मेडल से सम्मानित किया। गरिमा बताती हैं कि उन्होंने इस मुकाम को हासिल करने के लिए सोशल मीडिया से दूरी बना रखी थी। आज तक उन्होंने व्हाटसएप नहीं चलाया है।
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माता-पिता रहे आदर्श, शिक्षकों ने की मदद
गरिमा बताती हैं कि उनका परिवार मूल रूप से कन्नौज का रहने वाला है। पिता कौशलेंद्र सिंह और मां मीना ने हमेशा उसे आगे बढ़ने के लिए उत्साहित किया। शिक्षक राहुल यादव और रमेशचंद्र श्रीवास्तव के टिप्स काफी मददगार रहे। छोटी बहन पूर्णिमा ने पीपीएन कालेज से एमकॉम किया है। देवांश आईआईटी की तैयारी कर रहा है।
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खुद का ख्याल रखें और खुद को धोखा न दें
गरिमा कहती हैं कि सफलता हासिल करने के लिए शरीर का स्वस्थ रहना जरूरी है। किसी परीक्षा की तैयारी में ईमानदारी से करें। जिंदगी में हमेशा सकारात्मक विचार के साथ आगे बढ़ाना चाहिए।
न्याय में देरी का मतलब न्याय न होना
गरिमा कहती हैं कि हमारे देश में लोगों का विश्वास न्यायालय पर है। न्याय मिलने में कभी देरी नहीं होनी चाहिए। अगर ऐसा होता है तो वह पूर्ण न्याय नहीं होगा।