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Kanpur News: शोध से लेकर क्लिनिकल ट्रायल तक विशेषज्ञों ने साझा किए अनुसंधान के गुर

Thu, 24 Sep 2026 01:47 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 24 Sep 2026 01:47 AM IST
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From research to clinical trials, experts share their research insights.
कानपुर देहात। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में बुधवार को शोध पद्धति एवं गुड क्लिनिकल प्रैक्टिस पर दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। फार्माकोलॉजी विभाग की ओर से आयोजित कार्यशाला में देशभर से करीब 300 प्रतिभागियों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से हिस्सा लिया। विशेषज्ञों ने शोध की बारीकियों से लेकर क्लिनिकल ट्रायल और दवाओं के प्रतिकूल प्रभावों की पहचान तक की जानकारी दी।
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कार्यशाला का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अंबरीश कुमार गुप्ता ने आयोजन अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र कुमार की मौजूदगी में किया। आयोजन सचिव डॉ. विनीता अवस्थी ने प्रतिभागियों के प्रारंभिक ज्ञान का आकलन करने के लिए प्री-टेस्ट कराया। पहले दिन शोध पद्धति पर विभिन्न सत्र आयोजित किए गए। पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ के फार्माकोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. बिकाश मेधी ने शोध के मूल सिद्धांत, आलोचनात्मक चिंतन, अध्ययन डिजाइन और क्लिनिकल प्रोटोकॉल की जानकारी दी। ग्लोबल जर्नल ऑफ मेडिसिन एंड पब्लिक हेल्थ की संस्थापक-संपादक डॉ. मिताली राजा ने क्लिनिकल रिसर्च और प्रकाशन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता व नवाचार की भूमिका बताई।
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डॉ. रेड्डीज, हैदराबाद के डॉ. रोहित आर. देसाई ने क्लिनिकल ट्रायल के औद्योगिक पहलुओं पर प्रकाश डाला। एम्स नई दिल्ली की वैज्ञानिक विनीता ध्यानी ने सिस्टेमेटिक रिव्यू और मेटा-एनालिसिस की जानकारी दी। केजीएमयू लखनऊ के प्रो. आरके दीक्षित ने शोध प्रस्ताव और शोध-पांडुलिपि तैयार करने के महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की। पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ के प्रो. अजय प्रकाश ने सांख्यिकीय परीक्षणों और सांख्यिकीय एवं क्लिनिकल महत्व के बीच अंतर समझाया।
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प्रो. नरेंद्र कुमार ने प्रतिकूल औषधि प्रतिक्रियाओं के कारणता आकलन पर जानकारी दी। प्राचार्य प्रो. डॉ. अंबरीश कुमार गुप्ता ने फार्माकोविजिलेंस पर सत्र लेते हुए दवाओं के प्रतिकूल प्रभावों की पहचान, रिपोर्टिंग और रोगी सुरक्षा पर जोर दिया। पहले दिन का समापन पोस्ट-टेस्ट और प्रतिभागियों के फीडबैक के साथ हुआ। दूसरे दिन गुड क्लिनिकल प्रैक्टिस पर विशेषज्ञों के सत्र होंगे।
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