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गंगा प्रदूषण : अब होजरी इंडस्ट्री भी निशाने पर
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर
Updated Wed, 03 Feb 2016 01:36 AM IST
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गंगा में प्रदूषण फैलाने वालों में टेनरियों के साथ अब होजरी इंडस्ट्री का नाम भी जुड़ गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इसे रेड जोन में रखा है। बोर्ड ने मंगलवार को होजरी इंडस्ट्री के लिए तैयार किए गए इस प्रस्ताव को इस्टीमेट कमेटी के सामने रखा।
बोर्ड ने इंडस्ट्री को प्रदूषित कचरा रोकने के लिए ऑनलाइन मॉनीटरिंग सिस्टम लगाने को कहा है। बोर्ड ने कमेटी के हवाले से बताया कि एनजीटी ने होजरी इंडस्ट्री एसोसिएशन को अपना पक्ष रखने के लिए चार फरवरी को दिल्ली में होने वाली चैंबर मीटिंग में बुलाया है।
कानपुर में होजरी का बड़ा कारोबार है। इससे करीब एक लाख से अधिक लोग सीधे जुड़े हुए हैं। दादानगर, पनकी, फजलगंज सहित कई क्षेत्रों में प्रोसेसिंग की कुल 11 इंडस्ट्री स्थापित हैं। जिसके माध्यम से शहर में 500 करोड़ का कारोबार होता है। रेड जोन में रखे जाने से इस इंडस्ट्री पर दबाव बढ़ गया है।
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होजरी की प्रोसेसिंग यूनिट में एजो फ्री नाम का डाई जैसा हानिकारक केमिकल प्रयोग किया जाता है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने होजरी इंडस्ट्री संचालकों से कहा है कि वे अपने यहां जेडएलडी (जीरो लिक्विड डिस्चार्ज) सिस्टम भी लगाए। यानि उनकी इंडस्ट्री निकलने वाला दूषित पानी इंडस्ट्री के बाहर न आए।
इसी तरह ऑन लाइन मानीटरिंग के लिए एक मीटर लगाना होता है, जो उस पाइप पर लगता है जहां से इंडस्ट्री से प्रदूषित पानी बाहर निकलता है। दोनों सिस्टम को लगाने के लिए हर इंडस्ट्री को 15 लाख रुपये खर्च करने होंगे।
ये होती है एजोफ्री डाई
एजोफ्री डाई कई तरह के रंग का पाउडर होता है। यह 400 से लेकर 900 रुपये प्रति किलोग्राम मिलती है। हर यूनिट अपने हिसाब से इसका प्रयोग करती है। इस पाउडर का घोल बनाकर, तैयार किए कपड़े को उसमें डुबोया जाता है। इससे यह फायदा होता है कि तैयार किया गए कपड़े को पहनने से शरीर को एलर्जी नहीं होती है।
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बोर्ड ने इंडस्ट्री को प्रदूषित कचरा रोकने के लिए ऑनलाइन मॉनीटरिंग सिस्टम लगाने को कहा है। बोर्ड ने कमेटी के हवाले से बताया कि एनजीटी ने होजरी इंडस्ट्री एसोसिएशन को अपना पक्ष रखने के लिए चार फरवरी को दिल्ली में होने वाली चैंबर मीटिंग में बुलाया है।
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कानपुर में होजरी का बड़ा कारोबार है। इससे करीब एक लाख से अधिक लोग सीधे जुड़े हुए हैं। दादानगर, पनकी, फजलगंज सहित कई क्षेत्रों में प्रोसेसिंग की कुल 11 इंडस्ट्री स्थापित हैं। जिसके माध्यम से शहर में 500 करोड़ का कारोबार होता है। रेड जोन में रखे जाने से इस इंडस्ट्री पर दबाव बढ़ गया है।
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होजरी की प्रोसेसिंग यूनिट में एजो फ्री नाम का डाई जैसा हानिकारक केमिकल प्रयोग किया जाता है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने होजरी इंडस्ट्री संचालकों से कहा है कि वे अपने यहां जेडएलडी (जीरो लिक्विड डिस्चार्ज) सिस्टम भी लगाए। यानि उनकी इंडस्ट्री निकलने वाला दूषित पानी इंडस्ट्री के बाहर न आए।
इसी तरह ऑन लाइन मानीटरिंग के लिए एक मीटर लगाना होता है, जो उस पाइप पर लगता है जहां से इंडस्ट्री से प्रदूषित पानी बाहर निकलता है। दोनों सिस्टम को लगाने के लिए हर इंडस्ट्री को 15 लाख रुपये खर्च करने होंगे।
ये होती है एजोफ्री डाई
एजोफ्री डाई कई तरह के रंग का पाउडर होता है। यह 400 से लेकर 900 रुपये प्रति किलोग्राम मिलती है। हर यूनिट अपने हिसाब से इसका प्रयोग करती है। इस पाउडर का घोल बनाकर, तैयार किए कपड़े को उसमें डुबोया जाता है। इससे यह फायदा होता है कि तैयार किया गए कपड़े को पहनने से शरीर को एलर्जी नहीं होती है।