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Kanpur News: चार माह की पुलिसिया देरी, 1011 दिन से डीएनए रिपोर्ट का इंतजार
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कानपुर। कल्याणपुर के विनीत मिनोचा और रावतपुर के उमा हत्याकांड की तरह ही कोतवाली क्षेत्र के एकता गुप्ता हत्याकांड में भी पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। आरोप है कि पुलिस चार माह तक अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कर हाथ पर हाथ धरे बैठी रही और महिला की हत्या भी हो गई। आरोपी को पकड़ने के बाद उसकी निशानदेही पर महिला के शव के बजाय कंकाल बरामद हुआ। जिस डीएनए रिपोर्ट के 45 से 90 दिन में आने की उम्मीद थी, वह 1011 दिन बाद भी नहीं आई है। अब पुलिस का दावा है कि एक माह के भीतर रिपोर्ट मिल जाएगी और इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि बरामद कंकाल किसका है।
सिविल लाइंस निवासी राहुल गुप्ता ने 24 जून 2024 को पत्नी एकता के अपहरण की रिपोर्ट कोतवाली में दर्ज कराई थी। एकता के जिम ट्रेनर शक्कर मिल खलवा निवासी विमल कुमार उर्फ विमल सोनी पर नशीला पदार्थ खिलाकर अपहरण करने का आरोप लगाया था।
करीब चार माह बाद 26 अक्तूबर 2024 को पुलिस ने विमल को गिरफ्तार किया। पूछताछ में एकता की हत्या का राज खुला। विमल की निशानदेही पर डीएम आवास से सटे ऑफिसर्स क्लब परिसर में खोदाई कर एकता की हड्डियां और कंकाल बरामद करने का दावा किया गया। पुलिस के मुताबिक, शव को दफनाने के बाद चार माह में वह कंकाल में बदल चुका था। पुलिस ने विमल के खिलाफ 70 पेज की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की। कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ अपहरण, हत्या और साक्ष्य मिटाने की धाराओं में आरोप तय कर मुकदमे की सुनवाई शुरू कर दी।
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पुलिस की पहली लापरवाही आरोपी की गिरफ्तारी में देरी को लेकर बताई जा रही है। आरोप है कि राहुल जून से कोतवाली और अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाते रहे, लेकिन उन्हें हर जगह से यही जवाब मिलता रहा कि पता लगने पर बताया जाएगा। ऐसा करते-करते चार महीने बीत गए। जब शव मिला तो वह कंकाल बन चुका था। बरामद कंकाल की पहचान के लिए डीएनए रिपोर्ट भी समय पर नहीं मंगाई जा सकी। आरोप है कि फजीहत से बचने के लिए रिपोर्ट जल्द मंगाने की ढंग से कोशिश नहीं की गई। इसके बाद कुछ अधिकारियों और कोतवाली प्रभारी का तबादला हो गया। नए अधिकारियों ने चार्जशीट को ही मामले की अंतिम कार्रवाई मानकर चुप्पी साध ली।
जिस समय ऑफिसर्स क्लब परिसर के गड्ढे से कंकाल निकाला गया था, उस समय गड्ढे की मिट्टी और कंकाल से मिली मिट्टी एक जैसी पाई गई थी। इससे यह स्पष्ट हुआ था कि कंकाल ऑफिसर्स क्लब परिसर से ही मिला है। हालांकि, कंकाल एकता का ही है या किसी और का, इसकी अंतिम पुष्टि के लिए डीएनए रिपोर्ट जरूरी है।
एडीजीसी संजय कुमार झा ने बताया कि एकता के पति राहुल गुप्ता, भाई हिमांशु गुप्ता, एफएसएल के वैज्ञानिक, पंचायतनामा भरने वाली महिला दरोगा और पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर की गवाही पूरी हो चुकी है। पहले विवेचक राष्ट्रदीप सिंह की गवाही भी पूरी हो चुकी है। इन सभी ने विमल की गिरफ्तारी और उसकी निशानदेही पर एकता का कंकाल बरामद होने की बात बताई है। अब नौ अक्तूबर को फॉरेंसिक के हेड कांस्टेबल की गवाही कराई जाएगी।
जमानत से लेकर हाईकोर्ट तक खारिज हुई याचिका
24 जून 2024: राहुल गुप्ता ने पत्नी एकता के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई।
26 अक्तूबर 2024: पुलिस ने जिम ट्रेनर विमल सोनी को गिरफ्तार कर जेल भेजा और उसकी निशानदेही पर कंकाल बरामद किया।
8 मई 2025: सेशन कोर्ट में विमल के खिलाफ अपहरण, हत्या और साक्ष्य मिटाने की धाराओं में आरोप तय किए गए।
19 नवंबर 2025: अपर जिला जज सप्तम की अदालत ने विमल की जमानत अर्जी खारिज कर दी।
