फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Four to 40 percent of lungs become weak due to corona

कोरोना चार से 40 फीसदी कमजोर कर गया फेफड़े, पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट में हो रहा खुलासा

Thu, 11 Feb 2021 08:23 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Thu, 11 Feb 2021 08:23 AM IST
विज्ञापन
Four to 40 percent of lungs become weak due to corona
कोरोना वायरस - फोटो : अमर उजाला
संक्रमितों के आंकड़ों से यह संकेत मिल रहा है कि कोरोना अंतिम सांसें ले रहा है लेकिन जिन्हें संक्रमण हुआ है, उनके फेफड़ों की क्षमता चार से 40 फीसदी तक कम हो गई है। जितनी क्षमता कम घटी है, उनकी थोड़ी सी मेहनत करने पर सांस फूल जाती है और जिनके फेफड़ों की क्षमता 40 फीसदी कम हुई उन्हें अब भी आक्सीजन की जरूरत पड़ रही है।
विज्ञापन


एक और चौंकाने वाला खुलासा यह है कि कुछ रोगियों में कोरोना की फाइब्रोसिस (फेफड़े की बीमारी) ठीक हो रही है, जबकि दूसरे रोगों से हुई फाइब्रोसिस ठीक नहीं होती। कोरोना से संक्रमित होकर 32 हजार से अधिक लोग ठीक हो चुके हैं। पोस्ट कोविड जांचें करा रहे हैं तो नई स्थिति उभरकर सामने आई है।
विज्ञापन


कोरोना तो मर गया लेकिन फेफड़ों को कमजोर कर गया है। अच्छी बात यह है कि फेफड़ों के फिर सामान्य स्थिति में पहुंचने के ज्यादातर लोगों में लक्षण मिल रहे हैं। इसका मतलब है कि कोरोना ठीक होने के बाद इस रोग से पैदा हुई सेहत की जटिलताएं झेल रहे लोग मायूस न हों। शहर में करीब 10 हजार रोगियों की पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट कराया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

उसमें फेफड़ों में कमजोरी आने का खुलासा हुआ है। नेशनल कॉलेज ऑफ चेस्ट फिजीशियन इंडिया के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एसके कटियार का कहना है कि संक्रमण के लेवल के लिहाज से संक्रमितों के फेफड़ों में कमजोरी आई है। जिनके संक्रमण का लोड अधिक था, उनके 40 फीसदी तक नुकसान हुआ है।

पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट में यह नई बात सामने आ रही है। सीनियर चेस्ट फिजीशियन डॉ. राजीव कक्कड़ का कहना है कि कोरोना के सबसे अधिक असर फेफड़ों पर है। एक तो माहौल में प्रदूषण अधिक है, उस पर कोरोना ने फेफड़ों को और कमजोर किया है।

फेफड़ों में एक बार फाइब्रोसिस होने के बाद उसके फिर ठीक होने की उम्मीद बहुत कम होती है। लेकिन कोरोना के रोगियों में यह देखा गया है कि भरपूर इलाज लेने पर फाइब्रोसिस रिवर्ट हो जा रही है। - डॉ. एसके कटियार, पूर्व अध्यक्ष नेशनल कॉलेज ऑफ चेस्ट फिजीशियन इंडिया

ये बरतें एहतियात
- कोरोना निगेटिव होने के बाद जांच कराएं
- दवा बीच में न छोड़ें, पूरा इलाज कराएं
- जब तक सांस में दिक्कत है, प्रदूषण वाले माहौल में न जाएं
- सफाई रखें, वायरल संक्रमण से बचें
- खानपान पौष्टिक और सादा रखें
- गर्मी-सर्दी से बचें, गर्म जगह से अचानक ठंड में न आएं
- बाहर निकलें तो मास्क पहनें, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें

कनपुरियों के फेफड़े 10 फीसदी पहले से कमजोर
10 साल पहले जीएसवीएम मेडिकल कालेज के डॉ. मुरारीलाल चेस्ट हॉस्पिटल, आईआईटी कानपुर के साझा शोध में खुलासा हुआ था कि कनपुरिया के फेफड़ों की क्षमता प्रदूषण के कारण 10 फीसदी कम हो गई हैै। इसके लिए शोध में एहतियात बरतने का सुझाव दिया गया था। बाहर के साथ ही घर के अंदर का प्रदूषण कम करने का मशविरा दिया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed