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UP: पुलिस विभाग की अब रिट सेल में फर्जीवाड़ा, कोर्ट में जवाब दाखिल किए बिना हेड कांस्टेबल जारी कराता रहा रकम

Thu, 22 Feb 2024 09:10 AM IST
हिमांशु अवस्थी वाचस्पति पांडेय, अमर उजाला, कानपुर
वाचस्पति पांडेय, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Thu, 22 Feb 2024 09:10 AM IST
सार

Kanpur News: प्रमोशन और फर्जी तरीके से छुट्टी देने के बाद पुलिस विभाग की अब रिट सेल में फर्जीवाड़ा सामने आया है। दरअसल, हाईकोर्ट में रिट दाखिल करने के नाम पर हेड कांस्टेबल ने घोटाला किया है।  एक ही रिट कई बार दाखिल करने के नाम पर विभाग से रुपये जारी कराए गए हैं।

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fraud in the writ sale of the police department, the head constable kept releasing the amount without filing t
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कानपुर में तीन कांस्टेबलों का प्रमोशन कराने के लिए सर्विस बुक के पन्ने फाड़ने, डीसीपी के हस्ताक्षर कर फर्जी तरीके से छुट्टी देने के बाद अब पुलिस विभाग की रिट सेल में फर्जीवाड़ा सामने आया है। हाईकोर्ट में दायर वादों में पुलिस विभाग की ओर से जवाब दाखिल करने के नाम पर रिट सेल में तैनात हेड कांस्टेबल सुरेश चंद्र ने बीते छह सालों में लाखों का फर्जीवाड़ा किया है।

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हेड कांस्टेबल ने रिट दाखिल करने के नाम पर विभाग से इस मद में कई-कई बार रकम जारी करा ली। भले चाहे रिट एक ही बार दाखिल की गई हो। दरअसल, हाईकोर्ट से मांगे गए जवाब को देने के लिए रिट सेल में विभागीय कर्मी की ड्यूटी लगाई जाती है। अमर उजाला के हाथ लगे दस्तावेजों के मुताबिक हेड कांस्टेबल सुरेश चंद्र बीते छह सालों से पुलिस विभाग की रिट सेल में तैनात है।

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हाईकोर्ट आने-जाने, जवाब तैयार कराने में आने वाले खर्चों समेत अन्य व्यय मिलाकर एक बार में 4000 से 5000 रुपये जारी होते हैं। रिट सेल में तैनात हेड कांस्टेबल सुरेश चंद्र ने कोर्ट के एक बार जवाब मांगने पर कई बार जवाब देने के नाम पर पैसा जारी कराए। इतना ही नहीं कई बार तो बगैर जवाब मांगे ही जवाब दाखिल करने के नाम पर पैसे उठाए।

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एक साल में जारी कराए 4.47 लाख रुपये
सुरेश ने तीन दिसंबर 2022 से नौ जनवरी 2024 के बीच सात बार में 4.47 लाख रुपये जारी कराए। इसमें तीन दिसंबर 2022 को एक लाख रुपये, 28 अप्रैल 2023 को तीन बार में 1.20 लाख रुपये, 26 अक्तूबर को 40 हजार, 11 नवंबर को 97 हजार और पिछले माह एक जनवरी से नौ जनवरी के बीच 92 हजार रुपये लिए हैं।

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केस: एक
मृतक आश्रित में नौकरी पाने के लिए प्रवीण यादव और निशा ने हाईकोर्ट में रिट दाखिल की थी। इसमें सिर्फ एक बार ही जवाब दाखिल किया गया। हेड कांस्टेबल सुरेश चंद्र ने कई बार जवाब दाखिल करने के नाम पर 27 हजार 583 रुपये जारी करा लिए, जबकि विभाग की ओर से एक बार जवाब दाखिल करने के लिए 4000 से 5000 रुपये ही जारी होते हैं।

केस: दो
बेबी यादव के मामले में हाईकोर्ट के जवाब मांगे बिना ही हेड कांस्टेबल ने जवाब दाखिल करने के नाम पर विभाग से 47500 रुपये जारी कराकर रकम हड़प ली। विभाग के जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते हेड कांस्टेबल ने सुशील मिश्रा के पदोन्नति के मामले में भी जवाब दाखिल करने के नाम पर गबन किया।

केस: तीन
पदमाकर द्विवेदी की दायर रिट याचिका में 20 फरवरी 2024 को हाईकोर्ट ने डीआईजी स्थापना को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने का आदेश जारी किया था। इस मामले में हाईकोर्ट की ओर से कोई जवाब भी नहीं मांगा गया, हेड कांस्टेबल ने जवाब दाखिल करने के नाम पर सात हजार रुपये जारी करा लिए।

पिछले एक साल में हाईकोर्ट में जितने भी जवाब दाखिल किए गए हैं। इनमें क्या खर्च और कितने रुपये जारी कराए गए हैं, इसकी जांच कराई जाएगी। जांच में सरकारी धन का दुरुपयोग या अन्य आरोप सही मिलेंगे तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।  -अखिल कुमार, पुलिस कमिश्नर

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