5 अगस्त 2026: हाईकोर्ट ने भी जमानत याचिका खारिज करते हुए छह माह में मुकदमा निपटाने के निर्देश दिए।
वर्जन
केस की गंभीरता को देखते हुए ही पिछले सप्ताह डीएनए की रिपोर्ट जल्द उपलब्ध कराने के लिए एफएसएल के अधिकारी को पत्र लिखा गया है। प्रयास किया जा रहा है कि एक माह के भीतर कंकाल की रिपोर्ट मिल जाए, जिससे केस और स्पष्ट हो सके। - अमित कुमार पांडे, एसीपी कोतवाली
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सिविल लाइंस निवासी राहुल गुप्ता ने 24 जून 2024 को पत्नी एकता के अपहरण की रिपोर्ट कोतवाली में दर्ज कराई थी। एकता के जिम ट्रेनर शक्कर मिल खलवा निवासी विमल कुमार उर्फ विमल सोनी पर नशीला पदार्थ खिलाकर अपहरण करने का आरोप लगाया था।
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करीब चार माह बाद 26 अक्तूबर 2024 को पुलिस ने विमल को गिरफ्तार किया। पूछताछ में एकता की हत्या का राज खुला। विमल की निशानदेही पर डीएम आवास से सटे ऑफिसर्स क्लब परिसर में खोदाई कर एकता की हड्डियां और कंकाल बरामद करने का दावा किया गया। पुलिस के मुताबिक, शव को दफनाने के बाद चार माह में वह कंकाल में बदल चुका था। पुलिस ने विमल के खिलाफ 70 पेज की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की। कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ अपहरण, हत्या और साक्ष्य मिटाने की धाराओं में आरोप तय कर मुकदमे की सुनवाई शुरू कर दी।
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पुलिस की पहली लापरवाही आरोपी की गिरफ्तारी में देरी को लेकर बताई जा रही है। आरोप है कि राहुल जून से कोतवाली और अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाते रहे, लेकिन उन्हें हर जगह से यही जवाब मिलता रहा कि पता लगने पर बताया जाएगा। ऐसा करते-करते चार महीने बीत गए। जब शव मिला तो वह कंकाल बन चुका था। बरामद कंकाल की पहचान के लिए डीएनए रिपोर्ट भी समय पर नहीं मंगाई जा सकी। आरोप है कि फजीहत से बचने के लिए रिपोर्ट जल्द मंगाने की ढंग से कोशिश नहीं की गई। इसके बाद कुछ अधिकारियों और कोतवाली प्रभारी का तबादला हो गया। नए अधिकारियों ने चार्जशीट को ही मामले की अंतिम कार्रवाई मानकर चुप्पी साध ली।
जिस समय ऑफिसर्स क्लब परिसर के गड्ढे से कंकाल निकाला गया था, उस समय गड्ढे की मिट्टी और कंकाल से मिली मिट्टी एक जैसी पाई गई थी। इससे यह स्पष्ट हुआ था कि कंकाल ऑफिसर्स क्लब परिसर से ही मिला है। हालांकि, कंकाल एकता का ही है या किसी और का, इसकी अंतिम पुष्टि के लिए डीएनए रिपोर्ट जरूरी है।
एडीजीसी संजय कुमार झा ने बताया कि एकता के पति राहुल गुप्ता, भाई हिमांशु गुप्ता, एफएसएल के वैज्ञानिक, पंचायतनामा भरने वाली महिला दरोगा और पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर की गवाही पूरी हो चुकी है। पहले विवेचक राष्ट्रदीप सिंह की गवाही भी पूरी हो चुकी है। इन सभी ने विमल की गिरफ्तारी और उसकी निशानदेही पर एकता का कंकाल बरामद होने की बात बताई है। अब नौ अक्तूबर को फॉरेंसिक के हेड कांस्टेबल की गवाही कराई जाएगी।
जमानत से लेकर हाईकोर्ट तक खारिज हुई याचिका
24 जून 2024: राहुल गुप्ता ने पत्नी एकता के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई।
26 अक्तूबर 2024: पुलिस ने जिम ट्रेनर विमल सोनी को गिरफ्तार कर जेल भेजा और उसकी निशानदेही पर कंकाल बरामद किया।
8 मई 2025: सेशन कोर्ट में विमल के खिलाफ अपहरण, हत्या और साक्ष्य मिटाने की धाराओं में आरोप तय किए गए।
19 नवंबर 2025: अपर जिला जज सप्तम की अदालत ने विमल की जमानत अर्जी खारिज कर दी।
5 अगस्त 2026: हाईकोर्ट ने भी जमानत याचिका खारिज करते हुए छह माह में मुकदमा निपटाने के निर्देश दिए।
वर्जन
केस की गंभीरता को देखते हुए ही पिछले सप्ताह डीएनए की रिपोर्ट जल्द उपलब्ध कराने के लिए एफएसएल के अधिकारी को पत्र लिखा गया है। प्रयास किया जा रहा है कि एक माह के भीतर कंकाल की रिपोर्ट मिल जाए, जिससे केस और स्पष्ट हो सके। - अमित कुमार पांडे, एसीपी कोतवाली