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फर्रुखाबाद: बिजली विभाग का गजब कारनामा, कागजों में दौड़ी बिजली, 12 साल में बिल 12 लाख, एक्सीएन बोले- कराएंगे जा

Sun, 04 Oct 2026 08:30 AM IST
Himanshu Awasthi सुबोध दुबे, अमर उजाला, फर्रुखाबाद
सुबोध दुबे, अमर उजाला, फर्रुखाबाद Published by: Himanshu Awasthi Updated Sun, 04 Oct 2026 08:30 AM IST
सार

Farrukhabad News: मोहम्मदाबाद स्थित राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बिहार में बिजली विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। विद्यालय को संचालित हुए 12 वर्ष बीत चुके हैं और महज 50 मीटर दूर पोल होने के बावजूद केबल डालकर बिजली आपूर्ति शुरू नहीं की गई। इसके बावजूद विभाग ने कागजों पर 7.5 किलोवाट का कनेक्शन दिखाकर 12.61 लाख रुपये का भारी-भरकम बिल भेज दिया। 

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Farrukhabad Electricity Department electricity exists only on paper yet bill has reached 12 lakh over 12 years
आईसीटी लैब में ढके रखे कंप्यूटर - फोटो : amar ujala

विस्तार

फर्रुखाबाद जिले में राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बिहार को संचालित हुए 12 वर्ष बीत गए। अभी वहां बिजली नहीं पहुंच सकी है, जबकि विद्यालय से 50 मीटर की दूरी पर बिजली का पोल है। हालांकि, बिजली विभाग ने 12.61 लाख रुपये का बिल भेज दिया है। प्रधानाध्यापक के आपत्ति करने पर दो बार संशोधित किए जाने के बाद अब बिल 1.60 लाख रुपये का रह गया है।

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बिजली का कनेक्शन न होने से आईसीटी लैब में कंप्यूटर पर कवर पड़े हुए हैं। भीषण गर्मी में भी यहां लगे पंखे चल पाते हैं। विद्यालय भवन के निर्माण के साथ कार्यदायी संस्था सीएंडडीएस ने चार किलोवाट के बिजली के कनेक्शन के लिए 10 दिसंबर 2014 को आवेदन किया था। बिजली विभाग ने कागजों पर विद्यालय को दस फरवरी 2015 को साढ़े सात किलोवॉट का कनेक्शन भी दे दिया।

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बिजली चालू करने की जहमत नहीं उठाई
सीएंडडीएस ने इसके 15,559 रुपये सात अप्रैल 2015 को बिजली विभाग में चेक के माध्यम से जमा कर दिए। पर बिजली विभाग के जिम्मेदारों ने पोल से विद्यालय तक केबल डालकर बिजली चालू करने की जहमत नहीं उठाई। शिक्षा विभाग को जानकारी नहीं है कि उनके विद्यालय में कनेक्शन हो चुका है। डीआईओएस ने 24 अक्तूबर 2016 को अधिशासी अभियंता ग्रामीण को कनेक्शन के लिए एस्टीमेट बनाने को पत्र लिखा।

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Farrukhabad Electricity Department electricity exists only on paper yet bill has reached 12 lakh over 12 years
हैंडपंप में सबमर्सिबल पंप की लगी केबल - फोटो : amar ujala

दिसंबर 2016 को 41,529 रुपये का बिल भेज दिया
इसके जवाब में अधिशासी अभियंता ग्रामीण ने 66,191 रुपये एस्टीमेट बनाकर डीआईओएस को भेज दिया। इसके बाद बिजली विभाग जाग गया और उसने विद्यालय को आठ दिसंबर 2016 को 41,529 रुपये का बिल भेज दिया। यह देख विद्यालय के प्रधानाध्यापक के साथ कर्मचारी भी दंग रह गए। इसके बाद तत्कालीन प्रधानाध्यापक ने 16 दिसंबर 2016 को अधिशासी अभियंता को पत्र लिखा।

