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कानपुर: ठंड का कहर, निमोनिया से तीन, अस्थमा से एक की मौत, ब्रेन और हार्ट अटैक के मरीज बढ़े
Tue, 24 Dec 2019 04:19 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 24 Dec 2019 04:19 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : गूगल
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कानपुर में शीतलहर के बीच गलन बढ़ने से वायरल संक्रमण से मरीज न्यूमोनाइटिस की चपेट में आ रहे हैं। इस संक्रमण से मरीजों को निमोनिया हो जा रहा है। इससे सोमवार को तीन लोगों की मौत हो गई। वहीं एक मरीज की मौत अस्थमा अटैक से हुई है।
निमोनिया के इन मरीजों का इलाज अस्पतालों में ओपीडी स्तर पर चल रहा था। उधर, हैलट इमरजेंसी में ब्रेन अटैक के मरीजों को गंभीर हालत में भर्ती किया गया है। साथ ही कार्डियोलॉजी में हार्ट अटैक के मरीजों की संख्या बढ़ गई है।
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निमोनिया के इन मरीजों का इलाज अस्पतालों में ओपीडी स्तर पर चल रहा था। उधर, हैलट इमरजेंसी में ब्रेन अटैक के मरीजों को गंभीर हालत में भर्ती किया गया है। साथ ही कार्डियोलॉजी में हार्ट अटैक के मरीजों की संख्या बढ़ गई है।
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मेडिसिन विभाग में ओपीडी स्तर पर इलाज करा रहे जाजमऊ के बचाऊ सिंह (62) और कल्याणपुर के केशव (55) की निमोनिया से मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि इन मरीजोें की अचानक सांस उखड़ गई।
इसी तरह गोविंद नगर के वैभव कुमार (48) की भी निमोनिया से मौत हुई। उनका इलाज साकेत नगर के अस्पताल में चल रहा था। वहीं नवाबगंज निवासी कुलदेवी (53) की अस्थमा से मौत हो गई। परिजन उन्हें लेकर चेस्ट हॉस्पिटल आए थे।
हैलट और उर्सला की ओपीडी में आम मरीजों की संख्या तो घट रही है लेकिन गंभीर हालत में आने वाले बढ़ रहे हैं। वायरल फीवर के बाद मरीजों के फेफड़ों में संक्रमण हो जा रहा है। इनमें स्वाइन फ्लू के भी लक्षण मिल रहे हैं। कुछ मरीजों की उंगलियां नीली पड़ जा रही हैं।
इसी तरह गोविंद नगर के वैभव कुमार (48) की भी निमोनिया से मौत हुई। उनका इलाज साकेत नगर के अस्पताल में चल रहा था। वहीं नवाबगंज निवासी कुलदेवी (53) की अस्थमा से मौत हो गई। परिजन उन्हें लेकर चेस्ट हॉस्पिटल आए थे।
हैलट और उर्सला की ओपीडी में आम मरीजों की संख्या तो घट रही है लेकिन गंभीर हालत में आने वाले बढ़ रहे हैं। वायरल फीवर के बाद मरीजों के फेफड़ों में संक्रमण हो जा रहा है। इनमें स्वाइन फ्लू के भी लक्षण मिल रहे हैं। कुछ मरीजों की उंगलियां नीली पड़ जा रही हैं।