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कोर्ट में हाजिर न होने से एसएसपी लखनऊ से स्पष्टीकरण तलब, 12 वर्ष पुराने मामले में होनी है गवाही
Tue, 07 Jan 2020 10:33 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
डिजिटल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरैया
डिजिटल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरैया
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Tue, 07 Jan 2020 10:33 PM IST
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लखनऊ एसएसपी कलानिधि नैथानी
- फोटो : अमर उजाला
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औरैया में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश महेश चंद्र वर्मा ने थाना अयाना क्षेत्र के 12 वर्ष पुराने मामले में अभियोजन साक्षी अपर पुलिस अधीक्षक (अपराध) लखनऊ दिनेश कुमार पुरी के साक्ष्य के लिए उपस्थित न होने पर बेहद नाराजगी व्यक्त की है।
साथ ही डीजीपी को पत्र लिखकर एसएसपी लखनऊ के विरुद्ध न्यायालय अवमानना अधिनियम के तहत कार्रवाई प्रारंभ करने की चेतावनी के साथ स्पष्टीकरण तलब किया है। एडीजे (चतुर्थ) महेश चंद्र वर्मा की कोर्ट में थाना अयाना क्षेत्र का 12 वर्ष पुराना राज्य बनाम मंगल सिंह धारा 306, 330 आईपीसी मुकदमा लंबित है।
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साथ ही डीजीपी को पत्र लिखकर एसएसपी लखनऊ के विरुद्ध न्यायालय अवमानना अधिनियम के तहत कार्रवाई प्रारंभ करने की चेतावनी के साथ स्पष्टीकरण तलब किया है। एडीजे (चतुर्थ) महेश चंद्र वर्मा की कोर्ट में थाना अयाना क्षेत्र का 12 वर्ष पुराना राज्य बनाम मंगल सिंह धारा 306, 330 आईपीसी मुकदमा लंबित है।
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इस मुकदमे में अभियोजन साक्षी दिनेश कुमार पुरी (अपर पुलिस अधीक्षक अपराध लखनऊ) को गवाही के लिए सात जनवरी मंगलवार को तलब किया गया था। जवाब में वरिष्ठ पुुलिस अधीक्षक लखनऊ ने एसपी औरैया के माध्यम से न्यायालय को अवगत कराया कि एएसपी कानून व्यवस्था की ड्यूटी में व्यस्तता के कारण नियत तिथि पर कोर्ट पहुंचने पर असमर्थ हैं।
इतने पुराने मुकदमे में गवाही न हो पाने से कोर्ट ने नाराजगी व्यक्त की और पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश को लिखा कि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक लखनऊ की दृष्टि में न्यायालय में साक्ष्य की कार्यवाही अत्यंत महत्वहीन कार्य है तथा पुलिस अधिकारियों को अन्य समस्त दायित्व/कार्यों से मुक्त होने पर ही वह साक्ष्य के लिए न्यायालय में उपस्थित हो सकते हैं।
कोर्ट ने समन तामील होने के बावजूद साक्षी के उपस्थित न होने को न्यायालय का आपराधिक अवमानना कारित माना। एडीजे ने अपर पुलिस अधीक्षक को अगली तारीख 14 फरवरी 2020 को साक्ष्य के लिए उपस्थित करने को लिखा और एसएसपी लखनऊ को इस तिथि पर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश देते हुए चेतावनी दी कि क्यों न उनके विरुद्ध माननीय उच्च न्यायालय के प्रपत्र के अनुपालन में न्यायालय अवमानना अधिनियम के प्राविधानों के तहत कार्रवाई शुरू की जाए।
अधिवक्ता शिवम शर्मा ने बताया कि कोर्ट ने एक अन्य अभियोजन साक्षी सरनाम सिंह के विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी किया है। शेष अभियोजन साक्ष्य की तारीख 23 जनवरी 2020 की है।
इतने पुराने मुकदमे में गवाही न हो पाने से कोर्ट ने नाराजगी व्यक्त की और पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश को लिखा कि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक लखनऊ की दृष्टि में न्यायालय में साक्ष्य की कार्यवाही अत्यंत महत्वहीन कार्य है तथा पुलिस अधिकारियों को अन्य समस्त दायित्व/कार्यों से मुक्त होने पर ही वह साक्ष्य के लिए न्यायालय में उपस्थित हो सकते हैं।
कोर्ट ने समन तामील होने के बावजूद साक्षी के उपस्थित न होने को न्यायालय का आपराधिक अवमानना कारित माना। एडीजे ने अपर पुलिस अधीक्षक को अगली तारीख 14 फरवरी 2020 को साक्ष्य के लिए उपस्थित करने को लिखा और एसएसपी लखनऊ को इस तिथि पर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश देते हुए चेतावनी दी कि क्यों न उनके विरुद्ध माननीय उच्च न्यायालय के प्रपत्र के अनुपालन में न्यायालय अवमानना अधिनियम के प्राविधानों के तहत कार्रवाई शुरू की जाए।
अधिवक्ता शिवम शर्मा ने बताया कि कोर्ट ने एक अन्य अभियोजन साक्षी सरनाम सिंह के विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी किया है। शेष अभियोजन साक्ष्य की तारीख 23 जनवरी 2020 की है।