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सादे कागज पर पांच दिन का बिल 90 हजार
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कानपुर देहात। प्राइवेट कोविड अस्पतालों में मनमानी वसूली हो रही है। उसका कंप्यूटराज्ड बिल भी नहीं दिया जा रहा है। एक पीड़ित को पांच दिन का 90 हजार रुपये का बिल सादे कागज पर थमा दिया।
इसके अलावा कोविड अस्पतालों के बाहर शासन की रेट लिस्ट का बैनर नहीं लगाया जा रहा है। न ही पालन किया जा रहा है। इससे मरीज और तीमारदार परेशान हो रहे हैं।
प्राइवेट अस्पतालों को कोविड का इलाज करने के लिए सीएमओ की तरफ से चिह्नित किया गया है। इन अस्पतालों में मनमानी वसूली की शिकायतों को देखते हुए शासन की तरफ से रेट जारी कर दिए गए हैं। रेट लिस्ट अस्पताल के बाहर फ्लैक्सी बैनर में लगाने हैं।
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इसके बाद भी नर्सिंग होम संचालक नहीं लगा रहे हैं। वहीं, पहले की तरह ही वसूली की जा रही है। शाहजहांपुर के अवधेश तिवारी को पांच दिन पहले बुखार आने पर अकबरपुर में ओवरब्रिज के पास स्थित एक कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया।
पांच दिन बाद उन्हें आराम मिला तो परिजनों ने डिस्चार्ज कराने के लिए कहा। इस पर अस्पताल संचालक ने सादे कागज में 90 हजार का बिल बनाकर दिया। इसमें जनरल बेड का चार्ज 25 सौ रुपये प्रतिदिन के हिसाब से लगाया, जबकि शासन की तरफ से 18 सौ रुपये निर्धारित है।
वहीं, निमोलाइजर (भाप देने का) चार्ज पांच सौ रुपये प्रतिदिन लगाया गया है। 34500 रुपये आक्सीजन के वसूले। सादे कागज पर ही बिल अदा करने पर पेड की मुहर लगाकर पकड़ा दिया गया।
निर्धारित शुल्क के ज्यादा रुपये लेना गलत है। प्राइवेट अस्पतालों को रेट बोर्ड लगाने के सख्त निर्देश हैं। मरीज से ज्यादा बिल लेने की जानकारी कराई जाएगी। जांच कर कार्रवाई होगी। - डॉ. यतेंद्र शर्मा (जिला संक्रामक रोग प्रभारी)
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इसके अलावा कोविड अस्पतालों के बाहर शासन की रेट लिस्ट का बैनर नहीं लगाया जा रहा है। न ही पालन किया जा रहा है। इससे मरीज और तीमारदार परेशान हो रहे हैं।
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प्राइवेट अस्पतालों को कोविड का इलाज करने के लिए सीएमओ की तरफ से चिह्नित किया गया है। इन अस्पतालों में मनमानी वसूली की शिकायतों को देखते हुए शासन की तरफ से रेट जारी कर दिए गए हैं। रेट लिस्ट अस्पताल के बाहर फ्लैक्सी बैनर में लगाने हैं।
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इसके बाद भी नर्सिंग होम संचालक नहीं लगा रहे हैं। वहीं, पहले की तरह ही वसूली की जा रही है। शाहजहांपुर के अवधेश तिवारी को पांच दिन पहले बुखार आने पर अकबरपुर में ओवरब्रिज के पास स्थित एक कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया।
पांच दिन बाद उन्हें आराम मिला तो परिजनों ने डिस्चार्ज कराने के लिए कहा। इस पर अस्पताल संचालक ने सादे कागज में 90 हजार का बिल बनाकर दिया। इसमें जनरल बेड का चार्ज 25 सौ रुपये प्रतिदिन के हिसाब से लगाया, जबकि शासन की तरफ से 18 सौ रुपये निर्धारित है।
वहीं, निमोलाइजर (भाप देने का) चार्ज पांच सौ रुपये प्रतिदिन लगाया गया है। 34500 रुपये आक्सीजन के वसूले। सादे कागज पर ही बिल अदा करने पर पेड की मुहर लगाकर पकड़ा दिया गया।
निर्धारित शुल्क के ज्यादा रुपये लेना गलत है। प्राइवेट अस्पतालों को रेट बोर्ड लगाने के सख्त निर्देश हैं। मरीज से ज्यादा बिल लेने की जानकारी कराई जाएगी। जांच कर कार्रवाई होगी। - डॉ. यतेंद्र शर्मा (जिला संक्रामक रोग प्रभारी)