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फर्जी अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर मामला: नोएडा का पवन शर्मा मास्टरमाइंड, बेचा 2.50 लाख अमेरिकन का डाटा
Tue, 03 Aug 2021 10:17 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Tue, 03 Aug 2021 10:17 AM IST
सार
आरोपियों के पास से ढाई लाख अमेरिकी नागरिकों का डाटा मिला था। पूछताछ में पता चला कि नोएडा निवासी शख्स से डाटा खरीदा गया है। अब उसके नाम व पते की भी जानकारी हो गई है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
कानपुर के नौबस्ता में पकड़े गए फर्जी अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर को डाटा बेचने वाले का सुराग लग गया है। नोएडा का पवन शर्मा नाम का शख्स डाटा बेचने का मास्टरमाइंड है। पवन ने ही कॉल सेंटर संचालक को 2.50 लाख अमेरिकी नागरिकों का डाटा बेचा था। पुलिस ने उसकी तलाश शुरू कर दी है।
उसके ठिकानों पर दबिश भी दी गई लेकिन मिला नहीं। क्राइम ब्रांच ने पिछले सप्ताह अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर का भंडाफोड़ कर आरोपी रवि शुक्ला और विशाल सिंह सेंगर को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। आरोपी अमेरिकी नागरिकों को कॉल कर होम लोन व पर्सनल लोन देने के नाम पर ठगी करते थे।
आरोपियों के पास से ढाई लाख अमेरिकी नागरिकों का डाटा मिला था। पूछताछ में पता चला कि नोएडा निवासी शख्स से डाटा खरीदा गया है। अब उसके नाम व पते की भी जानकारी हो गई है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक उसका नाम पवन शर्मा है। उसी ने 50 हजार रुपये में डाटा बेचा था। पवन क्या करता है और कब से ये काम कर रहा है, इस बारे में अभी बहुत जानकारी पुलिस के पास नहीं है। आशंका है कि रवि व विशाल पर कार्रवाई की जानकारी के बाद से वह फरार हो गया है।
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उसके ठिकानों पर दबिश भी दी गई लेकिन मिला नहीं। क्राइम ब्रांच ने पिछले सप्ताह अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर का भंडाफोड़ कर आरोपी रवि शुक्ला और विशाल सिंह सेंगर को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। आरोपी अमेरिकी नागरिकों को कॉल कर होम लोन व पर्सनल लोन देने के नाम पर ठगी करते थे।
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आरोपियों के पास से ढाई लाख अमेरिकी नागरिकों का डाटा मिला था। पूछताछ में पता चला कि नोएडा निवासी शख्स से डाटा खरीदा गया है। अब उसके नाम व पते की भी जानकारी हो गई है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक उसका नाम पवन शर्मा है। उसी ने 50 हजार रुपये में डाटा बेचा था। पवन क्या करता है और कब से ये काम कर रहा है, इस बारे में अभी बहुत जानकारी पुलिस के पास नहीं है। आशंका है कि रवि व विशाल पर कार्रवाई की जानकारी के बाद से वह फरार हो गया है।
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कई गिरोह को दे चुका डाटा
जांच में पता चला है कि सोशल मीडिया के जरिये वह अमेरिका की कई कंपनियों के एजेंटों के संपर्क में आया। एजेंट बीमा, हेल्थ आदि कंपनियों से जुड़े हैं। इनके पास अमेरिकी नागरिकों का डाटा रहता है। पवन इन एजेंट से ही डाटा खरीदता है। इसके बाद ऑनलाइन डाटा बेच देता है। रवि और विशाल ने भी उससे फोन पर ही संपर्क किया था। तय रकम मिलने के बाद उसने डाटा उपलब्ध करवा दिया। डाटा में अमेरिकी नागरिक का नाम, पता, परिवार के सदस्यों के नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल, बीमा पॉलिसी नंबर आदि जानकारियां होती हैं।
आरोपी को रिमांड पर लेने की तैयारी
हाईटेक तरीके से आरोपी साइबर ठगी को अंजाम दे रहे थे। इसमें कई अहम परतें खुलना अभी बाकी हैं। कई सवाल भी अनसुलझे हैं। तहकीकात को आगे बढ़ाने और गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों पर कार्रवाई के लिए आरोपियों को पुलिस रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है।
जांच में पता चला है कि सोशल मीडिया के जरिये वह अमेरिका की कई कंपनियों के एजेंटों के संपर्क में आया। एजेंट बीमा, हेल्थ आदि कंपनियों से जुड़े हैं। इनके पास अमेरिकी नागरिकों का डाटा रहता है। पवन इन एजेंट से ही डाटा खरीदता है। इसके बाद ऑनलाइन डाटा बेच देता है। रवि और विशाल ने भी उससे फोन पर ही संपर्क किया था। तय रकम मिलने के बाद उसने डाटा उपलब्ध करवा दिया। डाटा में अमेरिकी नागरिक का नाम, पता, परिवार के सदस्यों के नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल, बीमा पॉलिसी नंबर आदि जानकारियां होती हैं।
आरोपी को रिमांड पर लेने की तैयारी
हाईटेक तरीके से आरोपी साइबर ठगी को अंजाम दे रहे थे। इसमें कई अहम परतें खुलना अभी बाकी हैं। कई सवाल भी अनसुलझे हैं। तहकीकात को आगे बढ़ाने और गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों पर कार्रवाई के लिए आरोपियों को पुलिस रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है।