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ये है चित्रकूट की गूगल, सवाल कोई भी हो जवाब फौरन हाजिर होता है, मिलने के लिए घर पर लगती है लाइन
Sat, 01 Jun 2019 09:25 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट
यूपी डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sat, 01 Jun 2019 09:25 PM IST
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गूगल की तरह फौरन जवाब देती है अपर्णा
- फोटो : अमर उजाला
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चित्रकूट जिले में साढ़े चार साल की अपर्णा मिश्रा उर्फ किट्टू का नाम लोगों जुबान पर है। वह कभी विद्यालय तो नहीं गई। लेकिन विश्व भर का सामान्य ज्ञान उसे रटा है। हर कोई उसकी विलक्षण प्रतिभा का कायल है। प्रदेशों की राजधानी, हिंदी साहित्य की 15 सौ से अधिक पुस्तकों के लेखक, जोड़-घटाना, गुणा-भाग से लेकर पढ़ने और लिखने की कला में वह इस उम्र में पारंगत है।
चित्रकूट जिले के भौंरी कस्बे के रलिहन पुरवा निवासी पिता वेदप्रकाश मिश्रा जसपुरा ब्लाक के एक स्कूल में प्राइमरी प्रधानाध्यापक हैं। उनकी तीन पुत्रियों में अपर्णा दूसरे नंबर पर है। पिता उसे आईएएस बनाना चाहते हैं। अपर्णा मिश्रा का आईक्यू ऐसा है कि एक बार जो पढ़ ले उसे याद हो जाता है।
दादी लीलावती व मां खुशबू ने उसे क से ज्ञ तक बारहखड़ी सिखाई तो वह झट से शब्दों को मिलाकर पढ़ना सीख गई। गांव में एक बार भागवत की कथा हुई तो महीनों तक वह कथा के प्रसंग सुनाती रही और गांव के लोगों को आश्चर्य चकित कर दिया। साढे़ चार वर्ष की उम्र में उसे देश के सभी राज्यों की राजधानियां याद हैं।
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हिंदी साहित्य की नामचीन 15 सौ से अधिक पुस्तकों के लेखकों के नाम, पशु-पक्षियों के नाम, सौर मंडल की जानकारी। 20 तक हिंदी-अंग्रेजी में पहाड़ा, जोड़ और घटना। सबकुछ उसकी जुबान पर है। शनिवार को जिले की इस प्रतिभा को बुंदेली सेना के जिलाध्यक्ष अजीत सिंह ने सम्मानित किया।
मांग की गई है कि ऐसी विलक्षण प्रतिभा को सरकार की ओर से प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। अनुदेशक संघ के जिलाध्यक्ष श्याम सुंदर यादव ने कहा कि खुशी एक विलक्षण प्रतिभा है और इस प्रतिभा को मुकाम तक पहुंचाने में वह हर संभव मदद की जायेगी।
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चित्रकूट जिले के भौंरी कस्बे के रलिहन पुरवा निवासी पिता वेदप्रकाश मिश्रा जसपुरा ब्लाक के एक स्कूल में प्राइमरी प्रधानाध्यापक हैं। उनकी तीन पुत्रियों में अपर्णा दूसरे नंबर पर है। पिता उसे आईएएस बनाना चाहते हैं। अपर्णा मिश्रा का आईक्यू ऐसा है कि एक बार जो पढ़ ले उसे याद हो जाता है।
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दादी लीलावती व मां खुशबू ने उसे क से ज्ञ तक बारहखड़ी सिखाई तो वह झट से शब्दों को मिलाकर पढ़ना सीख गई। गांव में एक बार भागवत की कथा हुई तो महीनों तक वह कथा के प्रसंग सुनाती रही और गांव के लोगों को आश्चर्य चकित कर दिया। साढे़ चार वर्ष की उम्र में उसे देश के सभी राज्यों की राजधानियां याद हैं।
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हिंदी साहित्य की नामचीन 15 सौ से अधिक पुस्तकों के लेखकों के नाम, पशु-पक्षियों के नाम, सौर मंडल की जानकारी। 20 तक हिंदी-अंग्रेजी में पहाड़ा, जोड़ और घटना। सबकुछ उसकी जुबान पर है। शनिवार को जिले की इस प्रतिभा को बुंदेली सेना के जिलाध्यक्ष अजीत सिंह ने सम्मानित किया।
मांग की गई है कि ऐसी विलक्षण प्रतिभा को सरकार की ओर से प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। अनुदेशक संघ के जिलाध्यक्ष श्याम सुंदर यादव ने कहा कि खुशी एक विलक्षण प्रतिभा है और इस प्रतिभा को मुकाम तक पहुंचाने में वह हर संभव मदद की जायेगी।