सामूहिक दुष्कर्म पीड़िता की मौत का मामला: लेखपाल का नाम एफआईआर से बाहर करने की तैयारी में थी पुलिस
दुष्कर्म का आरोपी लेखपाल खुलेआम घूम रहा था
ककवन के एक गांव में 15 साल की किशोरी से सामूहिक दुष्कर्म हुआ था। 11 अक्तूबर को लेखपाल रंजीत वरबार समेत चार पर मुकदमा दर्ज हुआ था। पीड़िता गर्भवती थी। केस में लेखपाल रंजीत व करन नामजद थे जबकि दो आरोपी अज्ञात हैं। पुलिस कार्रवाई से बच रही थी। दो सप्ताह पहले जब आईजी ने कार्रवाई के निर्देश दिए तब करन को पुलिस ने जेल भेजा। लेखपाल फिर भी खुलेआम घूमता रहा। जब बीते मंगलवार को प्रसव के दौरान पीड़िता की मौत हुई तब पुलिस ने लेखपाल को जेल भेजा।
आरोपी लेखपाल को बचाने में जुटी पुलिस
पुलिस सूत्रों के मुताबिक विवेचक लेखपाल को निर्दोष बता रही थी। इसलिए उसका नाम केस से बाहर करने की जद्दोजहद में जुटी थी। यहां तक कि दो या तीन पर्चे भी काटे जा चुके थे। जिसमें यह दावा किया गया था कि लेखपाल के खिलाफ साक्ष्य नहीं है। इसी दौरान पीड़िता व नवजात की मौत हो गई। तब उच्चाधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया। तब पुलिस ने लेखपाल पर कार्रवाई की।
एफआईआर में लेखपाल नामजद है। पीड़िता ने पुलिस के बयानों में लेखपाल का नाम दर्ज कराया था। जब कोर्ट में उसके बयान हुए वहां पर भी उसने करन, लेखपाल व अन्य दो अज्ञात का नाम लिया था। एक वीडियो पीड़िता है जिसमें वह लेखपाल रंजीत पर सीधे तौर पर आरोप लगा रही थी। इसके बावजूद पुलिस उसको गिरफ्तार नहीं कर रही थी। देरी की शायद यही वजह थी कि लेखपाल को बचाने का प्रयास जारी था।
पीड़ित परिवार पर दबाव, पुलिस की हर बात पर हां
दरअसल, पीड़ित परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर है। दूसरी तरफ लेखपाल के पास पैसा भी था और पॉवर भी। उसने पुलिस के साथ बखूबी सांठगांठ की। परिजनों ने किसी तरह से हिम्मत कर एक बार आईजी से शिकायत की थी। मगर वह वही करते थे जो पुलिस कहती थी। इसलिए पुलिस मनचाही कार्रवाई करने में जुटी थी। अब मामला जब तूल पकड़ चुका है तो जिम्मेदार पुलिसकर्मी खुद के बचाव करने में जुटे हैं।
मामले में जांच जारी है। यदि लेखपाल को बचाव करने का प्रयास किया गया होगा तो जिम्मेदार पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
अजीत कुमार सिन्हा, एसपी आउटर