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साहब! मजदूरी करके पेट पालते हैं, बंदी के चलते भूखे मरने की नौबत आ गई, अब घर पहुंचकर ही सुकून मिलेगा
Wed, 01 Apr 2020 10:49 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हमीरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हमीरपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 01 Apr 2020 10:49 AM IST
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घर पहुंच रहे लोग
- फोटो : अमर उजाला
हमीरपुर जिले से हर साल हजारों लोग रोजगार के लिए पलायन करते हैं। कोरोना वायरस से बंद हुई फैक्ट्रियों के बाद बाहरी प्रांतों से आए लोगों का कारवां तो थमा है लेकिन अब आसपास के जिलों में ईट भट्ठों में काम करने वालों के आने का क्रम शुरू हो गया है।
हाईवे से गुजर रहे निवादा निवासी चैतू रानी लक्ष्मीबाई बाई तिराहे पर मिला। बताया कि घाटमपुर से परिवार के साथ आ रहा है। कहा कि साहब, दिवाली के बाद से घाटमपुर के ईट भट्ठे में काम करते हैं। पिछले आठ दिनों से ईट भट्ठा बंद होने पर काम न मिलने की वजह से सोचा कि गांव जाकर फसल की कटाई कर कुछ कमा लेंगे। भूखे मरने की नौबत आ गई है। इसीलिए घाटमपुर से पैदल बच्चों के साथ निकला था।
बताया कि उसके गांव में रह रहे बच्चे भी बार-बार फोन कर बुला रहे हैं। वहीं घाटमपुर से सात लोगों के साथ भरुआसुमेरपुर जा रहे हैं। रामकिशन ने कहा कि करीब 24 लोग और हैं। सभी लोग धीरे-धीरे पैदल ही घर जा रहे हैं।
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हाईवे से गुजर रहे निवादा निवासी चैतू रानी लक्ष्मीबाई बाई तिराहे पर मिला। बताया कि घाटमपुर से परिवार के साथ आ रहा है। कहा कि साहब, दिवाली के बाद से घाटमपुर के ईट भट्ठे में काम करते हैं। पिछले आठ दिनों से ईट भट्ठा बंद होने पर काम न मिलने की वजह से सोचा कि गांव जाकर फसल की कटाई कर कुछ कमा लेंगे। भूखे मरने की नौबत आ गई है। इसीलिए घाटमपुर से पैदल बच्चों के साथ निकला था।
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बताया कि उसके गांव में रह रहे बच्चे भी बार-बार फोन कर बुला रहे हैं। वहीं घाटमपुर से सात लोगों के साथ भरुआसुमेरपुर जा रहे हैं। रामकिशन ने कहा कि करीब 24 लोग और हैं। सभी लोग धीरे-धीरे पैदल ही घर जा रहे हैं।
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