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Farrukhabad Flood: बाढ़ से हालात गंभीर..जिले में चार की मौत, नरौरा बैराज से 1.68 लाख क्यूसेक पानी कम छोड़ा गया

Mon, 21 Aug 2023 02:20 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Mon, 21 Aug 2023 02:20 PM IST
सार

Farrukhabad News: एक माह से खतरे के निशान से ऊपर बह रही गंगा में रविवार को नरौरा बैराज से छोड़े जा रहे पानी में 1.68 लाख क्यूसेक की कमी आई है। इससे जलस्तर में कुछ गिरावट की उम्मीद बंध गई है।

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Farrukhabad Flood, Four died in the district, 1.68 lakh cusecs less water was released from Narora barrage
फर्रुखाबाद में बाढ़ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

फर्रुखाबाद में पहाड़ों पर हुई मूसलाधार बारिश ने जिले की जनता को मुसीबत में डाल दिया। एक जुलाई से गंगा में जलस्तर का बढ़ना शुरू हुआ, तो मीटर कम नहीं हुआ। शनिवार शाम इस सीजन का रिकार्ड 3,50,041 क्यूसेक पानी छोड़ने के बाद रविवार सुबह नरौरा बैराज से 2,57,146 और शाम को 1,81,902 क्यूसेक पानी कर दिया गया।

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हालांकि गंगा तीसरे दिन भी खतरे के निशान से 30 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। मीटर 137.40 मीटर पर ही बना हुआ है। इससे अमृतपुर तहसील क्षेत्र के करीब 130 से अधिक गांव में बाढ़ का पानी भर गया है। 100 से अधिक स्कूलों पर ताले पड़े हैं। गांवों में बाढ़ के पानी से हालात खराब बने हुए हैं। चार लोगों की जान बाढ़ के पानी में डूबने से रविवार को चली गई है।
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नरौरा बैराज से 1.68 लाख क्यूसेक पानी कम छोड़ा गया
एक माह से खतरे के निशान से ऊपर बह रही गंगा में रविवार को नरौरा बैराज से छोड़े जा रहे पानी में 1.68 लाख क्यूसेक की कमी आई है। इससे जलस्तर में कुछ गिरावट की उम्मीद बंध गई है। पांचाल घाट पुल पर गंगा तीसरे दिन खतरे के निशान से 30 सेमी ऊपर बह रही हैं। हालांकि रामगंगा के जलस्तर में कुछ कमी आई है। इससे किनारे बसे गांवों में कटान तेज होने से ग्रामीणों में दहशत है।

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कुछ दिनों में बंधी है राहत की उम्मीद
पहाड़ों पर हुई मूसलाधार बारिश ने जिले की जनता को मुसीबत में डाल दिया। एक जुलाई से गंगा में जलस्तर का बढ़ना शुरू हुआ, तो पांचाल घाट पर मीटर कम नहीं हुआ। शनिवार शाम इस सीजन का रिकार्ड 3,50,041 क्यूसेक पानी छोड़ने के बाद रविवार सुबह नरौरा बैराज से 2,57,146 और शाम को 1,81,902 क्यूसेक पानी कर दिया गया। 24 घंटे में ही 1,68,139 क्यूसेक पानी की कमी आने से कुछ दिनों में राहत की उम्मीद बंधी है।

छात्र-छात्राओं की पढ़ाई चौपट
हालांकि गंगा तीसरे दिन भी खतरे के निशान से 30 सेमी ऊपर बह रही हैं। मीटर 137.40 मीटर पर ही बना हुआ है। 20 जुलाई को गंगा खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गई थीं। इससे तहसील क्षेत्र के करीब 130 से अधिक गांव में बाढ़ का पानी भर गया। 100 से अधिक स्कूलों में ताले पड़े हैं। छात्र-छात्राओं की पढ़ाई चौपट हो गई है। गांवों में न तो रोशनी की व्यवस्था है और न ही आने-जाने के साधन।

रामगंगा नदी का लगातार कम हो रहा है जलस्तर
गांवों में बाढ़ के पानी से हालात खराब बने हुए हैं। क्षेत्र के बमियारी, अमीराबाद, जोगराजपुर, हमीरपुर सोमवंशी, हरसिंहपुर कायस्थ, रामपुर, जगतपुर, कुड़री सारंगपुर, करनपुर घाट, फखरपुर, मंझा आदि गांव के रास्ते बंद होने से खाद्य सामग्री आने-जाने में दिक्कत है। रामगंगा नदी का जलस्तर लगातार कम हो रहा है। रविवार को 136.60 मीटर से घट कर 136.55 मीटर पर पहुंच गया है। खो, हरेली, रामनगर बैराज से 10,602 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।

ऊंचाई वाले गांवों के फीडर चलाकर दी जा रही है आपूर्ति
अधिशासी अभियंता ग्रामीण सुरेंद्र कुमार गौतम ने बताया कि अमृतपुर क्षेत्र में चार बिजली घरों से बिजली आपूर्ति की जाती है। राजेपुर बिजलीघर में पानी भरा है। इसके अलावा अधिकांश उपकेंद्रों की लाइनें जलभराव से घिरी हैं। करंट फैलने की आशंका को देखते हुए ऊंचाई वाले गांवों के फीडर चलाकर आपूर्ति दी जा रही है। फिलहाल 85 फीसदी गांवों की बिजली बंद है।

छह हजार लीटर कैरोसिन देने की लिखित मांग
बाढ़ से घिरे गांवों में रोशनी के लिए तहसीलदार कर्मवीर सिंह ने 18 जुलाई को जिला प्रशासन से छह हजार लीटर कैरोसिन देने की लिखित मांग की थी। इसके बाद अभी तक कैरोसिन उपलब्ध नहीं कराया गया। इससे बाढ़ पीडि़त ग्रामीणों को राहत नहीं मिल पा रही है। कमालगंज में जंजालीनगला में बाढ़ परियोजना की लगीं बोरियों के दोनों ओर बाढ़ का पानी भर गया है। परियोजना की बालू भरी बोरियों को लोगों ने पुल के रूप में उपयोग शुरू कर दिया है।

गांव को बचाने के लिए लगा रहे हैं बालू भरी बोरियां
वहीं चाचूपुर में सड़क कटी होने से बंद हुए रास्ते के चलते लोग परेशान हैं। पिछले साल कटान के बाद जंजालीनगला में करीब 20 प्रतिशत ही मकान बचे थे। इस समय चारों ओर पानी है। बाढ़ परियोजना के कर्मचारी शेष बचे गांव को बचाने के लिए लगातार बालू भरी बोरियां लगा रहे हैं। बोरियों के दोनों ओर पानी है। लोग बोरियों के ऊपर पैर रखते हुए निकल रहे। हालांकि खतरा बना हुआ है।

नाव से आ-जा रहे हैं लोग
वहीं चाचूपुर पूरी तरह टापू बन गया है। नाव से लोग आ-जा रहे हैं। बच्चे भी स्कूल के लिए नाव का सहारा ले रहे हैं। लेखपाल अमित प्रताप सिंह का कहना है कि नाव चलाने वाले ग्रामीण वेदराम को बाढ़ खत्म होने पर सरकारी दर पर भुगतान किया जाएगा। वेदराम ने 13 हजार में नई नाव ली है। राजकुमार, अवनीश, देवेश नाव चलाने में मदद कर रहे हैं। चाचूपुर की 40 मीटर सड़क कट चुकी है। इसी स्थान से गंगा के पानी की धार दूसरी ओर गिर रही है। कुछ लोग जलजीवन मिशन की पाइप लाइन का सहारा लेकर निकल रहे।

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