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Kanpur News: एलईडी बल्ब बनाने से लेकर कृषि क्षेत्र तक परचम लहराएंगी समूह की महिलाएं
Mon, 01 Dec 2025 12:53 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Mon, 01 Dec 2025 12:53 AM IST
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कानपुर देहात। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की तरफ से 21 तरह की योजनाओं को चलाया जा रहा है। इनमें समूह की महिलाओं को उनके कौशल के अनुसार प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसमें एलईडी बल्ब बनाने से लेकर कृषि क्षेत्र के काम शामिल हैं। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद इन्हें कारोबार शुरू करने के लिए पांच लाख रुपये तक ब्याज मुक्त ऋण भी मिलेगा।
जिले में करीब नौ हजार स्वयं सहायता समूह संचालित हैं। इससे 90 हजार से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं, जो विभिन्न क्षेत्रों में स्व रोजगार कर आमदनी कर रही हैं और आत्मनिर्भर बन रही है। एनआरएलएम विभाग समूह की संख्या को बढ़ाकर 25 हजार से अधिक करने की तैयारी में है। इसके लिए जिला मिशन प्रबंधक को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो अलग-अलग ब्लॉकों में जाकर महिलाओं से मिल रही है और समूह से जुड़कर कार्य करने को प्रेरित कर रही हैं।
आरसेटी के निदेशक मयंक कटियार ने बताया कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इसमें जूट उत्पादन, सिलाई, मशरूम कल्टीवेशन, अगरबत्ती-धूपबत्ती व मोमबत्ती, सेनेटरी पैड, मोबाइल रिपेयरिंग, रंग-गुलाल जैसे 21 तरह के कारोबार शामिल हैं। इस योजना का लाभ लेने के लिए महिलाओं की उम्र 18 से 45 वर्ष के बीच होनी आवश्यक है। प्रशिक्षण पूरी तरह से निशुल्क है, जिसके समाप्त होने पर इन्हें प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा। प्रशिक्षक निखिल मिश्रा ने बताया कि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद समूह को कारोबार शुरू करने के लिए पांच लाख तक का ब्याज मुक्त ऋण भी दिया जाएगा।
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वर्जन...................
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की तरफ से समूह की महिलाओं को निशुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके लिए अभियान भी चलाया जा रहा है। योजना में पात्र गृहस्थी कार्ड धारक, दिव्यांग जन, मनरेगा में सक्रिय जॉब कार्ड धारक व सामाजिक, आर्थिक व जातिगत परिवार से एक महिला को शामिल किए जाने पर जोर है। इसका उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है।
- गंगाराम वर्मा, उपायुक्त, एनआरएलएम
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जिले में करीब नौ हजार स्वयं सहायता समूह संचालित हैं। इससे 90 हजार से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं, जो विभिन्न क्षेत्रों में स्व रोजगार कर आमदनी कर रही हैं और आत्मनिर्भर बन रही है। एनआरएलएम विभाग समूह की संख्या को बढ़ाकर 25 हजार से अधिक करने की तैयारी में है। इसके लिए जिला मिशन प्रबंधक को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो अलग-अलग ब्लॉकों में जाकर महिलाओं से मिल रही है और समूह से जुड़कर कार्य करने को प्रेरित कर रही हैं।
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आरसेटी के निदेशक मयंक कटियार ने बताया कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इसमें जूट उत्पादन, सिलाई, मशरूम कल्टीवेशन, अगरबत्ती-धूपबत्ती व मोमबत्ती, सेनेटरी पैड, मोबाइल रिपेयरिंग, रंग-गुलाल जैसे 21 तरह के कारोबार शामिल हैं। इस योजना का लाभ लेने के लिए महिलाओं की उम्र 18 से 45 वर्ष के बीच होनी आवश्यक है। प्रशिक्षण पूरी तरह से निशुल्क है, जिसके समाप्त होने पर इन्हें प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा। प्रशिक्षक निखिल मिश्रा ने बताया कि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद समूह को कारोबार शुरू करने के लिए पांच लाख तक का ब्याज मुक्त ऋण भी दिया जाएगा।
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राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की तरफ से समूह की महिलाओं को निशुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके लिए अभियान भी चलाया जा रहा है। योजना में पात्र गृहस्थी कार्ड धारक, दिव्यांग जन, मनरेगा में सक्रिय जॉब कार्ड धारक व सामाजिक, आर्थिक व जातिगत परिवार से एक महिला को शामिल किए जाने पर जोर है। इसका उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है।
- गंगाराम वर्मा, उपायुक्त, एनआरएलएम