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‘फ्लैक्सिबल इलेक्ट्रॉनिक्स’ का होगा भविष्य
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
Updated Sun, 14 Feb 2016 01:40 AM IST
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‘फ्लैक्सिबल इलेक्ट्रॉनिक्स’ देश की इंडस्ट्री को नए आयाम देगी। इसके लिए आईआईटी में छह मंजिला नेशनल सेंटर बनाया जा रहा है। उम्मीद है साल के अंत तक यह बिल्डिंग बनकर तैयार हो जाएगी।
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यह जानकारी शनिवार को निदेशक प्रोफेसर इंद्रनील मन्ना ने दी। ‘फ्लैक्सिबल इलेक्ट्रॉनिक्स’ क्षेत्र में आईआईटी कानपुर भारत सरकार के डिपार्टमेंट आफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इनफारमेशन टेक्नोलॉजी के साथ मिलकर काम कर रही है।
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समीक्षा बैठक में इसकी एनुअल रिपोर्ट पर चर्चा करते हुए प्रो. मन्ना ने बताया कि ‘फ्लैक्सिबल इलेक्ट्रॉनिक्स’ के तहत ओएलईडी लाइटिंग, आर्गेनिक सोलर सेल्स, प्रिंटेबल इंक, आर्गेनिक ट्रांसिटर, मेमोरी और सेंसर आदि की अंतरराष्ट्रीय इंडस्ट्री खड़ी करने के लिए काम किया जा रहा है।
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इसके लिए हांगकांग, नई दिल्ली, मुंबई, बंगलूरू, त्रिवेंद्रम, पुणे, गुजरात, बड़ौदा और राजस्थान की कई कंपनियों को जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि पहली जुलाई 2015 को इसका औपचारिक उद्घाटन प्रधानमंत्री ने किया था। कार्य योजना प्रधानमंत्री की ‘डिजाइन इन इंडिया’ पर आधारित है। इसके लिए 1.33 करोड़ रुपया मिला है।
मिनिस्ट्री आफ कम्युनिकेशनंस एंड इनफारमेशन टेक्नोलॉजी के एडीशनल सेक्रेटरी आईएएस डॉ. अजय कुमार बताया कि सेंटर में इंडस्ट्री और उससे जुड़े लोगों को ट्रेनिंग देने के लिए 50 एक्सपर्ट का स्टाफ भी होगा। इसके अलावा बीटेक और एमटेक करने वाले स्टूडेंटों को पीएचडी के लिए प्रेरित किया जाएगा।
आईटी सेक्टर में शोध के लिए 3000 नए स्टूडेंट पर सरकार ने अलग से फंडिंग की है। इसमें 30-40 स्टूडेंट आईआईटी कानपुर के भी हैं। उन्होंने जानकारी दी कि इस प्रोजेक्ट में सस्ती और टिकाऊ ‘ओएलईडी सरफेस लाइटिंग’ पर तेजी से काम शुरू हो गया है।
यह बिना होल्डर और बल्व वाली लाइटिंग होगी जो छत पर शीलिंग सीट की तरह लगाई जा सकेगी। इसे कागज से भी तैयार करने पर शोध चल रहा है। डॉ. मोनिका ने बताया कि विभिन्न इंडस्ट्री के साथ काम करने की पहल में फिलहाल पांच कंपनियों के साथ प्रोजेक्ट की तैयारी हो गई है। दो ने प्रोजेक्ट के सहमति पत्र साइन भी कर दिया है।
सेंटर में इन क्षेत्रों में होगा काम
ओएलईडी लाइटिंग, स्मार्ट टैक्स, ट्रांसमीशन, डाटा स्टोरेज, ब्रांडिंग एंड पब्लिकसिटी, मेडिकल डायग्नोस्टिक्स-प्रिंटेबल इंक एंड सेंसर फार डायग्नोस्टिक्स, सेंसर इंस्ट्रूमेंटेशन, फ्लैक्सिबल सेंसर फॉर नियोनेटल केयर, बायो मारकर्स फार कैंसर डायग्नोस्टिक्स, स्मार्ट कार्ड साल्यूशन, प्रिंटेड टैग फार पैकेजिंग इंडस्ट्री, सेंसर फार वाटर क्वालिटी एंड एयर पॉल्यूशन, सेंसर फार डिफेंस अप्लीकेशंस, बैटरीज।
पीएचडी स्कॉलर तैयार करने की पहल
डॉ. अजय ने बताया कि सरकार ने आईआईटी, एनआईटी और विश्वविद्यालयों सहित देश के 78 संस्थानों में पीएचडी के 1200 नए स्कॉलर तैयार करने की पहल की है। इनमें लगभग 47 स्टूडेंट आईआईटी के हैं। इसमें स्टूडेंट को लैब बनाने के लिए 50 फीसदी पैसा, उन्हें कॉफ्रेंस में जाने और शोध के लिए 35 हजार रुपये दिए जा रहे हैं।
इसके अलावा देश के 250 यंग स्कॉलर्स के लिए 25 हजार प्रति माह और पांच लाख रुपये सालाना देने की व्यवस्था शुरू की गई है। इनका चयन चेयरमैन कमेटी करती है।
फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के लिए 25 करोड़ मिला
प्रोफेसर मन्ना ने बताया कि भारत सरकार ने देश में रीजनल स्तर के इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी संस्थानों में फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम चलाने के लिए देश में सात संस्थानों का चयन किया है।
इनमें आईआईटी कानपुर भी शामिल है। इसके लिए 25 करोड़ का बजट मिला है। इसकी सहमति दिसंबर 2015 में हुई थी।