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कानपुर विश्वविद्यालय: आंख मूंदकर देते नंबर, आंख खोलकर लेते पैसे 

Thu, 14 Jun 2018 05:43 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Thu, 14 Jun 2018 05:43 PM IST
सार

- ज्यादा से ज्यादा कॉपी जांचने के लिए जल्दी बाजी में कॉपी जांचते हैं परीक्षक
- 20 करोड़ में होता है मूल्यांकन, एक परीक्षक एक दिन में जांच देता है 150 कॉपियां

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Evaluation of examination copies done by students at CSJM University
कानपुर विश्वविद्यालय

विस्तार

छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) में 20 करोड़ रुपये अकेले उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में खर्च किए जाते हैं। पैसों के इस खेल के आगे परीक्षक यह भूल जाता है कि मूल्यांकन सही हो रहा है या गलत। स्नातक के प्रत्येक उत्तर पुस्तिका को जांचने के लिए परीक्षक को 15 रुपये और परास्नातक की एक उत्तर पुस्तिका के लिए 18 रुपये दिए जाते हैं। ऐसे में हर परीक्षक कमाई के लिए ज्यादा से ज्यादा उत्तर पुस्तिकाएं जांचने की कोशिश करता है।
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विश्वविद्यालय के आंकड़ों पर नजर डाला जाए तो एक परीक्षक दिन में करीब 150 कॉपियां जांच लेता है। इससे एक दिन में वह 2250 रुपये कमा लेता है। वह अपनी कॉपियों की गिनती भी नहीं भूलते। अब जरा समय पर भी नजर डालें तो एक परीक्षक एक कॉपी पर महज एक से दो मिनट व्यतीत करता है। इस बीच वह सभी उत्तर को देखता है और उसमें दिए जाने वाले नंबर को जोड़कर उत्तर पुस्तिका व शीट पर भी चढ़ाता है। विशेषज्ञों की मानें तो गलतियां इसी जल्दबाजी में परीक्षक करता है, और औसत अंक दे देता है।

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समन्वयक भी नहीं पकड़ते हैं गलतियां
परीक्षक द्वारा जांची गई उत्तर पुस्तिकाओं पर निगरानी रखने के लिए एक समन्वयक नियुक्त रहता है। समन्वयक की जिम्मेदारी है कि वह उत्तर पुस्तिकाओं को सरसरी निगाहों से देख ले कि सबकुछ सही है या नहीं। लेकिन आमतौर पर यह भी नहीं होता है। समन्वयक आमतौर पर कॉपियों को दोबारा चेक ही नहीं करता है। एक-दो समन्वयक चेक करते हैं लेकिन केवल खानापूरी के लिए।
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Evaluation of examination copies done by students at CSJM University
कानपुर विश्वविद्यालय
कार्रवाई का कोई डर नहीं, जिम्मेदारी भी नहीं
चैलेंज मूल्यांकन में 80 प्रतिशत कमियां परीक्षक की सामने आ जाती हैं। लेकिन विश्वविद्यालय की ओर से परीक्षक पर कोई कार्रवाई ही नहीं की जाती है। ऐसे में परीक्षकों को किसी भी तरह का डर नहीं होता है और वह मनमाने तरीके से अपना काम जारी रखता है। सूत्रों की मानें तो परीक्षक इसलिए भी नहीं डरते क्योंकि वह कॉपियां जांचकर होने वाली कमाई का कुछ हिस्सा विश्वविद्यालय के कुछ अधिकारियों को भी देते हैं। ज्यादातर ये शिक्षक या तो गेस्ट फैकल्टी होते हैं या फिर सेल्फ फाइनेंस डिग्री कॉलेजों से।

छात्रों से जंचवाई कॉपियां
बताया जाता है कि इसी सत्र में एक शिक्षक ने तो अपने छात्रों से ही उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन करा डाला। कुछ लोगों ने इसकी शिकायतें भी की लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

हाल में आए रिजल्ट का हाल
बीएससी में कुल छात्र : सवा तीन लाख
परीक्षा देने वाले : 2.20 लाख
सफल छात्र : 80 हजार करीब
एमएससी में कुल छात्र : 9234 छात्र
परीक्षा देने वाले : 7982
सफल छात्र : 4362
 
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