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Exclusive: कानपुर हैलट में ‘मुर्दों’ को लगा दिए रेमडेसिविर इंजेक्शन, मौत के बाद जारी हुए टीके

Sat, 12 Jun 2021 04:16 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा वाचस्पति पांडेय, अमर उजाला, कानपुर
वाचस्पति पांडेय, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Sat, 12 Jun 2021 04:16 AM IST
सार

डॉक्टरों की ओर से जारी पर्चे पर ये इंजेक्शन निकाले गए थे। आशंका है कि बाजार में महंगे दामों पर नर्सिंग स्टाफ ने ये इंजेक्शन बेचे हैं। 

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Exclusive: Remdesivir injection given to 'dead patients' in Kanpur hailat
हैलट - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर हैलट के न्यूरो साइंसेज विभाग में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहां कोविड वार्ड में तैनात नर्सिंग स्टाफ ने मुर्दों के नाम पर कई दिनों तक रेमडेसिविर इंजेक्शन स्टोर से निकलवाए। डॉक्टरों की ओर से जारी पर्चे पर ये इंजेक्शन निकाले गए थे। आशंका है कि बाजार में महंगे दामों पर नर्सिंग स्टाफ ने ये इंजेक्शन बेचे हैं।

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इसका खुलासा न्यूरो साइंसेज विभाग में रिकॉर्ड के जरिये हुआ है। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान सभी सरकारी अस्पतालों में रेेमडेसिविर इंजेक्शन की सप्लाई की जा रही है। इसे कोविड वार्ड में भर्ती मरीजों को डॉक्टर की अनुमति पर प्रतिदिन लगाया जा रहा है। नर्सिंग स्टाफ को ये इंजेक्शन और अन्य दवाएं डॉक्टर की परमिशन से स्टोर से मिलती हैं।
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30 अप्रैल को क्राइम ब्रांच की टीम ने हैलट के दो कर्मचारियों को रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करते रंगेहाथ दबोचा था। कालाबाजारी में हैलट के वार्ड ब्वॉय का नाम सामने आने के बाद अमर उजाला ने हैलट के न्यूरो साइंसेज विभाग के जब रिकॉर्ड खंगाले तो कई चौंकाने वालेे तथ्य सामने आए। 
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डॉक्टरोें के हस्ताक्षर वाले पर्चों के जरिये नर्सिंग स्टाफ व वार्ड ब्वॉय स्टोर से कोरोना से मृत लोगों के नाम से भी रेमडेसिविर इंजेक्शन ले आए। आशंका है कि ये इंजेक्शन महंगे दामों पर बाजार में बेचे गए। न्यूरो साइंसेज के एक कर्मचारी ने नाम न छापने के शर्त पर बताया कि अगर हैलट के सभी कोविड वार्ड के रिकॉर्ड खंगाले जाएं तो इस फर्जीवाडे़ में कई कर्मचारियों के नाम उजागर होंगे।

ऐसे की गई हेराफेरी
कोरोना की दूसरी लहर में न्यूरो साइंसेज विभाग में लेवल थ्री का अस्पताल बनाया गया है। यहां भर्ती संक्रमित मरीजों की देखरेख में लगे डॉक्टर द्वारा प्रतिदिन दवाओं का पर्चा (स्टोर का मांगपत्र) बनाकर दिया जाता है। इस पर नर्सिंग स्टाफ या वार्ड ब्वॉय स्टोर से दवा लेकर आता है। मांग पत्र में मरीज के नाम, भर्ती होने की तारीख, आईपी नंबर के साथ डॉक्टर भी का नाम लिखा होता है। दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि नर्सिंग स्टाफ ने कोविड मरीज की मौत के बाद भी स्टोर से रेमडेसिविर निकलवाई।


रजिस्ट्रेशन नंबर    नाम           एडमिट           मौत              इंजेक्शन जारी करने की तिथि
688         शिवम                19-04            23- 04            25-04
702         प्रहलाद सिंह                              22- 04            26-04
704         निर्मला  खरे          19-04            22-04              26-04
750         नाजिया  खान        25-04            26- 04             27-04
617         राजतिलक                                26- 04             29-04
751         रामदास               20-04            28- 04             29-04
788         विनीता ठाकुर         23-04            26- 04             02-05
 

हैलट में मरीजों के लिए प्रतिदिन दवाओं को इंडेंट कराया जाता है। इसके बाद भी यदि कोरोना काल में किसी मरीज की मौत के बावजूद उसके नाम पर इंजेक्शन आवंटित किए गए हैं तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. ज्योति सक्सेना, प्रमुख चिकित्साधीक्षक, हैलट

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