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आईआईटी की देखरेख में बनेगी गंगा की डीपीआर
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर
Updated Fri, 05 Feb 2016 02:01 AM IST
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शहर में गंगा की धारा को अविरल और निर्मल बनाने के उद्देश्य से आईआईटी कानपुर, केडीए, नगर निगम, जल निगम, सिंचाई विभाग, गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई सहित तमाम विभागों ने गुरुवार को आपस में हाथ मिलाए।
नेशनल गंगा रिवर बेसिन अथॉरिटी (एनजीआरबीए) के समन्वयक और सिविल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के प्रो. विनोद तारे की अध्यक्षता में मीटिंग भी हुई। तय हुआ कि गंगा को साफ-सुथरा बनाने के लिए आईआईटी कानपुर की अगुवाई में डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बनाई जाएगी। इस रिपोर्ट के आधार पर काम होगा।
ऐसा पहली बार होगा जब कई विभाग मिलकर डीपीआर तैयार करेंगे। अभी तक हर विभाग अपनी-अपनी डीपीआर बनाते रहे हैं।गंगा में प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी की सख्ती के बाद स्थानीय प्रशासन भी हरकत में आए हैं। इसी सिलसिले में गुरुवार को केडीए उपाध्यक्ष जयश्री भोज, नगर आयुक्त देवेंद्र सिंह कुशवाहा और एडीएम सिटी आशुतोष मोहन अग्निहोत्री सहित तमाम विभागों के अधिकारियों ने आईआईटी कैंपस जाकर विज्ञानियों के साथ मीटिंग की। एनजीआरबीए के समन्वयक का कहना है कि अब योजना बनाकर काम करने की जरूरत है।
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मनमाने ढंग से एसटीपी लगाने का काम बंद करना होगा। समन्वयक ने सभी एसटीपी का निर्माण बंद कराने की सिफारिश भी की। साथ ही कहा कि गंगा को सबसे ज्यादा सीसामऊ नाला गंदा कर रहा है। इस नाले से रोजाना 130 से 150 एमएलडी कचरा निकलता है, जिसे टैप करने से काम नहीं चलेगा। अब जरूरत सीसामऊ नाले के पास ही सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाने की है, ताकि गंगा में शोधित पानी जा सके। सीसामऊ नाले के आसपास की गंदगी को दूर करके उसे विकसित किया जाए। ऐसा हुआ तो सकारात्मक रिजल्ट सामने आएगा।
गंगा में रोकी जाएगी टेनरी की गंदगी
गंगा प्रदूषण पर एनजीटी की बैठक में केंद्र सरकार ने साफ कहा कि टेनरियों की गंदगी हर हाल में गंगा में जाने से रोकी जाएगी। इसके लिए टेनरियों को जीरो लिक्विड डिस्चार्ज सिस्टम का पालन करना होगा। उधर बैठक में कानपुर के होजरी उद्यमियों ने भी अपना पक्ष रखा।
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नेशनल गंगा रिवर बेसिन अथॉरिटी (एनजीआरबीए) के समन्वयक और सिविल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के प्रो. विनोद तारे की अध्यक्षता में मीटिंग भी हुई। तय हुआ कि गंगा को साफ-सुथरा बनाने के लिए आईआईटी कानपुर की अगुवाई में डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बनाई जाएगी। इस रिपोर्ट के आधार पर काम होगा।
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ऐसा पहली बार होगा जब कई विभाग मिलकर डीपीआर तैयार करेंगे। अभी तक हर विभाग अपनी-अपनी डीपीआर बनाते रहे हैं।गंगा में प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी की सख्ती के बाद स्थानीय प्रशासन भी हरकत में आए हैं। इसी सिलसिले में गुरुवार को केडीए उपाध्यक्ष जयश्री भोज, नगर आयुक्त देवेंद्र सिंह कुशवाहा और एडीएम सिटी आशुतोष मोहन अग्निहोत्री सहित तमाम विभागों के अधिकारियों ने आईआईटी कैंपस जाकर विज्ञानियों के साथ मीटिंग की। एनजीआरबीए के समन्वयक का कहना है कि अब योजना बनाकर काम करने की जरूरत है।
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मनमाने ढंग से एसटीपी लगाने का काम बंद करना होगा। समन्वयक ने सभी एसटीपी का निर्माण बंद कराने की सिफारिश भी की। साथ ही कहा कि गंगा को सबसे ज्यादा सीसामऊ नाला गंदा कर रहा है। इस नाले से रोजाना 130 से 150 एमएलडी कचरा निकलता है, जिसे टैप करने से काम नहीं चलेगा। अब जरूरत सीसामऊ नाले के पास ही सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाने की है, ताकि गंगा में शोधित पानी जा सके। सीसामऊ नाले के आसपास की गंदगी को दूर करके उसे विकसित किया जाए। ऐसा हुआ तो सकारात्मक रिजल्ट सामने आएगा।
गंगा में रोकी जाएगी टेनरी की गंदगी
गंगा प्रदूषण पर एनजीटी की बैठक में केंद्र सरकार ने साफ कहा कि टेनरियों की गंदगी हर हाल में गंगा में जाने से रोकी जाएगी। इसके लिए टेनरियों को जीरो लिक्विड डिस्चार्ज सिस्टम का पालन करना होगा। उधर बैठक में कानपुर के होजरी उद्यमियों ने भी अपना पक्ष रखा।