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Kanpur News: शहर के उद्यमियों के 800 करोड़ के निर्यात ऑर्डर अटके, शिपिंग कंपनियों ने बुकिंग रोकी
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कानपुर। अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच चल रहा युद्ध जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे उद्योग जगत को तगड़ा झटका लग रहा है। युद्ध के चलते अब तक शहर के निर्यातकों को 800 करोड़ की चपत लग चुकी है। ये सभी निर्यात ऑर्डर थे जो अटक गए हैं। शिपिंग कंपनियों ने बुकिंग भी रोक दी है। एल्युमीनियम, रेअर अर्थ मेटल का आयात रुकने से इंजीनियरिंग और रक्षा उत्पादन पर गहरा असर पड़ गया है। जानकारों का कहना है कि युद्ध एक सप्ताह और खिंचा तो महंगाई का तगड़ा डंक शहरियों को लगेगा। उद्यमी, निर्यातकों के सामने कई संकट सामने आ गए हैं। रक्षा इकाइयों के मुनाफे पर गहरा असर पड़ सकता है।
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (फियो) के सहायक निदेशक आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि युद्ध का कानपुर से होने वाले निर्यात पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है। शहर से खाड़ी देशों यूएई, सऊदी अरब, कतर, ओमान, इस्राइल, ईरान, कतर, दुबई, अफ्रीका, यूरोप आदि देशों में उत्पादों का निर्यात किया जाता है। इनमें लेदर और लेदर उत्पाद, जूते, सैडलरी, लेदर जैकेट, सेफ्टी शूज, बैग और बेल्ट, टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट्स, फ्रेश फूड प्रोडक्ट्स, सब्जियां, मसाले, प्रोसेस्ड फूड, प्लास्टिक और पैकेजिंग उत्पाद, केमिकल, आर्गेनिक और टैनिंग केमिकल व अन्य उत्पाद हैं। इन देशों में एक करोड़ से ज्यादा भारतीय रहते हैं। सब्जियों के दर्जनों कंटेनर न पहुंचने से वे खराब होने के कगार पर पहुंच गई हैं।
मर्चेंट चैंबर ऑफ उत्तर प्रदेश के इंडस्टि्रयल कमेटी के चेयरमैन और रक्षा उत्पाद उद्यमी सुशील शर्मा ने बताया कि शिपिंग कंपनियों ने नई बुकिंग रोक दी है। शहर में इंजीनियरिंग और रक्षा-प्रतिरक्षा उत्पादों का बड़ा व्यापार होता है। रक्षा उत्पाद बनाने में अलग-अलग प्रकार के एल्युमीनियम, रेअर अर्थ, लुब्रीकेंट का उपयोग किया जाता है जो यूरोप के देशों जैसे जर्मनी, स्विटरलैंड, इटली, यूके और यूएस से आते हैं। युद्ध के चलते यूरोप में भी आयात-निर्यात रुक गया है। इसके चलते इंजीनियरिंग और रक्षा-प्रतिरक्षा पर भी गहरा असर पड़ गया है।
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बताया कि युद्ध लंबा खिंचा तो उद्योग जगत के सामने बड़ी समस्याएं खड़ी होंगी। युद्ध के कारण लेदर, टेक्सटाइल और प्लास्टिक उत्पादों पर भी असर पड़ा है। समुद्री मार्ग बाधित होने, मालभाड़ा बढ़ने, कच्चे माल के महंगे होने और कंटेनरों के फंसने से वर्तमान में निर्यात गतिविधि धीमी और अस्थिर स्थिति में है। उन्होंने बताया कि रक्षा उत्पादाें के दाम फिक्स ही होते हैं। कच्चा माल, लॉलिस्टिक और भाड़ा महंगा होने से उत्पाद महंगा बनेगा लेकिन रक्षा इकाइयां तो उत्पादों के दाम बढ़ा नहीं सकती हैं। ऐसे में उनके मुनाफे पर असर पड़ सकेगा।
500 करोड़ के लेदर उत्पाद समुद्र में फंसे
कानपुर के कुल निर्यात में लेदर उद्योग सबसे बड़ा हिस्सा होता है और खाड़ी देशों में इसका बड़ा बाजार है। युद्ध के कारण व्यापार में आईं प्रमुख समस्याएं समुद्री मार्ग बाधित होने की वजह से करीब 500 करोड़ का कानपुर का लेदर का सामान समुद्र में अटका हुआ है। शिपिंग कंपनियों ने समुद्री जोखिम बीमा और मालभाड़ा दो से तीन गुना तक बढ़ा दिया है।
20 प्रतिशत तक बढ़ी निर्यातकों की लागत
