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Fake PMO Officer: करोड़ों के खेल के लिए बिल्डर की चाल, करवाई थी सोसाइटी में महाठग की एंट्री, पढ़िए पूरी कहानी

Sat, 26 Aug 2023 10:42 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sat, 26 Aug 2023 10:42 AM IST
सार

Kanpur Crime: एसटीएफ ने खुलासा किया था कि संतोष खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय में तैनात अफसर बताकर अपने साथियों के साथ मिलकर लोगों को नौकरी दिलाने, ट्रांसफर पोस्टिंग कराने व अन्य काम कराने का झांसा देता और दबाव बनाकर उगाही करता था।

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Fake PMO Officer, Builders trick for the game of crores, got the entry of the thug in the society
कानपुर का महाठग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर में पायनियर ग्रींस सोसाइटी में बिल्डर निखिल शर्मा ने यूं ही महाठग अभिषेक प्रताप को किराए पर विला नहीं दिया था। उसका इरादा तो उससे करोड़ों के काम कराने का था। पूरी योजना के साथ अभिषेक प्रताप की सोसाइटी में एंट्री कराई गई और उसके वीवीआईपी होने की छवि गढ़ी गई।  22 लाख रुपये की ठगी के मामले में पुलिस ने अब बिल्डर निखिल शर्मा की भूमिका की भी जांच शुरू कर दी है।

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शुरुआती जांच में पुलिस इसी निष्कर्ष पर पहुंची है। सिंहपुर-बिठूर स्थित पायनियर ग्रींस सिटी में मनीषा दीक्षित अपने परिवार के साथ रहती हैं। मनीषा ने बताया कि एक साल पहले उन्होंने अपना किदवईनगर का घर बेचकर यहां बिल्डर निखिल शर्मा के भाई अखिल शर्मा से 163 वर्ग गज का प्लाट खरीदा था। बिल्डर को टोकन मनी देकर वहां निर्माण कार्य शुरू कराया, तो सोसाइटी के कुछ लोगों ने अवैध बताते हुए विरोध किया।
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अखिल से पूछा तो उसने केडीए से नया नक्शा पास होने की बात कही। इस मामले में बीच का रास्ता निकालने के लिए अभिषेक प्रताप को बिल्डर ने बीच में डाला। अभिषेक के मकान मालिक नरेश शास्त्री समेत एक दर्जन लोगों ने भी इसमें मदद की। फिर अभिषेक ने पंचायत लगाकर अपना फैसला सुनाते हुए सबकुछ वैध बताया लेकिन आठ फीट की जगह छोड़ने की शर्त रख दी।

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200 वर्गगज का विला खरीद लिया था
मुंह मांगी रकम देने के बाद भी जगह छोड़ने की शर्त मनीषा ने नहीं मानी और शक होने पर बिल्डर से रुपये वापस लेकर यहीं 200 वर्गगज का विला खरीद लिया। मनीषा के अनुसार अभी भी उनके करीब छह लाख रुपये बिल्डर ने अपना बड़ा नुकसान बताकर वापस नहीं किए हैं। इसी तरह से अनिल मौर्य को भी बिल्डर ने पुराने नक्शे में सड़क की जगह को बेच दिया।

इनके भी लिंक तलाश रही है पुलिस
सूत्रों के अनुसार सोसाइटी में इसी तरह से मुख्य सड़कों पर बने चार विला 70 से 80 लाख में बेचे गए। सड़क की जगह पर ही प्लाटिंग भी कर दी गई। इन मामलों में भी अभिषेक प्रताप ने पंचायत लगाकर कोई समस्या न होने के लिए आश्वस्त किया था। अभिषेक के मकान मालिक से निखिल के नजदीकी संबंध थे। पुलिस इनके भी लिंक तलाश रही है।

सवालों पर विला मालिक तस्वीर दिखाकर बंद करा देता था सबका मुंह
सोसाइटी के लोगों के अनुसार जिस विला में अभिषेक रह रहा था, उसके मालिक नरेश शास्त्री उसे अपना अनुज बताते थे। जब सोसाइटी के लोग नरेश से पूछते थे कि इतना रसूखदार शख्स कौन है तो वह मोबाइल में एक तस्वीर दिखाते थे। इस तस्वीर में कुछ सेना के नकाबपोश जवान थे और उनके पैरों के पास कुछ आतंकियों की लाशें पड़ी थीं। इसे देखकर सभी अभिषेक को एनआईए का ही डीआईजी मान लेते थे। लोगों के अनुसार नरेश किराया भी नहीं लेते थे।

गिरफ्तारी के बाद भी व्हाट्सएप ग्रुप पर ठग को बताया जा रहा महान
शातिर ठग की गिरफ्तारी के बाद भी सोसाइटी के रहने वाले कुछ लोग उसे महान मान रहे हैं। अभिषेक ने 15 लोगों को साथ में जोड़ते हुए सोसाइटी की कमेटी का रजिस्ट्रार ऑफिस में चोरी छिपे रजिस्ट्रेशन करा दिया था। उसने इसका एक व्हाट्सएप ग्रुप भी बनवाया था। सोसाइटी के लोगों के अनुसार इस ग्रुप में कुछ लोग अभी भी शातिर ठग को महान बता रहे हैं।

फर्जी पीएमओ अफसर को पुलिस सुरक्षा पर उठे सवाल, एसपी का इन्कार
एसटीएफ के हत्थे चढ़े फर्जी पीएमओ के अफसर को उन्नाव से गनर स्वीकृत होने की चर्चा है। हालांकि एसपी ने इससे इन्कार किया है। एसटीएफ ने खुलासा किया था कि संतोष खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय में तैनात अफसर बताकर अपने साथियों के साथ मिलकर लोगों को नौकरी दिलाने, ट्रांसफर पोस्टिंग कराने व अन्य काम कराने का झांसा देता और दबाव बनाकर उगाही करता था।

उन्नाव से पुलिस सुरक्षा स्वीकृत नहीं है
चर्चा है कि इस झांसेबाज को उन्नाव पुलिस लाइन से एक गनर भी मिला था। हालांकि पुलिस के अधिकारी इससे इन्कार कर रहे हैं। एसपी सिद्धार्थ शंकर मीना ने बताया कि गनर स्वीकृति की पूरी प्रक्रिया एलआईयू कार्यालय से पूरी होती है। रिकार्ड में इसकी पुष्टि नहीं हुई है। वहीं एलआईयू इंस्पेक्टर शैलेश कुमार ने भी बताया कि इस नाम के किसी भी व्यक्ति को उन्नाव से पुलिस सुरक्षा स्वीकृत नहीं है।

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