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Kanpur News: हर दसवें घर में पालतू जानवर, लाइसेंस किसी के पास नहीं
Mon, 04 Dec 2023 12:37 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Mon, 04 Dec 2023 12:37 AM IST
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कानपुर देहात। जिले में पालतू जानवर रखने का शौक बहुत लोगों को है, लेकिन खुद के साथ दूसरों की स्वास्थ्य सुरक्षा और नियमों की फिक्र कोई नहीं रखता है। हालात ये हैं कि जिले में हर दसवें घर में पालतू जानवर हैं। अलबत्ता लाइसेंस किसी के पास नहीं है।
जिले में 13 नगर निकाय हैं। जबकि 618 ग्राम पंचायतें हैं। करीब 3.53 लाख घर हैं। जानकारों का कहना है हर दसवें घर में पालतू जानवर रखने का औसत है। इस प्रकार करीब 35 हजार पालतू जानवर घरों में हैं। अधिकांश लोग पालतू जानवर में कुत्ता पालना अधिक पसंद करते हैं। इसमें विभिन्न नस्लों के कुत्ते में कुछ अधिक आक्रामक होते हैं। इसके साथ ही अब बिल्ली और खरगोश पालने का चलन भी बढ़ा है। अब कई तरह की नस्ल की बिल्लियां लोग पाल रहे हैं। पालतू जानवर रखने के लिए लाइसेंस लेना जरूरी है। इसके लिए नियम बना है। हालांकि जिले में पालतू जानवर रखने का लाइसेंस लेना किसी ने जरूरी नहीं समझा है। शौक में पाले गए ये जानवर रेबीज के संवाहक हैं। इनके काटने या फिर पंजे मारने से रेबीज वायरस का संक्रमण होता है। यह जानलेवा है। अकबरपुर के अशोक नगर में अजीम को पालतू बिल्ली ने काटा और पंजा मार दिया था। 26 नवंबर को अजीम की मौत हो गई थी। जबकि दो दिन बाद उसके पिता इम्जियाजुद्दीन ने दम तोड़ दिया था।
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बयान-
पालतू जानवर लोग शौक या फिर कई बार चोर आदि से सुरक्षा को लेकर घरों में रखते हैं। तीन माह की आयु में पालतू जानवर का रेबीज का टीका लगना चाहिए। यदि इस आयु में पालतू जानवर को टीका नहीं लग सका तो तत्काल टीका लगवा लेना चाहिए। इससे पालतू जानवर के काटने या फिर पंजा मारने की स्थित में रेबीज संक्रमण का खतरा नहीं रहता है।
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- डॉ. सुबोध कुमार, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी कानपुर देहात
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नगर निकायों की ओर से पालतू जानवरों रखने के लिए लाइसेंस जारी करने का नियम है। लेकिन किसी ने आवेदन नहीं किया है तो अभी तक किसी निकाय में कोई लाइसेंस जारी नहीं हुआ है। जबकि नगरीय क्षेत्र में काफी लोग शौकिया पालतू जानवर रखे हैं। लाइसेंस न लेने से पालतू जानवरों को रेबीज का टीका भी नहीं लगा है। जल्द ही इसके लिए प्रयास शुरू किया जाएगा। पालतू जानवर रखने वाले परिवारों को चिन्हित कराकर प्रक्रिया के तहत लाइसेंस जारी किए जाएंगे।
-अजय कुमार, नोडल ईओ कानपुर देहात
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लाइसेंस के लिए रेबीज टीका लगना जरूरी
पालतू जानवर को बिना रेबीज टीका लगे लाइसेंस जारी नहीं हो सकता है। यह नियम है। इधर लाइसेंस प्राधिकरण (निकाय या ब्लॉक) संजीदा नहीं हैं। टोका टाकी या नोटिस आदि नहीं मिलने से लोग घरों में पालतू जानवर रखे हैं। अफसरों की यहीं बेपरवाही और पालतू जानवर रखने वाले लोगों के सतर्क नहीं होने से रेबीज संक्रमण का खतरा बना रहता है। संवाद
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जिले में 13 नगर निकाय हैं। जबकि 618 ग्राम पंचायतें हैं। करीब 3.53 लाख घर हैं। जानकारों का कहना है हर दसवें घर में पालतू जानवर रखने का औसत है। इस प्रकार करीब 35 हजार पालतू जानवर घरों में हैं। अधिकांश लोग पालतू जानवर में कुत्ता पालना अधिक पसंद करते हैं। इसमें विभिन्न नस्लों के कुत्ते में कुछ अधिक आक्रामक होते हैं। इसके साथ ही अब बिल्ली और खरगोश पालने का चलन भी बढ़ा है। अब कई तरह की नस्ल की बिल्लियां लोग पाल रहे हैं। पालतू जानवर रखने के लिए लाइसेंस लेना जरूरी है। इसके लिए नियम बना है। हालांकि जिले में पालतू जानवर रखने का लाइसेंस लेना किसी ने जरूरी नहीं समझा है। शौक में पाले गए ये जानवर रेबीज के संवाहक हैं। इनके काटने या फिर पंजे मारने से रेबीज वायरस का संक्रमण होता है। यह जानलेवा है। अकबरपुर के अशोक नगर में अजीम को पालतू बिल्ली ने काटा और पंजा मार दिया था। 26 नवंबर को अजीम की मौत हो गई थी। जबकि दो दिन बाद उसके पिता इम्जियाजुद्दीन ने दम तोड़ दिया था।
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पालतू जानवर लोग शौक या फिर कई बार चोर आदि से सुरक्षा को लेकर घरों में रखते हैं। तीन माह की आयु में पालतू जानवर का रेबीज का टीका लगना चाहिए। यदि इस आयु में पालतू जानवर को टीका नहीं लग सका तो तत्काल टीका लगवा लेना चाहिए। इससे पालतू जानवर के काटने या फिर पंजा मारने की स्थित में रेबीज संक्रमण का खतरा नहीं रहता है।
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- डॉ. सुबोध कुमार, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी कानपुर देहात
नगर निकायों की ओर से पालतू जानवरों रखने के लिए लाइसेंस जारी करने का नियम है। लेकिन किसी ने आवेदन नहीं किया है तो अभी तक किसी निकाय में कोई लाइसेंस जारी नहीं हुआ है। जबकि नगरीय क्षेत्र में काफी लोग शौकिया पालतू जानवर रखे हैं। लाइसेंस न लेने से पालतू जानवरों को रेबीज का टीका भी नहीं लगा है। जल्द ही इसके लिए प्रयास शुरू किया जाएगा। पालतू जानवर रखने वाले परिवारों को चिन्हित कराकर प्रक्रिया के तहत लाइसेंस जारी किए जाएंगे।
-अजय कुमार, नोडल ईओ कानपुर देहात
लाइसेंस के लिए रेबीज टीका लगना जरूरी
पालतू जानवर को बिना रेबीज टीका लगे लाइसेंस जारी नहीं हो सकता है। यह नियम है। इधर लाइसेंस प्राधिकरण (निकाय या ब्लॉक) संजीदा नहीं हैं। टोका टाकी या नोटिस आदि नहीं मिलने से लोग घरों में पालतू जानवर रखे हैं। अफसरों की यहीं बेपरवाही और पालतू जानवर रखने वाले लोगों के सतर्क नहीं होने से रेबीज संक्रमण का खतरा बना रहता है। संवाद