प्लास्टिक उद्योग, केमिकल उद्योग, लेदर टैनिंग के निर्यातकों की लागत 15 से 20 प्रतिशत बढ़ गई है। इससे उत्पादन धीमा पड़ गया है। कई विदेशी खरीदारों ने निर्यातकों के भुगतान रोक दिए हैं। हालात सामान्य होने तक और अन्य कारणों का हवाला देते हुए देरी होने पर यूरोपीय और खाड़ी के विदेशी खरीदार पेनाल्टी लगाने की भी बात कर रहे है। आगे के ज्यादातर ऑर्डर भी होल्ड कर रहे हैं।
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फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (फियो) के सहायक निदेशक आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि युद्ध का कानपुर से होने वाले निर्यात पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है। शहर से खाड़ी देशों यूएई, सऊदी अरब, कतर, ओमान, इस्राइल, ईरान, कतर, दुबई, अफ्रीका, यूरोप आदि देशों में उत्पादों का निर्यात किया जाता है। इनमें लेदर और लेदर उत्पाद, जूते, सैडलरी, लेदर जैकेट, सेफ्टी शूज, बैग और बेल्ट, टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट्स, फ्रेश फूड प्रोडक्ट्स, सब्जियां, मसाले, प्रोसेस्ड फूड, प्लास्टिक और पैकेजिंग उत्पाद, केमिकल, आर्गेनिक और टैनिंग केमिकल व अन्य उत्पाद हैं। इन देशों में एक करोड़ से ज्यादा भारतीय रहते हैं। सब्जियों के दर्जनों कंटेनर न पहुंचने से वे खराब होने के कगार पर पहुंच गई हैं।
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मर्चेंट चैंबर ऑफ उत्तर प्रदेश के इंडस्टि्रयल कमेटी के चेयरमैन और रक्षा उत्पाद उद्यमी सुशील शर्मा ने बताया कि शिपिंग कंपनियों ने नई बुकिंग रोक दी है। शहर में इंजीनियरिंग और रक्षा-प्रतिरक्षा उत्पादों का बड़ा व्यापार होता है। रक्षा उत्पाद बनाने में अलग-अलग प्रकार के एल्युमीनियम, रेअर अर्थ, लुब्रीकेंट का उपयोग किया जाता है जो यूरोप के देशों जैसे जर्मनी, स्विटरलैंड, इटली, यूके और यूएस से आते हैं। युद्ध के चलते यूरोप में भी आयात-निर्यात रुक गया है। इसके चलते इंजीनियरिंग और रक्षा-प्रतिरक्षा पर भी गहरा असर पड़ गया है।
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बताया कि युद्ध लंबा खिंचा तो उद्योग जगत के सामने बड़ी समस्याएं खड़ी होंगी। युद्ध के कारण लेदर, टेक्सटाइल और प्लास्टिक उत्पादों पर भी असर पड़ा है। समुद्री मार्ग बाधित होने, मालभाड़ा बढ़ने, कच्चे माल के महंगे होने और कंटेनरों के फंसने से वर्तमान में निर्यात गतिविधि धीमी और अस्थिर स्थिति में है। उन्होंने बताया कि रक्षा उत्पादाें के दाम फिक्स ही होते हैं। कच्चा माल, लॉलिस्टिक और भाड़ा महंगा होने से उत्पाद महंगा बनेगा लेकिन रक्षा इकाइयां तो उत्पादों के दाम बढ़ा नहीं सकती हैं। ऐसे में उनके मुनाफे पर असर पड़ सकेगा।
500 करोड़ के लेदर उत्पाद समुद्र में फंसे
कानपुर के कुल निर्यात में लेदर उद्योग सबसे बड़ा हिस्सा होता है और खाड़ी देशों में इसका बड़ा बाजार है। युद्ध के कारण व्यापार में आईं प्रमुख समस्याएं समुद्री मार्ग बाधित होने की वजह से करीब 500 करोड़ का कानपुर का लेदर का सामान समुद्र में अटका हुआ है। शिपिंग कंपनियों ने समुद्री जोखिम बीमा और मालभाड़ा दो से तीन गुना तक बढ़ा दिया है।
20 प्रतिशत तक बढ़ी निर्यातकों की लागत
प्लास्टिक उद्योग, केमिकल उद्योग, लेदर टैनिंग के निर्यातकों की लागत 15 से 20 प्रतिशत बढ़ गई है। इससे उत्पादन धीमा पड़ गया है। कई विदेशी खरीदारों ने निर्यातकों के भुगतान रोक दिए हैं। हालात सामान्य होने तक और अन्य कारणों का हवाला देते हुए देरी होने पर यूरोपीय और खाड़ी के विदेशी खरीदार पेनाल्टी लगाने की भी बात कर रहे है। आगे के ज्यादातर ऑर्डर भी होल्ड कर रहे हैं।