उमा हत्याकांड: ‘37 दिन बाद भी अनसुलझी गुत्थी’, पुलिस ने नए सिरे से शुरू की तफ्तीश, फिर बेटे पर टिकी शक की सुई
Kanpur News: रावतपुर स्थित मसवानपुर में 37 दिन पहले हुई 65 वर्षीय वृद्धा उमा कुशवाहा की हत्या की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस ने नए सिरे से तफ्तीश शुरू कर दी है। पुलिस के शक की सुई एक बार फिर मृतका के बेटे अमरीष पर जा टिकी है।
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कानपुर में रावतपुर के मसवानपुर में एक माह पहले हुई 65 वर्षीय उमा की हत्या की पुलिस ने दोबारा जांच शुरू कर दी है। इस बार भी पुलिस के शक की सुई उमा के बेटे अमरीष पर टिकी है। इसी के चलते पुलिस ने बुधवार को अमरीष का उसकी पत्नी और एक महिला रिश्तेदार से आमना-सामना कराया।
मसवानपुर चौकी में तीनों को साथ बैठाकर करीब 12 सवाल पूछे गए, लेकिन उनके जवाब से पुलिस किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि मामले में अभी फिंगरप्रिंट रिपोर्ट का इंतजार है। इसके बाद तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।
घर में रखी एक अलमारी टूटी हुई थी
एक सितंबर की शाम मसवानपुर निवासी शिवमंगल कुशवाह की पत्नी उमा की उनके ही घर में हत्या कर दी गई थी। उमा का शव कुर्सी पर मिला था। घर में रखी एक अलमारी टूटी हुई थी। शिवमंगल ने अलमारी में रखे करीब 24 लाख रुपये के जेवर गायब होने की बात कही थी। घटना को 37 दिन बीत चुके हैं, लेकिन पुलिस अभी तक हत्यारोपी तक नहीं पहुंच सकी है।
नार्को टेस्ट के लिए भी तैयार है
पुलिस सूत्रों का कहना है कि अलमारी और उसके लॉकर की स्थिति देखकर ऐसा नहीं लगता कि उसे किसी बदमाश ने तोड़ा है। इसी बिंदु को ध्यान में रखकर पुलिस ने मामले की दोबारा जांच शुरू की है। पुलिस के बढ़ते दबाव के बीच अमरीष ने कमिश्नर से कहा कि यदि अभी भी उस पर संदेह है, तो वह नार्को टेस्ट के लिए भी तैयार है।
महिला रिश्तेदार से किए गए सवाल
- वारदात से 10 दिन पहले उमा से किस बात पर विवाद हुआ था।
- अमरीष आखिरी बार किस दिन और कितने समय आपके घर आया था।
- वारदात के बाद अमरीष ने आपसे कितने बार और क्या बातचीत की।
पत्नी से पूछे गए सवाल
- वारदात के दौरान जब आप दोबारा मसवानपुर पहुंची, तो पति ने क्या बताया था।
- अमरीष से सबसे ज्यादा विवाद किस बात पर होता था।
- वारदात के बाद भी आप घर पति के पास क्यों नहीं लौटी।
बेटे अमरीष से पूछताछ
- महिला रिश्तेदार का नाम मोबाइल में किस नाम से सेव किया है।
- वारदात के इतने दिन बाद भी किसी पर संदेह क्यों नहीं जताया।
- मोबाइल पर हत्या के बाद साक्ष्य मिटाने के तरीके क्यों देखते थे।