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Kanpur News: चार पीढ़ी से रावण की लंका में नूर भर रहा नूर का परिवार

Wed, 07 Oct 2026 02:33 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 07 Oct 2026 02:33 AM IST
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For four generations, Noor's family has been bringing light to Ravana's Lanka.
कानपुर। रेल बाजार की रामलीला 68 साल पुरानी है। यहां की रामलीला परशुरामी और प्रसंग आधारित मंचन के लिए दूर-दूर तक विख्यात है। इस लीला की एक और खास बात है कि यहां के नूर मोहम्मद की चौथी पीढ़ी रावण की लंका, रावण, मेघनाथ, कुंभकरण के पुतले बना रही है। लीला मंचन के दौरान लगने वाला यहां का मेला भी बच्चों को खूब भाता है।
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लाला गौरीशंकर की अगुवाई में बढ़ी भव्यता

कैंट क्षेत्र के रेल बाजार इलाके में 68 साल से रामलीला का मंचन किया जा रहा है। शुरुआत इलाकाई लोगों ने की थी लेकिन बाद में लाला गौरीशंकर अग्रवाल ने रामलीला की जिम्मेदारी ली। इसके बाद रामलीला की भव्यता बढ़ गई। तभी रेल बाजार के रहने वाले नूर मोहम्मद और रहमतुल्लाह ने पुतले बनाने शुरू किए। उनके बाद नूर मोहम्मद के बेटे मो. सलीम ने जिम्मेदारी संभाली। इनकी अगली पीढ़ी में इकबाल 10 साल की उम्र से पुतले बनाने के काम में लग गए। अब इकबाल का बेटा मो. अरमान भी इस कार्य में जुट गया है।
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मुस्लिम सजाते हैं मंदिर

इकबाल बताते हैं कि चार पीढि़यों से उनका परिवार रावण की लंका तथा मेघनाथ, कुंभकरण आदि के पुतले बना रहा है। रामलीला के अलावा वे मंदिरों के शृंगार आदि का कार्य करते हैं।
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इस बार आएगी फतेहपुर की मंडली

छावनी रामलीला कमेटी के अध्यक्ष सिद्धार्थ काशीवार ने बताया कि रेलबाजार की रामलीला प्रसंग पर आधारित होती है। यहां की परशुरामी मशहूर है। इस बार फतेहपुर की मंडली को रामलीला मंचन की जिम्मेदारी दी गई है। रामलीला में सभी समुदायों के लोगों की सहभागिता रहती है।


इंसेट--

जब बारिश में ढहा पुतला मुस्लिमों ने किया दुरुस्त

कमेटी के अध्यक्ष सिद्धार्थ काशीवार ने बताया कि 60 के दशक में एक बार बहुत वर्षा हुई। रावण का पुतला गिर कर बिखर गया। लगा कि इस बार रावण के पुतला दहन की रस्म नहीं हो पाएगी। क्षेत्रीय मुस्लिमों ने जुटकर रावण के पुतले को दुरुस्त कर खड़ा किया। तब रावण दहन की रस्म हुई। यह रामलीला गंगा जमुनी संस्कृति की प्रतीक है।
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