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Ganga Barrage Accident: गैरइरादतन हत्या में बदला मामला, मालिक पर भी शिकंजा, जांच में यह बात आई सामने

Sun, 29 Oct 2023 09:22 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sun, 29 Oct 2023 09:22 AM IST
सार

Kanpur News: पुलिस के जांच में कार मालिक का नाम दीपा मित्तल पता चला। थाना प्रभारी के मुताबिक कार पहले इंद्रानगर निवासी शरद के नाम थी। शरद के निधन के बाद उनकी पत्नी दीपा के नाम कार ट्रांसफर हो गई। दीपा ने कार को कुछ समय पहले विजयनगर के रविकांत को बेच दिया था।

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Ganga Barrage Accident, Case of accident converted into culpable homicide, owner also under pressure
kanpur accident - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर के गंगा बैराज में तेज रफ्तार कार की टक्कर से दो नाबालिगों की मौत के मामले में पुलिस ने डॉक्टर के नाबालिग बेटे के खिलाफ दर्ज एक्सीडेंट के केस को गैरइरादतन हत्या (धारा 304) में तरमीम कर दिया है। रविवार को पुलिस नाबालिग कार चालक को जुवनाइल कोर्ट में पेश करेगी।

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गंगा बैराज पर गुरुवार शाम शुक्लागंज से कानपुर की तरफ आ रही बेकाबू कार ने गंगा बैराज स्थित रामजी कश्यप, पप्पू, आजाद समेत छह लोगों की दुकान को उड़ाते हुए रामजी की दुकान में काम करने वाले सागर (16) व आशीष (15) को कुचल दिया था। इससे दोनों की मौत हो गई थी।
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शुक्रवार को परिजनों ने शव गंगा बैराज रोड पर रखकर जाम लगा दिया था। थाना प्रभारी रोहित तिवारी ने बताया कि कार चालक के खिलाफ पहले लापरवाही से कार चलाकर दो लड़कों की जान लेने व दुकानों को नुकसान पहुंचाने में धारा 304 ए (मार्ग दुर्घटना में मौत हो जाने पर) के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई थी।

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तीन दोस्तों को शनिवार की रात थाने से छोड़ दिया गया
विवेचना के दौरान मिले साक्ष्यों व सबूतों के आधार पर केस को गैरइरादतन हत्या (धारा 304) में तरमीम किया गया है। मामले में नाबालिग को कार थमाने वाले कार मालिक को भी नामजद किया जाएगा। रविवार को नाबालिग कार चालक को जुवनाइल कोर्ट में पेश किया जाएगा। उसके तीन दोस्तों को शनिवार की रात थाने से छोड़ दिया गया है। पुलिस ने 20 दिनों के लिए एक किमी के दायरे में लगी मैगी की दुकानें बंद करा दी हैं।

जांच में यह बात भी आई सामने
पुलिस के जांच में कार मालिक का नाम दीपा मित्तल पता चला। थाना प्रभारी के मुताबिक कार पहले इंद्रानगर निवासी शरद के नाम थी। शरद के निधन के बाद उनकी पत्नी दीपा के नाम कार ट्रांसफर हो गई। दीपा ने कार को कुछ समय पहले विजयनगर के रविकांत को बेच दिया था। कार दीपा से रविकांत के नाम ट्रांसफर होने की प्रक्रिया आरटीओ में प्रचलित है। रविकांत का बेटा कार लेकर गया था।

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