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UP: पिता ने मांगी मौत...डॉक्टरों ने दिया नया जीवन, कहा- बिटिया के लिए भगवान बन गईं डॉक्टर, पढ़ें पूरा मामला

Sat, 24 Feb 2024 12:16 PM IST
हिमांशु अवस्थी प्रसून शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
प्रसून शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sat, 24 Feb 2024 12:16 PM IST
सार

Kanpur News: हैलट के स्त्री एवं प्रसूति विभाग की डॉक्टरों ने यूट्रेस कैंसर पीड़ित युवती की सफल सर्जरी की है। यह बेहद मुश्किल ऑपरेशन था, क्योंकि मरीज की दोनों किडनी भी खराब थीं।

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Father asked for deat doctors gave new life, said Doctor became God for daughter
बेटी को जूस पिलाता पिता और डॉक्टरों की टीम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बेटी को यूट्रेस कैंसर हो गया था। दोनों किडनी भी खराब थीं। तीन साल से दिल्ली के एम्स से लेकर लखनऊ के नामीगिरामी अस्पतालों तक दौड़ा पर सबने ऑपरेशन के लिए मना कर दिया था। बिटिया को दर्द के इंजेक्शन देने पड़ते थे। एक समय ऐसा आया कि इंजेक्शन भी बेअसर हो गए। बिटिया की स्थितियां इतनी दयनीय हो गईं कि कलेजे पर पत्थर रखकर मैं डॉक्टरों से कहने लगा कि उसे मौत का इंजेक्शन लगा दें।

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उसे इस असहनीय दर्द से उसे मुक्ति मिल सके। हैलट पहुंचा, तो यहां की डॉक्टर बिटिया के लिए भगवान बन गईं। उन्होंने सर्जरी की, तो बिटिया स्वस्थ हो गई। यह कहते-कहते जूही निवासी पिता की आंखें भर आईं। पिता ने बताया कि तीन साल पहले 23 साल की बेटी को पेट में दर्द हुआ था। उसे लखनऊ के फातिमा अस्पताल में भर्ती कराया।

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एमआरआई में यूट्रेस में तीन किलो के ट्यूमर का पता चला था, तो ऑपरेशन कर उसे बाहर निकाला गया।  कुछ दिन बाद उसके बिटिया के पेट में फिर दर्द हुआ तो राम मनोहर लोहिया अस्पताल में बच्चेदानी में गांठ का पता चला।  इसके बाद में पता चला कि गांठ कैंसर की है, तो पीजीआई में दिखाया। वहां पर बच्चेदानी कमजोर होने की बात कहकर डॉक्टरों ने ऑपरेशन से मना कर दिया।

बेटी को ओटी से निकाल दिया, कहा- इसकी सर्जरी हो नहीं सकती
इसके बाद एक निजी अस्पताल में किसी तरह तीन बार डायलिसिस कराई पर दर्द बढ़ता चला गया। उसे दर्द से छटपटाता देख खुद उसे मैं दर्द के इंजेक्शन देता था। कानपुर में एक निजी अस्पताल ने ऑपरेशन थियेटर से बेटी को यह कहकर निकाल दिया कि इसकी सर्जरी हो नहीं सकती। इसके बाद हैलट के स्त्री एवं प्रसूति विभाग की डॉ. पाविका लाल को समस्या बताई, तो वह सर्जरी के लिए तैयार हो गईं। सर्जरी के बाद अब बिटिया बिल्कुल सही है।

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युवती की दोनों किडनी खराब थीं। सीरम, क्रेटनिन बहुत बढ़ गया था। कैंसर का संक्रमण आंतों तक पहुंच गया था। मरीज की स्थिति काफी नाजुक थी, ऐसे में सर्जरी काफी कठिन थी। उसका ऑपरेशन तीन घंटे चला। सर्जरी के बाद उसे आईसीयू में चार दिन रखा गया और 20 दिन बाद हालत में सुधार होने पर डिस्चार्ज कर दिया गया। यह अपनी तरह की रेयर टाइप कैंसर सर्जरी थी।  -डॉ. पाविका

युवती को एक जनवरी को भर्ती किया गया था। फरवरी की शुरुआत में उसकी सफल सर्जरी की गई थी। डॉ. पाविका, डॉ. गरिमा, डॉ. रश्मि के साथ यूरो सर्जन डॉ. विनय की टीम ने ऑपरेशन को सफल बनाया है। 21 जुलाई 2022 को कैंसर की ओपीडी शुरू हुई थी। अभी तक 170 महिलाओं की कैंसर सर्जरी हो चुकी है।  -डॉ. नीना गुप्ता, स्त्री प्रसूति विभागाध्यक्ष

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