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जब आई उंगली में स्याही की बारी, बैंकों के बाहर भीड़ हुई आधी
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Wed, 16 Nov 2016 06:54 PM IST
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बुधवार को बैंकों के बाहर दोपहर होते ही कम होने लगी थी भीड़
- फोटो : अमर उजाला
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एक हफ्ते से नोटों के लिए हाहाकार मचा है। अमिट स्याही लगाने के निर्देश के बाद बुधवार को बैंकों के बाहर लगने वाली कतारें सिमट गईं।
कानपुर और आसपास के तमाम जिलों-उन्नाव, फर्रुखाबाद, कन्नौज, हमीरपुर, महोबा, इटावा, औरैया की बैकों के बाहर लंबी कतारें दिखीं लेकिन ये लाइनें दिन चढ़ने के साथ कम होती चली गईं। आरबीआई से उन्नाव की बैंकों को जारी किया गया एक अरब रुपया नाकाफी साबित हो रहा है। बुधवार को भी करेंसी की समस्या लोगों के लिए मुसीबत बनी रही। शहर की कई बैंक शाखाओं में दोपहर के एक बजे तक नोट बदलने के साथ ही खाते से नगदी निकालने का काम करेंसी न होने से लगभग ठप रहा। साथ ही स्याही के डर से भीड़ पिछले दिनों की अपेक्षा काफी कम रही।
बड़े नोटों को बदलने व नगदी निकासी के लिए अफरा तफरी है। भीड़ को काबू में करने के लिए पहले सरकार ने एक आईडी पर एक बार नोट बदलने की छूट दी। इससे भीड़ की मारामारी थमी नहीं। मंगलवार की शाम आरबीआई ने नोट बदलने वाले व्यक्ति की अंगुली पर मतदान के समय लगाई जाने वाली अमिट स्याही लगाने का आदेश बैंकों को दिया। इसका असर भी बैंकों में दिखा। बुधवार को स्याही भले ही कई बैंकों में नहीं पहुंची लेकिन नोट बदल चुके लोग दोबारा बैंक जाने से कतराते नजर आए। वहीं बुधवार को भी जिले की कई बैंकें, करेंसी की किल्लत से जूझती रहीं। सुबह बैंक से नोट बदलने व कैश निकालने पहुंचे लोगों को घंटों इंतजार के बाद भी खाली हाथ लौटना पड़ा। दोपहर बाद करीब तीन बजे तक शहर की अधिकांश बैंकों में भीड़ छट गई। भीड़ कम होने से बैंक कर्मियों ने भी राहत की सांस ली।
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कानपुर और आसपास के तमाम जिलों-उन्नाव, फर्रुखाबाद, कन्नौज, हमीरपुर, महोबा, इटावा, औरैया की बैकों के बाहर लंबी कतारें दिखीं लेकिन ये लाइनें दिन चढ़ने के साथ कम होती चली गईं। आरबीआई से उन्नाव की बैंकों को जारी किया गया एक अरब रुपया नाकाफी साबित हो रहा है। बुधवार को भी करेंसी की समस्या लोगों के लिए मुसीबत बनी रही। शहर की कई बैंक शाखाओं में दोपहर के एक बजे तक नोट बदलने के साथ ही खाते से नगदी निकालने का काम करेंसी न होने से लगभग ठप रहा। साथ ही स्याही के डर से भीड़ पिछले दिनों की अपेक्षा काफी कम रही।
बड़े नोटों को बदलने व नगदी निकासी के लिए अफरा तफरी है। भीड़ को काबू में करने के लिए पहले सरकार ने एक आईडी पर एक बार नोट बदलने की छूट दी। इससे भीड़ की मारामारी थमी नहीं। मंगलवार की शाम आरबीआई ने नोट बदलने वाले व्यक्ति की अंगुली पर मतदान के समय लगाई जाने वाली अमिट स्याही लगाने का आदेश बैंकों को दिया। इसका असर भी बैंकों में दिखा। बुधवार को स्याही भले ही कई बैंकों में नहीं पहुंची लेकिन नोट बदल चुके लोग दोबारा बैंक जाने से कतराते नजर आए। वहीं बुधवार को भी जिले की कई बैंकें, करेंसी की किल्लत से जूझती रहीं। सुबह बैंक से नोट बदलने व कैश निकालने पहुंचे लोगों को घंटों इंतजार के बाद भी खाली हाथ लौटना पड़ा। दोपहर बाद करीब तीन बजे तक शहर की अधिकांश बैंकों में भीड़ छट गई। भीड़ कम होने से बैंक कर्मियों ने भी राहत की सांस ली।
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