{"_id":"61f98fdeef75d9484f79452c","slug":"family-also-upset-due-to-intoxication-of-e-bus-driver-who-trampled-six-people-in-kanpur-akbarpur-news-knp678360217","type":"story","status":"publish","title_hn":"कानपुर में छह लोगों को रौंदने वाले ई-बस चालक की नशे की लत से परिजन भी परेशान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कानपुर में छह लोगों को रौंदने वाले ई-बस चालक की नशे की लत से परिजन भी परेशान
विज्ञापन
रघुनाथपुर गांव में ई-बस चालक के घर में पसरा सन्नाटा व गुमसुम बैठा पिता। (संवाद)
- फोटो : AKBARPUR
कानपुर देहात/सरवनखेड़ा। कानपुर के टाटमिल चौराहे के पास रविवार रात ई-बस से छह लोगों को कुचलने वाला चालक शराब का लती है। उसके परिजन भी इस बात से परेशान हैं। मंगलवार को रघुनाथपुर गांव स्थित उसके घर में सन्नाटा पसरा रहा। घर के बाहर पिता गुमसुम बैठे नजर आए।
गांव के लोगों ने बताया कि ई-बस चालक सत्येंद्र यादव पहले ट्रक चलाता था। एक साल पहले शराब की लत की वजह से घाटमपुर में ट्रकों की आमने सामने भिड़ंत में वह गंभीर रूप से घायल हो गया था।
पिता अशर्फीलाल ने बताया कि कमाई की रकम वो नशेबाजी में ही खर्च करता है। उसका बड़ा भाई अरविंद अपनी पत्नी व बच्चों के साथ अलग रहता है। सत्येंद्र की पत्नी रानी, तीन वर्षीय बेटे के साथ गांव में रहती हैं।
विज्ञापन
नशे की लत की वजह से घर में आर्थिक तंगी बनी रहती है। करीब दस वर्ष तक ट्रक चलाने के बाद भी वह परिवार के लिए कुछ नहीं कर सका। हर बार वह घर से जाने के दौरान पिता से ही किराए के लिए रुपये लेता था।
पिता ने बताया कि वर्ष 1996 में सत्येंद्र की मां की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। बीमा क्लेम में मिली धनराशि से घर बनवाया है। तीन बीघे खेत से परिवार का भरण पोषण हो रहा है।
विज्ञापन
गांव के लोगों ने बताया कि ई-बस चालक सत्येंद्र यादव पहले ट्रक चलाता था। एक साल पहले शराब की लत की वजह से घाटमपुर में ट्रकों की आमने सामने भिड़ंत में वह गंभीर रूप से घायल हो गया था।
विज्ञापन
पिता अशर्फीलाल ने बताया कि कमाई की रकम वो नशेबाजी में ही खर्च करता है। उसका बड़ा भाई अरविंद अपनी पत्नी व बच्चों के साथ अलग रहता है। सत्येंद्र की पत्नी रानी, तीन वर्षीय बेटे के साथ गांव में रहती हैं।
विज्ञापन
नशे की लत की वजह से घर में आर्थिक तंगी बनी रहती है। करीब दस वर्ष तक ट्रक चलाने के बाद भी वह परिवार के लिए कुछ नहीं कर सका। हर बार वह घर से जाने के दौरान पिता से ही किराए के लिए रुपये लेता था।
पिता ने बताया कि वर्ष 1996 में सत्येंद्र की मां की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। बीमा क्लेम में मिली धनराशि से घर बनवाया है। तीन बीघे खेत से परिवार का भरण पोषण हो रहा है।