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अमेरिकन से ठगी का मामला: सॉफ्टवेयर के जरिए करते थे कॉल ट्रांसफर ताकि आईपी एड्रेस न मिल सके, चौंकाने वाला खुलासा
Fri, 23 Jul 2021 10:07 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Fri, 23 Jul 2021 10:07 AM IST
सार
एनसीआर वाला कॉल सेंटर सामान्य दरों पर आईएसडी कॉल करता और रिसीव करता था। जल्द इस मामले में भी शिकंजा कसेगा।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
अमेरिकी नागरिकों से ठगी के मामले में एक अहम जानकारी क्राइम ब्रांच को हाथ लगी है। जसराज के गुर्गे एनसीआर में एक और कॉल सेंटर संचालित कर रहे थे। अमेरिका के ठगी का शिकार हुए नागरिक जब कॉल करते तो पहले वो कॉल इसी कॉल सेंटर पर लैंड होती थी, यहां से कॉल कानपुर स्थित कॉल सेंटर में ट्रांसफर की जाती थी।
एनसीआर वाला कॉल सेंटर सामान्य दरों पर आईएसडी कॉल करता और रिसीव करता था। जल्द इस मामले में भी शिकंजा कसेगा। दो शख्स हिरासत में लिए गए हैं। कानपुर में कॉल सेंटर में बैठे लोग अमेरिका के लोगों के सिस्टम में वायरस भेजकर कस्टमर केयर नंबर फ्लैश कराते थे।
वो लोग जब कॉल करते थे तो वो इंटरनेट कॉल एनसीआर के कॉल सेंटर पर आती थी। ये कॉल एक खास सॉफ्टवेयर रिसीव करता था। इसी के जरिये कॉल कानपुर के सेंटर ट्रांसफर होती थी। इस वजह से अगर अमेरिकन एक्सपर्ट आईपी एड्रेस पता करते तो वह केवल एनसीआर का ही पता चलता है।
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उसके आगे पता ही नहीं चलता कि आखिर कॉल कहां किसको की गई। जांच में पता चला है कि एनसीआर वाले कॉल सेंटर को एक मुश्त रकम हर महीने जसराज के जरिये दी जाती थी। ये कॉल सेंटर एनसीआर के नोएडा, गाजियाबाद या गुड़गांव में कहीं चल रहा था। पांच युवक इसको संचालित कर रहे थे। इन सभी की कुंडली निकाली जा रही है। साथ ही दो युवकों को हिरासत में लिया गया है।
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एनसीआर वाला कॉल सेंटर सामान्य दरों पर आईएसडी कॉल करता और रिसीव करता था। जल्द इस मामले में भी शिकंजा कसेगा। दो शख्स हिरासत में लिए गए हैं। कानपुर में कॉल सेंटर में बैठे लोग अमेरिका के लोगों के सिस्टम में वायरस भेजकर कस्टमर केयर नंबर फ्लैश कराते थे।
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वो लोग जब कॉल करते थे तो वो इंटरनेट कॉल एनसीआर के कॉल सेंटर पर आती थी। ये कॉल एक खास सॉफ्टवेयर रिसीव करता था। इसी के जरिये कॉल कानपुर के सेंटर ट्रांसफर होती थी। इस वजह से अगर अमेरिकन एक्सपर्ट आईपी एड्रेस पता करते तो वह केवल एनसीआर का ही पता चलता है।
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उसके आगे पता ही नहीं चलता कि आखिर कॉल कहां किसको की गई। जांच में पता चला है कि एनसीआर वाले कॉल सेंटर को एक मुश्त रकम हर महीने जसराज के जरिये दी जाती थी। ये कॉल सेंटर एनसीआर के नोएडा, गाजियाबाद या गुड़गांव में कहीं चल रहा था। पांच युवक इसको संचालित कर रहे थे। इन सभी की कुंडली निकाली जा रही है। साथ ही दो युवकों को हिरासत में लिया गया है।
मुझे आप पर भरोसा नहीं, कहीं आप ठग तो नहीं
क्राइम ब्रांच को तमाम अमेरिकन का डाटा मिला था। जिनको आरोपियों ने ठगी का शिकार बनाया। करीब दौ सौ लोगों को क्राइम ब्रांच ने ईमेल भेजकर पूरे मामले की जानकारी दी। उनको बताया गया कि ठगी करने वाला पकड़ा गया है। कृपया आप अपने बयान ईमेल के जरिये भेज दें।
इस पर कुछ लोगों ने रिप्लाई किया है। मुझे आप पर भरोसा नहीं। मैं कैसे यकीन कर लूं कि आप पुलिस विभाग से हैं। कहीं आप ठग तो नहीं। चूंकि ये लोग एक बार ठगे जा चुके हैं इसलिए उनको यकीन नहीं हो रहा है। यही वजह है कि पुलिस कमिश्नर ने इंटरपोल के जरिये मामले की जानकारी यूएस पुलिस को दी है।
क्राइम ब्रांच को विवेचना ट्रांसफर
काकादेव में कॉल सेंटर पकड़ा गया था। काकादेव थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। विवेचना स्वरूपनगर इंस्पेक्टर अश्विनी कुमार पांडेय को सौंपी गई थी। गुरुवार को विवेचना क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दी गई है। क्राइम ब्रांच में तैनात इंस्पेक्टर रामऔतार ने विवेचना शुरू की है। क्राइम ब्रांच में विवेचना ट्रांसफर होने से सहूलियत होगी। सर्विलांस आदि से समन्वय बनाने में आसानी होगी।
क्राइम ब्रांच को तमाम अमेरिकन का डाटा मिला था। जिनको आरोपियों ने ठगी का शिकार बनाया। करीब दौ सौ लोगों को क्राइम ब्रांच ने ईमेल भेजकर पूरे मामले की जानकारी दी। उनको बताया गया कि ठगी करने वाला पकड़ा गया है। कृपया आप अपने बयान ईमेल के जरिये भेज दें।
इस पर कुछ लोगों ने रिप्लाई किया है। मुझे आप पर भरोसा नहीं। मैं कैसे यकीन कर लूं कि आप पुलिस विभाग से हैं। कहीं आप ठग तो नहीं। चूंकि ये लोग एक बार ठगे जा चुके हैं इसलिए उनको यकीन नहीं हो रहा है। यही वजह है कि पुलिस कमिश्नर ने इंटरपोल के जरिये मामले की जानकारी यूएस पुलिस को दी है।
क्राइम ब्रांच को विवेचना ट्रांसफर
काकादेव में कॉल सेंटर पकड़ा गया था। काकादेव थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। विवेचना स्वरूपनगर इंस्पेक्टर अश्विनी कुमार पांडेय को सौंपी गई थी। गुरुवार को विवेचना क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दी गई है। क्राइम ब्रांच में तैनात इंस्पेक्टर रामऔतार ने विवेचना शुरू की है। क्राइम ब्रांच में विवेचना ट्रांसफर होने से सहूलियत होगी। सर्विलांस आदि से समन्वय बनाने में आसानी होगी।