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इटावा: कंधेसी घार से मिला नर डॉल्फिन का शव, मचा हड़कंप, जाल में फंसकर हुई मौत
Fri, 14 Jan 2022 12:35 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इटावा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इटावा
Published by: शिखा पांडेय
Updated Fri, 14 Jan 2022 12:35 AM IST
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डाल्फिन के शव का परीक्षण करते डॉ. राहुल संखवार
- फोटो : अमर उजाला
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चंबल नदी में शिकारियों के जाल में फंसकर एक तीन साल के नर डॉल्फिन की मौत हो गई। सेंक्च्युअरी अमले ने डॉल्फिन का शव बरामद कर लिया है। डॉक्टरी परीक्षण के बाद उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया है।
इन दिनों चंबल में विदेशी पक्षी काफी संख्या में पहुंचते हैं। इसके अलावा मछलियां, कई दुर्लभ प्रजाति के कछुए, घड़ियाल और मगरमच्छ चंबल में पाए जाते हैं। इनका शिकार करने के लिए शिकारी घात लगाए बैठे रहते हैं। पहले भी कई बार विभागीय लापरवाही के चलते जलीय जीवों का शिकार किया जा चुका है।
चंबल में नर डाल्फिन के शिकार का ताजा मामला तीन से चार दिन पुराना है। ग्राम जगतौली के पास शिकारियों ने जाल लगाया हुआ था। इसमें कई जलीय जीव फंसने की सूचना पर ग्रामीण पहुंचे तो शिकारी वहां से जाल छोड़कर भाग खड़े हुए। शिकारियों के जाल में फंसने से एक नर डाल्फिन ने दम तोड़ दिया।
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शिकार की सूचना पर चंबल सेंक्च्युअरी की टीम देर से सक्रिय हुई। टीम ने बृहस्पतिवार को डॉल्फिन का शव कंधेसी घार बीट से बरामद कर लिया। संरक्षित प्रथम श्रेणी का नर डॉल्फिन सेंक्च्युअरी अमले को मृत अवस्था में नदी किनारे मिला।
सेंक्च्युअरी क्षेत्राधिकारी हरि किशोर शुक्ला ने बताया कि डॉल्फिन के शरीर का कोई भी हिस्सा गायब नहीं मिला है, जिससे अनुमान लगाया गया कि मछली के क्षेत्रीय शिकारियों के छोटे जाल में डॉल्फिन धोखे से फंस गई होगी। डॉल्फिन को देखकर शिकारी जाल छोड़कर भाग गए।
अगर बाहर से जलीय जीवों का शिकारी तस्करी के लिए आए होते तो वह डॉल्फिन को नदी में छोड़कर नहीं जाते। अज्ञात आधा दर्जन शिकारियों के खिलाफ डॉल्फिन की हत्या करने का मुकदमा दर्ज कर मामले की तहकीकात शुरू कर दी गई है। डॉल्फिन के शव का डॉक्टरी परीक्षण के बाद अंतिम संस्कार कर दिया गया।
उप पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राहुल संखवार ने बताया कि तीन वर्षीय अवयस्क डॉल्फिन की मौत लगभग तीन से चार दिन पूर्व होने की आशंका है। डॉल्फिन का शरीर पूरी तरह से सुरक्षित था। डीएफओ दिवाकर श्रीवास्तव ने बताया कि डॉल्फिन का शव मिलने के बाद नदी में पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई है। विभागीय तहकीकात भी शुरू कर दी गई है। दोषियों को किसी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। संरक्षित नदी से चोरी-छिपे शिकार करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई भी की गई है।
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इन दिनों चंबल में विदेशी पक्षी काफी संख्या में पहुंचते हैं। इसके अलावा मछलियां, कई दुर्लभ प्रजाति के कछुए, घड़ियाल और मगरमच्छ चंबल में पाए जाते हैं। इनका शिकार करने के लिए शिकारी घात लगाए बैठे रहते हैं। पहले भी कई बार विभागीय लापरवाही के चलते जलीय जीवों का शिकार किया जा चुका है।
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चंबल में नर डाल्फिन के शिकार का ताजा मामला तीन से चार दिन पुराना है। ग्राम जगतौली के पास शिकारियों ने जाल लगाया हुआ था। इसमें कई जलीय जीव फंसने की सूचना पर ग्रामीण पहुंचे तो शिकारी वहां से जाल छोड़कर भाग खड़े हुए। शिकारियों के जाल में फंसने से एक नर डाल्फिन ने दम तोड़ दिया।
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शिकार की सूचना पर चंबल सेंक्च्युअरी की टीम देर से सक्रिय हुई। टीम ने बृहस्पतिवार को डॉल्फिन का शव कंधेसी घार बीट से बरामद कर लिया। संरक्षित प्रथम श्रेणी का नर डॉल्फिन सेंक्च्युअरी अमले को मृत अवस्था में नदी किनारे मिला।
सेंक्च्युअरी क्षेत्राधिकारी हरि किशोर शुक्ला ने बताया कि डॉल्फिन के शरीर का कोई भी हिस्सा गायब नहीं मिला है, जिससे अनुमान लगाया गया कि मछली के क्षेत्रीय शिकारियों के छोटे जाल में डॉल्फिन धोखे से फंस गई होगी। डॉल्फिन को देखकर शिकारी जाल छोड़कर भाग गए।
अगर बाहर से जलीय जीवों का शिकारी तस्करी के लिए आए होते तो वह डॉल्फिन को नदी में छोड़कर नहीं जाते। अज्ञात आधा दर्जन शिकारियों के खिलाफ डॉल्फिन की हत्या करने का मुकदमा दर्ज कर मामले की तहकीकात शुरू कर दी गई है। डॉल्फिन के शव का डॉक्टरी परीक्षण के बाद अंतिम संस्कार कर दिया गया।
उप पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राहुल संखवार ने बताया कि तीन वर्षीय अवयस्क डॉल्फिन की मौत लगभग तीन से चार दिन पूर्व होने की आशंका है। डॉल्फिन का शरीर पूरी तरह से सुरक्षित था। डीएफओ दिवाकर श्रीवास्तव ने बताया कि डॉल्फिन का शव मिलने के बाद नदी में पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई है। विभागीय तहकीकात भी शुरू कर दी गई है। दोषियों को किसी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। संरक्षित नदी से चोरी-छिपे शिकार करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई भी की गई है।