Kanpur: पीयूष के पिता-पत्नी समेत पांच को मिली सुप्रीम राहत, कोर्ट ने उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर लगाई रोक
Kanpur News: इत्र कारोबारी पीयूष जैन के घर से 197 करोड़ रुपये की बरामदगी के मामले मे पीयूष के पिता-पत्नी समेत पांच को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। कोर्ट ने उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक लगाई और समन या वारंट नहीं जारी होगा।
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कानपुर में इत्र कारोबारी पीयूष जैन और अन्य के खिलाफ दर्ज जीएसटी चोरी के मुकदमे में आरोपी बनाए गए पिता, पत्नी, भाई व भाभी समेत पांच आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है। इनके खिलाफ किसी उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर कोर्ट ने रोक लगा दी है। वहीं, अभियोजन ने स्पेशल सीजेएम कोर्ट में बाकी आठ आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करने के साथ ही पीयूष की फाइल अलग कर मुकदमे में गवाही शुरू करने की मांग की है।
इत्र कारोबारी पीयूष जैन के घर व फर्म से डायरेक्टर जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलीजेंस अहमदाबाद की टीम ने दिसंबर 2021 में छापेमारी कर 197 करोड़ रुपये व 23 किलो सोना बरामद किया था। रुपये बरामदगी के मामले में जीएसटी चोरी और सोना बरामदगी के मामले में कस्टम एक्ट के तहत दो मुकदमे दर्ज किए गए थे। पिछले दिनों कस्टम एक्ट के मुकदमे में पीयूष को बरी कर दिया गया है। जीएसटी चोरी के मुकदमे में पीयूष के अलावा 13 अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया था, जिनको कोर्ट ने तलब किया था।
पांचों आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई पर लगाई है रोक
विशेष लोक अभियोजक अम्ब्रीष टंडन ने बताया कि पीयूष के पिता महेश चंद्र जैन, पत्नी कल्पना जैन, भाई अम्बरीश जैन व भाभी विजय लक्ष्मी के साथ ही बंबई के आरोपी सुनील ए हिरानी की ओर से स्पेशल सीजेएम कोर्ट में सुनवाई के दौरान शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट का आदेश दाखिल किया गया, जिसमें पांचों आरोपियों के खिलाफ किसी तरह की उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक लगाई गई है। अब इनके खिलाफ कोई समन या वारंट कोर्ट जारी नहीं करेगी।
कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है
अभियोजन की ओर से बाकी आरोपियों के खिलाफ वारंट जारी करने के लिए अर्जी दी गई थी। इसके अलावा कोर्ट में तर्क रखा गया कि पीयूष को हाईकोर्ट ने सशर्त जमानत दी है। वह कोर्ट में हाजिर है जबकि बाकी आरोपी हाजिर नहीं हो रहे हैं। पीयूष को 11445 पेज की चार्जशीट की कॉपी भी सौंपी जा चुकी है। ऐसे में पीयूष की फाइल अलग कर गवाही शुरू करा दी जाए, जिससे जल्द से जल्द मुकदमे का निस्तारण हो सके। कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।