Etawah: ऑक्सीजन की कमी से पक्के तालाब में मरीं हजारों मछलियां, जांच करने पहुंची मत्स्य विभाग की टीम
यूपी के इटावा जिले में पक्के तालाब में ऑक्सीजन की कमी से हजारों मछलियों के मरने का मामला सामने आया है। जानकारी मिलते ही मत्स्य विभाग की टीम जांच करने पहुंची।
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इटावा के ऐतिहासिक पक्के तालाब में बुधवार को हजारों मछलियों की ऑक्सीजन की कमी से मौत हो गई। सूचना पर पहुंची मत्स्य विभाग की टीम और मत्स्य महाविद्यालय के विशेषज्ञों ने जांच पड़ताल की है। बुधवार को पक्के तालाब पर टहलने पहुंचे लोगों को मछलियां मरने की दुर्गंध आई। देखते ही देखते दोपहर तक यह दुर्गंध आसपास के क्षेत्र में फैल गई। इस पर नगर पालिका को सूचना दी गई।
सूचना पर गई नगर पालिका की टीम ने मत्स्य विभाग के अधिकारियों को जानकारी दी। मत्स्य विभाग की टीम ने मत्स्य महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. कैलाश यादव और डॉ. ध्रुव यादव की मद्द से जांच पड़ताल की। इसमें पता चला कि तालाब में मछलियों की संख्या के अनुसार पानी कम हो गया था। ऐसे में रुक-रुक हो रही बारिश से तामान में लगभग आठ डिग्री तक गिरावट आने से ऑक्सीजन की कमी हो गई। ऐसे में मछलियों के मरने का सिलसिला शुरू हो गया। हजारों की संख्या में मछलियां मर गईं। वहीं तालाब की सतह पक्की होने भी मछिलयों की मौत का कारण माना जा रहा है।
डॉ. ध्रुव यादव ने बताया कि तापामान के उतार चढ़ाव होने और तालाब में पानी कमी होने की वजह से मछलियों की मौत हुई है। ईओ विनय कुमार मणी त्रिपाठी ने बताया कि मछलियां मरने की सूचना होने पर मत्स्य विभाग को सूचना दी गई थी। उनकी ओर से जांच पड़ताल की गई है। उधर, पक्का तालाब स्थित सांईं मंदिर के पुजारी संतोष वर्मा ने बताया कि तीन दिन से बदबू आ रही है। पहले लगा कि शायद पानी गंदा होने की वजह से दुर्गंध है। बुधवार को मछलियां मरी होने पर सभासद को जानकारी दी। उन्होंने नगर पालिका के कर्मचारियों को अवगत कराया।
तिलातिया मछली करती है तीन से छह माह में प्रजनन
मत्स्य महाविद्यालय के डॉ. ध्रुव यादव के अनुसार, तालाब में ज्यादातर मछलियां तिलातिया प्रजाति की पड़ी थीं। इनकी शक्ति तेज होती है। तीन से छह माह के बीच यह प्रजनन करने लगती है। इससे तालाब में मछलियों की संख्या बढ़ गई है। संभवत: ऑक्सीजन की कमी का कारण यह भी हो सकता है।