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नियोक्ताओं को ग्रेस पीरियड नहीं

Wed, 13 Jan 2016 01:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर Updated Wed, 13 Jan 2016 01:52 AM IST
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Employers no grace period

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने अपना हिस्सा जमा करने के लिए नियोक्ताओं को मिलने वाली पांच दिन के ग्रेस पीरियड की व्यवस्था खत्म कर दी है। अब तय अवधि में ही नियोक्ताओं को हिस्सा जमा करना होगा।

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ऐसा न करने पर नियोक्ताओं पर पेनाल्टी  लगाई जाएगी।  मौजूदा समय में नियोक्ताओं को महीना समाप्त होने के बाद 15 दिन के भीतर अपना अंशदान या प्रशासनिक शुल्क देना पड़ता है। इसमें पांच दिन का अतिरिक्त ग्रेस पीरियड भी दिया जाता था। यानी 20 दिन तक भुगतान कर सकते थे।
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देखने में आया कि ग्रेस पीरियड के दौरान नियोक्ता ज्यादा अंशदान जमा करते थे। इसके बाद कर्मचारी के खाते में अंशदान जमा होने में समय लगता था। मैनुअल भी इसका रिकार्ड तैयार करना पड़ता था। जानकारों के मुताबिक एक जनवरी से पीएफ जमा करने की व्यवस्था ऑनलाइन कर दी गई है।
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इंप्लाइज प्रॉविडेंट फंड स्टाफ यूनियन के महामंत्री राजेश कुमार शुक्ला ने बताया कि सर्कुलर जारी हो गया है। नई व्यवस्था एक फरवरी से प्रभावी होगी। नियोक्ताओं की ओर से जमा होने वाली अंशदान की जवाबदेही तय करने को व्यवस्था लागू की गई है। 

श्रम कानून का पालन न होने से खफा
कानपुर।
श्रम कानूनों का कानपुर समेत पूरे प्रदेश में कहीं पर भी पालन नहीं कराया जा रहा है। श्रमिकों, कर्मचारियों को पीएफ, ईएसआई का लाभ नहीं दिया जा रहा है।

इसके लिए प्रदेश सरकार और उसके अफसर सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं। ये बातें आल इंडिया सेंट्रल काउंसिल आफ ट्रेड यूनियंस (एक्टू) की ओर से उपश्रमायुक्त कार्यालय सर्वोदय नगर में आयोजित धरने में प्रदेश अध्यक्ष हरी सिंह ने कही।

उन्होंने कहा कि एलएमएल में 2007 से गैरकानूनी ले-आफ लिया जा रहा है। ले-आफ के दौरान मिलने वाला 25 फीसदी बकाया वेतन भुगतान नहीं किया जा रहा है। यहां के श्रमिक-कर्मचारी भुखमरी के कगार पर हैं। प्रदूषण के नाम पर शहर की टेनरियों को बंद किया जा रहा है। इसका प्रभाव कर्मचारियों की रोजी-रोटी पर पड़ रहा है।

नगर अध्यक्ष उमेश तिवारी ने कहा कि शहर की दादानगर, फजलगंज, पनकी की तमाम फैक्ट्रियों, कारखानों में वेतन पर्ची नहीं दी जा रही है। पीएफ, ईएसआई का लाभ भी नहीं दिया जा रहा है। महिला कर्मचारियों या अन्य कई कर्मचारियों को गेट पास तक नहीं दिया जाता है।


बोनस मांगने पर उन्हें निकाल दिया जाता है। भाकपा माले के सचिव विजय कुमार ने कहा कि केंद्र सरकार श्रम कानूनों को बदलने का प्रयास कर रही है। इस मौके पर अनंतराम बाजपेई, एमएएस जैदी, असित कुमार सिंह, राणा प्रताप सिंह, नेतराम, अजय सिंह, रामआसरे आदि मौजूद रहे।

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