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Farrukhabad: पुलिस को बंधक बना असलहा लूटने में 10 पर दोष साबित, 18 पर दर्ज हुई थी रिपोर्ट…आठ की हो चुकी है मौत

Fri, 21 Nov 2025 08:49 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Fri, 21 Nov 2025 08:49 PM IST
सार

Farrukhabad News: 1992 में पुलिसकर्मियों पर हमले और हथियार लूटने के 32 साल पुराने मामले में विशेष न्यायाधीश शैलेंद्र सचान की अदालत ने 10 आरोपियों को दोषी करार देते हुए जेल भेज दिया है। उन्हें 28 नवंबर को सजा सुनाई जाएगी।

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Farrukhabad 10 found guilty of looting weapons after taking police hostage report filed against 18
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

फर्रुखाबाद जिले में वर्ष 1992 में पुलिसकर्मियों पर हुए हमले के मामले में विशेष न्यायाधीश शैलेंद्र सचान दस्यु प्रभावित क्षेत्र की अदालत ने शुक्रवार को 10 लोगों को विभिन्न धाराओं में दोषी करार दिया। उन्हें जेल भेज दिया गया है। इस मामले में 18 लोगों पर मुकदमा दर्ज हुआ था। मुकदमे की सुनवाई के दौरान आठ आरोपियों की मृत्यु चुकी है। दोषियों को 28 नवंबर को सजा सुनाई जाएगी। कोतवाली मऊदरवाजा क्षेत्र की चौकी सिठऊपुर में तैनात कांस्टेबल हरिकिशोर ने 30 अक्तूबर 1992 को मोहम्मदाबाद कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।  इसमें कहा था कि वह और सिपाही अशोक कुमार चौकी पर थे।

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उसी समय गांव के लाला गुप्ता ने बताया कि गांव चकर पट्टी में गांव के झब्बू सिंह की सुरक्षा में लगे सिपाही मुरलीधर, शेषकुमार तिवारी के अलावा झब्बू सिंह के बेटे गुड्डू व राजाराम को को भीड़ ने बंधक बना लिया है। इस पर सिपाही हरिकिशोर व अशोक कुमार अपनी सरकारी राइफलें, कारतूस व टार्च लेकर मौके पर पहुंचकर लोगों को छुड़ाया। वापसी में ग्राम लुखरियाई के पास रात करीब आठ बजे गांव के ओमप्रकाश, सियाराम, सौदान सिंह, तुलाराम, वेदराम, रामचंद्र, रामऔतार, रामनरेश, रामबाबू, रामदीन, बादाम सिंह, रामरतन, रुकमंगल, अमर सिंह, रामवीर, देशराज, बरजोर व हरीशचंद्र सहित गांव के कई लोग लाठियां, राइफलें व अवैध हथियार लेकर आए और पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया।

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घटनास्थल से लूटी गई राइफलें आदि सामान बरामद
आरोपियों ने सिपाही हरिकिशोर, अशोक कुमार व मुरलीधर की राइफलें, कारतूस, टार्च और घड़ियां छीन लीं। इसके बाद सिपाही हरिकिशोर व मुरलीधर को पकड़कर ओमप्रकाश की बैठक में बंधक बना लिया। इसी बीच कांस्टेबल शेष कुमार तिवारी व अशोक कुमार भाग निकले, लेकिन पीछा कर रही भीड़ ने बाद में शेष कुमार पीट-पीटकर मार डाला। इसकी रिपोर्ट अलग से लिखाई गई। रात करीब 12 बजे पुलिस बल ने बंधक बनाए गए सिपाही हरिकिशोर व मुरलीधर को मुक्त कराया और घटनास्थल से लूटी गई राइफलें आदि सामान बरामद किया। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना की।

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सजा पर सुनवाई 28 नवंबर को
विवेचक ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर रामबाबू, रामदीन, बादाम सिंह, रामरतन, रुकमंगल, अमर सिंह, रामवीर, देशराज, बरजोर व हरीशचंद्र को दोषी पाया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान ओमप्रकाश, सियाराम, सौदान सिंह, तुलाराम, वेदराम, रामचंद्र, रामऔतार व रामनरेश की मृत्यु हो गई। विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावित क्षेत्र शैलेंद्र सचान ने सभी की जमानत निरस्त करते हुए जेल भेजने का आदेश दिया। सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए 28 नवंबर की तारीख तय की।

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