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Kanpur News: तीसरी बार आयी बाढ़, 13 गांवों का संपर्क टूटा
Sun, 07 Sep 2025 01:53 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Sun, 07 Sep 2025 01:53 AM IST
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पथार गांव में यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने से डूबे बिजली पोल। संवाद
मूसानगर। यमुना नदी का जलस्तर तीसरी बार बढ़ गया है। नदी क्षेत्र और हेमनापुर बैराज से पानी छोड़े जाने से जलस्तर खतरे के निशान से कुछ ही दूर है। इधर आढ़न-पथार, पड़ाव, नगीना बांगर व बम्हरौली घाट की सड़क पुलिया डूब गई है। इससे 13 गांवों का सड़क मार्ग से संपर्क टूट गया है। अब इन गांवों में नावों से ही आवाजाही हो पा रही है।
यमुना नदी का जलस्तर शनिवार शाम छह बजे मूसानगर गेज पर 106 मीटर पहुंच गया। यह खतरे के निशान से 1 मीटर नीचे है। यहां खतरे का निशान 107 मीटर है। वहीं कालपी गेज में नदी का जलस्तर 107.33 मीटर पर पहुंच गया। यहां जलस्तर खतरे के निशान से 0.67 मीटर नीचे है। एडीएम वित्त एवं राजस्व दुष्यंत कुमार व एसडीएम देवेंद्र सिंह ने शनिवार को प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया। बाढ़ चौकी प्रभारियों को आवश्यक निर्देश दिए। वहीं जिला स्तर पर बनाए गए नियंत्रण कक्ष का टोल फ्रीन नंबर 1077 जारी किया है।
तीसरी बार यमुना की बाढ़ से आढ़न-पथार के किनारे पानी पहुंच गया है। इससे 13 गांवों की करीब 12 हजार की आबादी तीसरी बार बाढ़ की दुश्वारियां झेल रही है। आढ़न-पथार, पड़ाव, रसूलपुर, भुंडा, कुम्भापुर, नगीना बांगर, कट्टापुरवा, सूर्यपुर, बम्हरौली घाट, सिमरिया, अहरौली घाट का संपर्क सड़क मार्ग से टूट गया। बाढ़ का पानी बस्ती में आने की आशंका से लोग फिर से ऊंचे स्थानों की तलाश करने लगे हैं। लोगों का कहना है कि ऐसा पहली बार हुआ है जब बाढ़ ने तीसरी बार दस्तक दी है। पहले ही फसलें व चारा बर्बाद हो चुका है। किसी तरह गृहस्थी संभाली, फिर से मुसीबत सामने आ गई है।
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धौलपुर राजस्थान में नदी जलस्तर घटने लगा है। आढ़न पथार में दो नाव चलाई ला रही है। ग्रामीणों को नदी किनारे न जाने की सलाह दी गई है। लेखपालों को बाढ़ चौकियों में सतर्कता बनाए रखने के लिए कहा गया है। नाविकों के भुगतान के लिए बैंक खाता नंबर मांगे गए है जल्दी भुगतान करा दिया जाएगा। - देवेंद्र सिंह, एसडीएम भोगनीपुर
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यमुना नदी का जलस्तर दोपहर तीन बजे 105.80 मीटर दर्ज किया गया। मूसानगर में खतरे का निशान 107 मीटर पर है। पानी अभी स्थित है। -अनिल गुप्ता, मूसानगर स्थल प्रभारी केंद्रीय जल आयोग
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ठेकेदार ने नहीं दिया नदी गेज प्रभारियों को वेतन
मूसानगर गेज के स्थल प्रभारी अनिल कुमार गुप्ता ने बताया कि नदी जलस्तर की सतत निगरानी में लगे हैं। इसकी रिपोर्ट प्रशासन को मुहैया कराते हैं। मगर पिछले दो महीने से ठेकेदार ने वेतन नहीं दिया। जुहीखा, बेहमई, मगराया, बुलाकीपुरा, मंसूरपुर के स्थल प्रभारी को भी वेतन नहीं मिला हैं। केंद्रीय जल आयोग उपमंडल हमीरपुर के एसडीओ नितिन रामटेक ने बताया कि यह सभी आउटर्सोस कर्मचारी हैं। ठेकेदार को जल्द भुगतान कराने को कहा गया है।
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फोटो- 27 घसीट। संवाद
फोटो- 28 सुरेश। संवाद
फोटो-29 दीनदयाल। संवाद
फोटो-30 ओमकार। संवाद
लोगों ने बायां किया दर्द
हर वर्ष वह प्रशासन के आदेश से नाव चलाते हैं, लेकिन समय से पैसा नहीं मिलता है। बाढ़ में खुद की फसल भी बर्बाद हो चुकी है। नाव चलाने का पैसा मिले को गृहस्थी चला सके। - घसीट, नाविक पथार
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अगस्त में दो बार बाढ़ का सितम झेला है। अब सितंबर शुरुआत में ही बाढ़ आ गई। फिर से गृहस्थी बचाने की जद्दोजहद करनी पड़ रही है। अगस्त में आई बाढ़ से फसल बर्बाद हुई। फसल का सर्वे हुआ लेकिन मुआवजा अभी तक नहीं मिला है। - देवीगुलाम। पथार
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घर गांव के किनारे है। पिछली बार आई बाढ़ में घर की एक दिवार दरक गई थी। छत में रह कर बाढ़ के दिन काटे थे। अब तीसरी बार बाढ़ ती दहशत से घर खाली करना पड़ेगा यह सोच कर मन भारी है। - सुरेश, आढ़न पथार