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बिल संशोधित कर 5,88,512 रुपये का कर दिया
इसमें उन 17 पत्रों का भी उल्लेख किया, जो पूर्व में उनके विद्यालय से कनेक्शन के संदर्भ में अधिशासी अभियंता गए को भेजे गए थे। इसके बाद भी कनेक्शन न होने पर वर्तमान में इंचार्ज प्रधानाध्यापक ने पत्राचार जारी रखा और साथ ही विद्यालय पहुंचने वाले बिलों को अधिशासी अभियंता को रजिस्टर्ड डाक से वापस भेजते रहे। इस बीच बिजली विभाग ने 22 अक्तूबर 2022 को बिल संशोधित कर 5,88,512 रुपये का कर दिया।

बिजली इस्तेमाल ही नहीं हुई, तो बिल कैसे अदा करें
प्रधानाध्यापक ने कहा कि जब हमने बिजली इस्तेमाल ही नहीं की तो बिल क्यों। इस पर बिजली विभाग ने बिल संशोधित कर 1,60,491 रुपये का बिल थमा दिया और कहा कि सिर्फ मिनिमम चार्ज ही लिया जा रहा है। इंचार्ज प्रधानाध्यापक हर्ष कुमार ने बताया कि जब विद्यालय में बिजली इस्तेमाल ही नहीं हुई, तो बिल कैसे अदा कर किया जाए। विभाग ने अभी तक उनके विद्यालय में कनेक्शन ही नहीं दिया है। वह 19 सितंबर को अधिशासी अभियंता ग्रामीण से मिले थे और उन्हें पूरे मामले की जानकारी भी दी थी।

कनेक्शन के लिए आवेदन किया होगा तभी बिल पहुंचा। यह जांच का विषय है कि बिजली वहां चालू हुई या नहीं। फिलहाल यह मामला संज्ञान में नहीं आया है। अब पता चला है, तो जांच कराएंगे।  -सुशील कुमार, अधिशासी अभियंता ग्रामीण
 

उपखंड में एक वर्ष से तैनात हैं। इस मामले की कोई भी जानकारी नहीं है फिर भी जेई से जानकारी करेंगे।  -अरुण कुमार गुप्ता, एसडीओ, नीबकरोरी उपकेंद्र

 
 
एक वर्ष पूर्व मामले की जांच कराई गई थी तब उन्होंने जांच कर आख्या उच्चाधिकारियों को भेज दी थी। अब वहां कनेक्शन की क्या स्थिति है इसकी जानकारी नहीं है।  -शशिकांत, जेई नीबकरोरी उपकेंद्र
 
 
 
लैब में लगे 11 कंप्यूटर ढके हैं कवर से, नहीं भर पाती पानी की टंकी
विद्यालय में कक्षा 9 और 10 की कक्षाएं संचालित होती हैं। इसमें कुल 106 छात्र पंजीकृत हैं। कक्षा 9 के 49 और कक्षा 10 के 57 बच्चे हैं। इनकी बेहतर शिक्षा के लिए इन्फॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी (आईसीटी) लैब स्थापित है। इसमें 11 कंप्यूटर के साथ दो स्मार्ट बोर्ड लगे हैं। चार कक्षाएं हैं। सभी में चार-चार पंखे लटके हैं। पानी के लिए सबमर्सिबल पंप हैंडपंप में लगी है। शौचालय की छत पर टंकी रखी है।
 
 
कंप्यूटर भी बिना बिजली बेकार हैं
लेकिन बिजली न होने से सब बेकार हैं। बच्चों को शुद्ध पानी मिले के इसके लिए लगा आरओ भी काम नहीं आ रहा है। भीषण गर्मी में अध्यापक परेशान होकर पेड़ के नीचे कक्षाएं लगाने का मजबूर हैं। सहायक अध्यापिका पूजा ने बताया कि लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व कंप्यूटर भेजे गए थे। ये कंप्यूटर भी बिना बिजली बेकार हैं। छात्र कंप्यूटर शिक्षा से वंचित हैं, जबकि विद्यालय से 50 मीटर की दूरी पर एलटी लाइन का पोल खड़ा है।

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