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रेलवे में नौकरी का झांसा देकर 23.5 लाख की ठगी, थमाया फर्जी ज्वाइनिंग लेटर, अधिकारियों पर लगा ये आरोप
Thu, 25 Jul 2019 11:27 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Thu, 25 Jul 2019 11:27 PM IST
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भारतीय रेलवे
- फोटो : अमर उजाला
कानपुर के नौबस्ता में डीआरएम कोटे से रेलवे में नौकरी दिलाने का झांसा देकर पांच दोस्तों से 23.5 लाख की ठगी का मामला प्रकाश में आया है। पीड़ितों ने छह लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी दर्ज कराई है। रेलवे कर्मियों और अफसरों पर भी मिलाभगत का आरोप है।
मुसहरी, बिहार निवासी पिंटु कुमार ने बताया कि आरोपी कुशीनगर के भठाई शुक्ला गांव निवासी विजय शुक्ला से उसकी मुलाकात बिहार में हुई थी। उसने खुद को झांसी डीआरएम का रिश्तेदार बताया था। कहा कि डीआरएम अपने कोटे से किसी को भी नौकरी दिलवा सकता है, झांसे में आकर अपने दोस्तों प्रमोद कुमार साहू, सिवान के विशाल कुमार सिंह, रोबिन कुमार सिंह और छपरा के सुनील कुमार को भी उससे मिला दिया।
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मुसहरी, बिहार निवासी पिंटु कुमार ने बताया कि आरोपी कुशीनगर के भठाई शुक्ला गांव निवासी विजय शुक्ला से उसकी मुलाकात बिहार में हुई थी। उसने खुद को झांसी डीआरएम का रिश्तेदार बताया था। कहा कि डीआरएम अपने कोटे से किसी को भी नौकरी दिलवा सकता है, झांसे में आकर अपने दोस्तों प्रमोद कुमार साहू, सिवान के विशाल कुमार सिंह, रोबिन कुमार सिंह और छपरा के सुनील कुमार को भी उससे मिला दिया।
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19 फरवरी को विजय सभी को लेकर नौबस्ता चौराहे पहुंचा, जहां सफेद रंग की गाड़ी में तीन लोग बैठे थे। इनमें से एक ने खुद को झांसी डीआरएम पंकज कुमार बताया। दोनों ड्राइवर और चपरासी थे। वहीं, पर 50-50 हजार रुपये लिए गए। 20 फरवरी को मेडिकल सर्टिफिकेट देकर ट्रेनिंग उसे और प्रमोद को छपरा जंक्शन ट्रेनिंग के लिए भेज दिया। जबकि बाकी दोस्तों को सिवान भेजा।
दो महीने 10 दिन की ट्रेनिंग के बाद खुद को डीआरएम बताने वाले पंकज ने नौबस्ता चौराहे पर फिर मुलाकात की। वहीं उससे पांच लाख रुपये और बाकी दोस्तों से चार-चार लाख रुपये लिए गए। इसके बाद मिनिस्ट्री ऑफ रेलवे के आई कार्ड और ज्वाइनिंग लेटर थमाकर दिल्ली पहुंचने को कहा। फिर सभी दिल्ली पहुंचे, जहां उन्नाव के आशुतोष मिश्रा उर्फ आशु, पटना के मनोज कुमार सिंह, दिनेश और नासीर के साथ विजय मिला।
दिए गए आई कार्ड, ज्वाइनिंग लेटर और उनके मोबाइल ले लिए। कहा कि कल से सभी की नौकरी शुरू हो जाएगी। कुछ देर में मिलने के बाद भी सभी रफूचक्कर हो गए। काफी समय बीतने के बाद फोन बूथ से कॉल करके संपर्क की कोशिश की, तो सभी के मोबाइल नंबर स्विच ऑफ मिले। थाना प्रभारी समर बहादुर सिंह का कहना है कि जांच करके आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
दो महीने 10 दिन की ट्रेनिंग के बाद खुद को डीआरएम बताने वाले पंकज ने नौबस्ता चौराहे पर फिर मुलाकात की। वहीं उससे पांच लाख रुपये और बाकी दोस्तों से चार-चार लाख रुपये लिए गए। इसके बाद मिनिस्ट्री ऑफ रेलवे के आई कार्ड और ज्वाइनिंग लेटर थमाकर दिल्ली पहुंचने को कहा। फिर सभी दिल्ली पहुंचे, जहां उन्नाव के आशुतोष मिश्रा उर्फ आशु, पटना के मनोज कुमार सिंह, दिनेश और नासीर के साथ विजय मिला।
दिए गए आई कार्ड, ज्वाइनिंग लेटर और उनके मोबाइल ले लिए। कहा कि कल से सभी की नौकरी शुरू हो जाएगी। कुछ देर में मिलने के बाद भी सभी रफूचक्कर हो गए। काफी समय बीतने के बाद फोन बूथ से कॉल करके संपर्क की कोशिश की, तो सभी के मोबाइल नंबर स्विच ऑफ मिले। थाना प्रभारी समर बहादुर सिंह का कहना है कि जांच करके आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।