फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Five people face action in a Rs 23 lakh fraud case.

Kanpur News: 23 लाख के फर्जीवाड़े में पांच दोषियों पर लटकी कार्रवाई की तलवार

Wed, 05 Nov 2025 01:30 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 05 Nov 2025 01:30 AM IST
विज्ञापन
Five people face action in a Rs 23 lakh fraud case.
कानपुर। विकासखंड बिल्हौर की ग्राम पंचायत सैबसू में मनरेगा के कार्यों में किए गए 23 लाख रुपये के भुगतान की जांच में एक के बाद एक बड़े खुलासे हो रहे हैं। एपीओ प्रीति अग्निहोत्री और प्रमोद कुमार की मॉनीटरिंग के बाद भी बीडीओ का डोंगल लगाकर फर्जी तरीके से भुगतान कर दिया गया। मनरेगा के कार्यों में ब्लाक स्तर से इन्हीं लोगों की जिम्मेदारी मुख्य होती है।
विज्ञापन

प्रधान ने जांच टीम को खेतों और नहरों के रास्ते से ले जाकर काम दिखाया फिर भी अपने कामों को दिखा नहीं पाए। परियोजना निदेशक आलोक सिंह ने इस फर्जीवाड़े के लिए प्रधान, दो सचिव, तकनीकी सहायक और एपीओ को दोषी माना है। इनके खिलाफ कार्रवाई करने की तैयारी शुरू कर दी है।
विज्ञापन


सैबसू ग्राम पंचायत में मनरेगा कार्यों की लोकपाल के बाद परियोजना निदेशक समेत तीन सदस्यीय टीम तकनीकी जांच करने पहुंची थी। इसमें पाया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में ग्राम पंचायत में मनरेगा के तहत कागजों में 17 विकास कार्य दिखाए गए लेकिन धरातल पर पूरे काम नहीं मिले। प्रधान और सचिव जांच टीम को तीन घंटे तक ऐसे रास्तों पर ले गए जहां पर बड़ी-बड़ी घास खड़ी थी। इसे दिखाकर बता रहे थे कि यहां पर काम कराया गया लेकिन हकीकत में कुछ दिख ही नहीं रहा था। इसके बाद गांव पहुंचकर मजदूरों से पूछताछ की तो पता चला कि प्रधान और उनके सहयोगी आधार कार्ड और बैंक पासबुक लेकर जाते हैं। उनके खाते में कभी धनराशि नहीं भेजी गई। प्रधान और सचिव ने 990 मजदूरों की फर्जी हाजिरी लगाई। इनकी फोटो खींचकर ऑनलाइन पोर्टल पर फीड भी की। मजदूरों का फर्जी तरीके से मस्टर रोल लगाकर बीडीओ के डोंगल से एपीओ ने मजदूरी के नाम का करीब 18.30 लाख का भुगतान कर दिया। वहीं गांव में जिन कामों को दिखाया गया उनकी गुणवत्ता और निरीक्षण की फर्जी मेजरमेंट बुक (एमबी) तकनीकी सहायक ने बना दी। सचिव और प्रधान ने करीब 4.59 लाख रुपये पक्के काम के नाम पर निकाले। परियोजना अधिकारी आलोक कुमार, अधिशासी अभियंता आरईडी, सहायक अभियंता लघु सिंचाई की टीम ने दो वर्ष के कार्यों की जांच में प्रधान विमलेश मिश्रा, सचिव रोहन कनौजिया, शिवपाल, तकनीकी सहायक प्रमोद कुमार दोषी मिले हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

इनकी होती मुख्य जिम्मेदारी
ग्राम पंचायत स्तर पर मनरेगा के जो भी कार्य कराए जाते हैं इनकी निगरानी करने की जिम्मेदारी ब्लाक स्तर पर तैनात एपीओ की होती है। मनरेगा मजदूरों की उपस्थिति दर्ज कराने के लिए उनकी फोटो खींचकर ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड की जाती है। उनकी गिनती करना और मस्टर रोल तैयार कर फीड करने की जिम्मेदारी भी एपीओ की होती है। मस्टर रोल के अनुसार मजदूरों का भुगतान होता है। इसके साथ जो भी कच्चे और पक्के कार्य होते हैं उनकी लंबाई, चौड़ाई, गुणवत्ता की जांच कर तकनीकी सहायक करता है। यहां पर दोनों की मिलीभगत के बाद प्रधान और सचिव ने ग्राम पंचायत के खाते से लाखों रुपये का फर्जीवाड़ा किया।


वर्जन-

जिसके कार्यकाल में काम कराया गया है वे सभी दोषी हैं। पूर्व सचिव से लेकर वर्तमान सचिव के समय की जांच हुई। एपीओ और तकनीकी सहायक ने मौके पर क्या सत्यापन किया, इसके लिए सभी की जवाबदेही तय होगी। दोषियों पर जल्द कार्रवाई होगी।
आलोक कुमार सिंह, परियोजना निदेशक
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed