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Kanpur News: पथार के घरों में बाढ़ ने दी दस्तक

Wed, 27 Aug 2025 01:30 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर Updated Wed, 27 Aug 2025 01:30 AM IST
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Floods hit Pathar's houses
चपरघटा स्थित पुराने पुल की सड़क में भरा बाढ़ का पानी। संवाद
कानपुर देहात/मूसानगर। यमुना की बाढ़ फिर से आस-पास बसे गांवों के लिए दुश्वारी लेकर आई है। मंगलवार दोपहर में मूसानगर गेज और कालपी गेज में खतरे के निशान से ऊपर पानी पहुंच गया। वहीं, पथार में घरों में भी बाढ़ के पानी ने दस्तक दे दी है। लोगों को गृहस्थी सुरक्षित करने की चिंता सता रही है। कई लोग घरों का सामान शिफ्ट करने में जुटे हैं। चपरघटा का संविलियन उच्च प्राथमिक विद्यालय परिसर जलमग्न हो गया है। मूसानगर गेज में जलस्तर स्थिर है। कालपी गेज में जलस्तर बढ़ रहा है।
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चंबल क्षेत्र में हुई बारिश की वजह से यमुना नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। मंगलवार दोपहर 2 बजे जलस्तर नापा गया। इसमें मनकी घाट में यमुना खतरे के निशान से करीब आधा मीटर ऊपर बह रही है। यहां खतरे का निशान 107 मीटर है। यमुना नदी का जलस्तर 107.50 मीटर पहुंच गया है। इससे करीब 15 गांवों की 14 हजार से अधिक आबादी को परेशानी हो रही है। पथार के घरों में बाढ़ ने दस्तक दे दी है। किनारे के घरों के लोग अपना सामान सुरक्षित स्थानों में पहुंचाने लगे हैं।
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आढ़न-पथार, पड़ाव, नगीना बांगर, बम्हरौली घाट की पुलिया डूबने के साथ मंगलवार को क्योटरा बांगर और मुसरिया की पुलिया जलमग्न हो गई। अब क्षेत्र की छह पुलिया डूबने से आढ़न, पथार, मुसरिया, नगीना बांगर, कट्टापुरवा, सूर्यपुर, बम्हरौली घाट, सिमरिया, अहरौली घाट, पड़ाव रसूलपुर, कुंभापुर, भुंडा, चतुरीपुरवा, क्योटरा बांगर गांव का संपर्क सड़क से टूट गया। लोग नावों से आवाजाही कर रहे है। इधर चपरघटा का पुराने पुल की सड़क जलमग्न हो गई। इसी से होकर लोग आवाजाही करते नजर आए। ग्रामीण शत्रुघ्न, प्रीतम, आलोक, महेश, रुप सिंह ने बताया कि अब जलस्तर बढ़ा तो गांव के अंदर भी पानी पहुंच जाएगा। एसडीएम भोगनीपुर महेंद्र कुमार ने बताया कि मूसानगर गेज में जलस्तर स्थिर है। यमुना जलस्तर की निगरानी की जा रही है। बुधवार को जलस्तर कम होने की उम्मीद है।
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वर्जन...........
मूसानगर गेज में यमुना नदी का जलस्तर दोपहर तीन बजे 107.50 मीटर दर्ज किया गया। अब जलस्तर स्थिर है।
- अनिल कुमार गुप्ता, केंद्रीय जल आयोग मूसानगर के स्थल प्रभारी
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कालपी गेज में यमुना नदी का जलस्तर शाम चार बजे 109.02 मीटर दर्ज किया गया। यह खतरे के निशान से एक मीटर से अधिक है। यहां अभी जलस्तर बढ़ रहा है। - सौरभ यादव, केंद्रीय जल आयोग कालपी स्थल प्रभारी
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चिकित्सकों की टीम ने लगाया शिविर
चपरघटा में पशुओं की समस्याओं के दृष्टिगत पशु चिकित्सकों की टीम भी सक्रिय है। सीवीओ डॉ. सुबोध बर्नवाल ने बताया कि ड्यूटी लगाई गई है। इधर लोगों को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कत पर उपचार के लिए डॉ. कृपांशु तिवारी मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र की चपरघटा मंदिर बाढ़ चौकी से क्षेत्र के लोगों को शिविर में दवाएं वितरित की गई। टीम में उनके साथ फार्मासिस्ट प्रशांत शुक्ला, लैब टैक्निशियनऋषि कुशवाहा व स्टाप नर्स ज्योति पाल मौजूद रहीं। (संवाद)
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फोटो- 21 गीता, नया पुरवा। संवाद
फोटो-22 विनोद कुमार। संवाद
फोटो-23 रामपाल। संवाद
बाढ़ से मवेशियों के चारे का संकट गहराया
मूसानगर। एक महीने के अंतराल पर दूसरी बार बाढ़ आने से दुश्वारियां बढ़ती जा रही हैं। वही बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मवेशियों के चारे का भीषण संकट उत्पन्न हो गया है। ग्रामीण इधर-उधर से चारा समेटने में लगे हैं। ताकि मवेशियों के चारे का समुचित इंतजाम हो सके क्योंकि पहली बार आई बाढ़ में फसल के साथ चारा भी नष्ट हो चुका है। मंगलवार को लोग ट्रैक्टर लेकर दूर दराज के गांवों में पहुंचे। इसके बाद समूह में पशुपालकों के लिए चारा लेकर पथार, चपरघटा आदि गांवाें में चारा पहुंचाया। (संवाद)
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दूर से लाना पड़ रहा मवेशियों के लिए चारा
दूसरी बार बाढ़ आ जाएगी नहीं पता था। पहली बार की बाढ़ में फसल व चारा सब कुछ नष्ट हो चुका है। अब मवेशियों के लिए चारा दूसरे गांव से लाना पड़ रहा है। करीब 10 से 15 किलोमीटर दूर के इलाकों से हरे चारे का इंतजाम हो पा रहा है। मंगलवार को गांव के ही लोग मिलकर भाड़े पर ट्रैक्टर लेकर गए फिर हरा चारा लादकर लाए हैं। - गीता देवी, नयापुरवा।
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मवेशियों के चेहरे के लिए कई गांव में चक्कर लगाना पड़ता है। बड़ी मुश्किल से हरा चारा मिल पा रहा है। कुछ दिन पहले आयी बाढ़ के कारण आसपास के सभी इलाकों में फसल के साथ चारा भी नष्ट हो गया था। हजारों रुपए खर्च करके चारा लेने को मजबूर हैं। - विनोद कुमार

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आसपास कहीं भी मवेशियों के लिए चारा नहीं बचा है। घर में तीन-चार पालतू मवेशी हैं इनके लिए चारे का इंतजाम करना चुनौती से काम नहीं है। चारा लाने के लिए दिन भर का समय लगता है साथ ही हजारों रुपये खर्च भी हो जाते हैं। दिनभर की मेहनत मजदूरी भी बर्बाद हो जाती है। - रामपाल।
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