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अगस्त में यमुना नदी का जलसतर दो बार बढ़ने से बाढ़ में पुलिया डूब गई थी। पहली बार पुलिया में आवागमन चालू ही हुआ था कि दूसरी बार पुलिया डूब गई थी। तीसरी बार में भी ऐसा ही हुआ है। बार बार की बाढ़ से जिंदगी पटरी पर नहीं आ पा रही। - ओमकार। पथार
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यमुना नदी का जलस्तर शनिवार शाम छह बजे मूसानगर गेज पर 106 मीटर पहुंच गया। यह खतरे के निशान से 1 मीटर नीचे है। यहां खतरे का निशान 107 मीटर है। वहीं कालपी गेज में नदी का जलस्तर 107.33 मीटर पर पहुंच गया। यहां जलस्तर खतरे के निशान से 0.67 मीटर नीचे है। एडीएम वित्त एवं राजस्व दुष्यंत कुमार व एसडीएम देवेंद्र सिंह ने शनिवार को प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया। बाढ़ चौकी प्रभारियों को आवश्यक निर्देश दिए। वहीं जिला स्तर पर बनाए गए नियंत्रण कक्ष का टोल फ्रीन नंबर 1077 जारी किया है।
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तीसरी बार यमुना की बाढ़ से आढ़न-पथार के किनारे पानी पहुंच गया है। इससे 13 गांवों की करीब 12 हजार की आबादी तीसरी बार बाढ़ की दुश्वारियां झेल रही है। आढ़न-पथार, पड़ाव, रसूलपुर, भुंडा, कुम्भापुर, नगीना बांगर, कट्टापुरवा, सूर्यपुर, बम्हरौली घाट, सिमरिया, अहरौली घाट का संपर्क सड़क मार्ग से टूट गया। बाढ़ का पानी बस्ती में आने की आशंका से लोग फिर से ऊंचे स्थानों की तलाश करने लगे हैं। लोगों का कहना है कि ऐसा पहली बार हुआ है जब बाढ़ ने तीसरी बार दस्तक दी है। पहले ही फसलें व चारा बर्बाद हो चुका है। किसी तरह गृहस्थी संभाली, फिर से मुसीबत सामने आ गई है।
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धौलपुर राजस्थान में नदी जलस्तर घटने लगा है। आढ़न पथार में दो नाव चलाई ला रही है। ग्रामीणों को नदी किनारे न जाने की सलाह दी गई है। लेखपालों को बाढ़ चौकियों में सतर्कता बनाए रखने के लिए कहा गया है। नाविकों के भुगतान के लिए बैंक खाता नंबर मांगे गए है जल्दी भुगतान करा दिया जाएगा। - देवेंद्र सिंह, एसडीएम भोगनीपुर
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यमुना नदी का जलस्तर दोपहर तीन बजे 105.80 मीटर दर्ज किया गया। मूसानगर में खतरे का निशान 107 मीटर पर है। पानी अभी स्थित है। -अनिल गुप्ता, मूसानगर स्थल प्रभारी केंद्रीय जल आयोग
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ठेकेदार ने नहीं दिया नदी गेज प्रभारियों को वेतन
मूसानगर गेज के स्थल प्रभारी अनिल कुमार गुप्ता ने बताया कि नदी जलस्तर की सतत निगरानी में लगे हैं। इसकी रिपोर्ट प्रशासन को मुहैया कराते हैं। मगर पिछले दो महीने से ठेकेदार ने वेतन नहीं दिया। जुहीखा, बेहमई, मगराया, बुलाकीपुरा, मंसूरपुर के स्थल प्रभारी को भी वेतन नहीं मिला हैं। केंद्रीय जल आयोग उपमंडल हमीरपुर के एसडीओ नितिन रामटेक ने बताया कि यह सभी आउटर्सोस कर्मचारी हैं। ठेकेदार को जल्द भुगतान कराने को कहा गया है।
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फोटो- 27 घसीट। संवाद
फोटो- 28 सुरेश। संवाद
फोटो-29 दीनदयाल। संवाद
फोटो-30 ओमकार। संवाद
लोगों ने बायां किया दर्द
हर वर्ष वह प्रशासन के आदेश से नाव चलाते हैं, लेकिन समय से पैसा नहीं मिलता है। बाढ़ में खुद की फसल भी बर्बाद हो चुकी है। नाव चलाने का पैसा मिले को गृहस्थी चला सके। - घसीट, नाविक पथार
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अगस्त में दो बार बाढ़ का सितम झेला है। अब सितंबर शुरुआत में ही बाढ़ आ गई। फिर से गृहस्थी बचाने की जद्दोजहद करनी पड़ रही है। अगस्त में आई बाढ़ से फसल बर्बाद हुई। फसल का सर्वे हुआ लेकिन मुआवजा अभी तक नहीं मिला है। - देवीगुलाम। पथार
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घर गांव के किनारे है। पिछली बार आई बाढ़ में घर की एक दिवार दरक गई थी। छत में रह कर बाढ़ के दिन काटे थे। अब तीसरी बार बाढ़ ती दहशत से घर खाली करना पड़ेगा यह सोच कर मन भारी है। - सुरेश, आढ़न पथार
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अगस्त में यमुना नदी का जलसतर दो बार बढ़ने से बाढ़ में पुलिया डूब गई थी। पहली बार पुलिया में आवागमन चालू ही हुआ था कि दूसरी बार पुलिया डूब गई थी। तीसरी बार में भी ऐसा ही हुआ है। बार बार की बाढ़ से जिंदगी पटरी पर नहीं आ पा रही। - ओमकार। पथार