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उन्नाव कांड: दुष्कर्म पीड़िता के पिता की पिटाई के चश्मदीद को मिली सुरक्षा, घटना के वक्त मौके पर था
Mon, 30 Sep 2019 07:41 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
यूपी डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Mon, 30 Sep 2019 07:41 PM IST
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उन्नाव विधायक कुलदीप सेंगर पर दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली पीड़िता (फाइल फोटो)
- फोटो : सोशल मीडिया
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उन्नाव में दुष्कर्म पीड़िता के पिता की पिटाई के वक्त मौके पर मौजूद रहे चश्मदीद को भी जान के खतरे के अंदेशे पर प्रशासन ने एक गनर दिया गया है। चश्मदीद ने ही सीबीआई को मारपीट की पूरी कहानी बताते हुए विधायक के भाई व अन्य का नाम बताया था।
इस चश्मदीद का नाम सीबीआई के गवाहों की लिस्ट में है। 3 अप्रैल वर्ष 2018 को दुष्कर्म पीड़िता के पिता से विधायक कुलदीप सेंगर के भाई अतुल सेंगर ने अपने सहयोगियों के साथ मारपीट की थी। जिस समय पीड़िता के पिता पर विधायक के भाई का प्रकोप बरपा, मौके पर पीड़िता के चाचा का एक करीबी मौजूद था।
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इस चश्मदीद का नाम सीबीआई के गवाहों की लिस्ट में है। 3 अप्रैल वर्ष 2018 को दुष्कर्म पीड़िता के पिता से विधायक कुलदीप सेंगर के भाई अतुल सेंगर ने अपने सहयोगियों के साथ मारपीट की थी। जिस समय पीड़िता के पिता पर विधायक के भाई का प्रकोप बरपा, मौके पर पीड़िता के चाचा का एक करीबी मौजूद था।
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मीडिया से बात करते कुलदीप सिंह सेंगर
- फोटो : amar ujala
उसका कहना था कि उसने जब पीड़िता के पिता को बचाने की कोशिश की तो विधायक के भाई के सहयोगियों ने उसे भी पीटा था। घटना का यह चश्मदीद भी सीबीआई के गवाहों की लिस्ट में है। पिटाई के शिकार चश्मदीद ने जान का खतरा बता सुरक्षा की मांग की थी।
जिस पर खुफिया विभाग की जांच के बाद सुरक्षा की दृष्टि से उसे भी एक गनर दिया गया। मालूम हो कि पिटाई की इस घटना के बाद पुलिस ने विधायक के दबाव में पीड़ित पर ही आर्म्स एक्ट का मुकदमा दर्ज किया था। उसका समुचित इलाज कराए बिना ही जिला अस्पताल से जेल भेज दिया था।
जहां 8 अप्रैल 2018 की रात पिता की हालत बिगड़ गई। रात में ही जेल अधिकारियों ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया लेकिन इलाज के दौरान ही 9 अप्रैल 2018 को उसकी मौत हो गई थी। इसके बाद मामला तूल पकड़ा और सीबीआई को जांच सौंपी गई थी।
जिस पर खुफिया विभाग की जांच के बाद सुरक्षा की दृष्टि से उसे भी एक गनर दिया गया। मालूम हो कि पिटाई की इस घटना के बाद पुलिस ने विधायक के दबाव में पीड़ित पर ही आर्म्स एक्ट का मुकदमा दर्ज किया था। उसका समुचित इलाज कराए बिना ही जिला अस्पताल से जेल भेज दिया था।
जहां 8 अप्रैल 2018 की रात पिता की हालत बिगड़ गई। रात में ही जेल अधिकारियों ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया लेकिन इलाज के दौरान ही 9 अप्रैल 2018 को उसकी मौत हो गई थी। इसके बाद मामला तूल पकड़ा और सीबीआई को जांच सौंपी गई थी।